देश को समर्पित किसी भी नागरिक का आंकलन उसकी पद प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि उसके द्वारा किये कार्यो के परिणामों से होता है

व्ही.एस.भुल्ले। इसे हम अपना सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि हम निरीह भारत वासी, जहां देखने, सुनने में तो सुरक्षित, समृद्ध नजर आते है मगर मुश्क...

व्ही.एस.भुल्ले। इसे हम अपना सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि हम निरीह भारत वासी, जहां देखने, सुनने में तो सुरक्षित, समृद्ध नजर आते है मगर मुश्किल यह है कि हमारे देश की स्थिति जैसी भी हो, मगर उसका एहसास हमें नहीं हो पाता। अपरिपक्व लोकतंत्र की दुष्वारियां कई हो सकती है। मगर हमें हमारे देश में हर भारत वासी में देश भक्त नजर आता है क्योंकि मातृशक्ति या वह भू-भाग जो हमारा लालन पालन करता है व हमारा स्वार्थ मुक्त पालक होता है। जिसे अगर हम अपनी भाषा में कहें तो वह सिर्फ और सिर्फ हमारी मातृभूमि है। एक मां जो जन्म देती है और सुख-दुख में भागीदार बन, अपने नौनिहालों के सुरक्षित बेहतर भविष्य के लिये जीवन पर्यन्त त्याग करती है मगर एक मां वो भी है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक लाख गुस्ताखियों के बावजूद भी अन्तिम समय तक हमें अपने आंचल में जगह देती है। वही जन्म पर प्रफुल्लित रहती है और मौत पर भी वर्षो तक मातम मनाती है यह सत्य है। 

बरना देश के सपूतों और उनके स्टेचू इस भू-भाग पर न होते, जिन्हें सत्ता के सर्वोच्च पदो पर बैठे लोग व्यवस्थागत, समय बेसमय याद कर, अपनी आस्था उनमें व्यक्त करते रहते है। यहीं किसी ाी राष्ट्र के नागरिक के लिये सर्वोच्च सत्य है। 
सत्ता, सिंहासन के कई रुप हो सकते है, मगर याद उन्हीं को किया जाता है जो सत्य के लिये शहादत को तैयार रहते है। लोगों को भ्रम है कि उनका जन्म मृत्यु पर एकाधिकार है मगर स पूर्ण सत्य यह है कि यह विधि, विधान के हाथ है। 

अगर इन किवदन्तियों से हटकर अगर कोई सत्ता, राष्ट्र, नागरिक अगर कहीं पर भी इन्सानियत के लिये संघर्ष कर रहा है तो निशंदेह वह कोई इन्सान या राष्ट्र भक्त ही हो सकता है। कम से कम हमें तो वर्तमान हालातों के मद्देनजर हमारे देश के प्रधानमंत्री और विपक्ष के वर्तमान नेताओं, बुद्धिजीवियों पर फिलहाल कोई संदेह नहीं होना चाहिए। आज जरुरत सिर्फ इस बात कह है कि देश में मौजूद प्रतिभाओं को सरंक्षण और प्रदर्शन के लिये उन्हें अन्जाम तक पहुंचाने की व्यवस्था तथा संसाधनों के साथ सेवा, सुविधा और बेहतर प्रशिक्षण की जरुरत है अगर हम समय रहते प्रतिभाओं की पहचान और विद्ववानों का स मान कर, नीतियां निर्धारित कर पाये तो हमें विश्व गुरु बनने सेकोई नहीं रोक सकता, क्योंकि अनादिकाल से ही हमारी महान भारत भूमि, मातृशक्ति कई विलक्षण प्रतिभाओं और महान सपूतों को जन्म देती रही है। इसलिये किसी भी नागरिक का अंाकलन उसकी पद प्रतिष्ठा से न होकर उसके द्वारा किये गये कार्यो के परिणामों पर आधारित होना चाहिए। 

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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Village Times: देश को समर्पित किसी भी नागरिक का आंकलन उसकी पद प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि उसके द्वारा किये कार्यो के परिणामों से होता है
देश को समर्पित किसी भी नागरिक का आंकलन उसकी पद प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि उसके द्वारा किये कार्यो के परिणामों से होता है
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