गरीब प्रदेश पर 1 लाख 40 हजार करोड़ का कर्ज, सवाल तो बनता है

विलेज टाइम्स। प्रदेश के सर्वोच्च सदन में सरकार की कार्यप्रणाली पर यह सवाल, कि 1 लाख 40 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी सरकार घी पी रही है सवाल इसलिये भी पु ता प्रमाणिक है, क्योंकि यह सवाल सत्ताधारी दल के विधानसभा सदस्य तथा 9 बार के 45 वर्षो तक विधायक रहे, म.प्र. के पूर्व मुख्यमंत्री, ग्रहमंत्री माननीय बाबू लाल गौर ने अपने ही दल की सरकार से किया है। 

भले ही उन्हीं के दल के वरिष्ठ नेताओं ने उनके द्वारा पूछे गये सरकार से इस सवाल पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया न हो, सिर्फ एक मंत्री की ही उन्हें दल से बाहर करने की मांग कर रहे है मगर यक्ष सवाल म.प्र. की उस 7 करोड़ की जनसं या वाले प्रदेश की, जनता केे सामने यह है कि गरीब संघर्षशील जनता अपनी सुरक्षा और अपने के बेहतर भविष्य के लिये 1 लाख 40 हजार करोड़ के कर्ज और लाख सितम सहने के बावजूद लोकतंत्र की रक्षा और उसके बेहतर भविष्य की खातिर चुप है। उसका क्या अपराध जो स्वयं को कर्जदार मेहसूस कर, अपनी और आने वाली नस्लो को एक कर्जदार के रुप में देख विचलित है। 

उस जनता का मानना है जैसा कि चर्चाओं में है कि हम कर्जदार रह, भूखे पेट, गन्दा पेयजल, गढ्ढा युद्ध सडक़, अंधकार युक्त जीवन, आभावों में जी सकते है। मगर हमारे नौनिहालों का जीवन कर्जदार, अराजकता का शिकार हो उसके स्वाभिमान पर सवाल हो, वह कैसे सह सकते है। 

आखिर क्या अपराध है इस प्रदेश का व इस प्रदेश लगभग उन 7 करोड़ लोगों का जो जाने अनजाने में सरकार चलाने वालो को, खुद असुरक्षित भूखा रह, आभावों में जी, समस्त सुविधायें जुटाने का कार्य कर उन्हें उनकी मर्जी अनुसार विभिन्न टेक्स के रुप में वेतन भत्ते सुख, सुविधायें मुहैया कराती है।  

खुद जहर रुपी शराब, बीड़ी, सिगरेट पी गड्डा युक्त, सडक़, अशुद्ध पेयजल व सेवा सुविधाओं के नाम अघोषित रिश्वत दे इन्हेंं जहाज, हेलिकॉप्टर, बंगला, लग्झरी वाहन व मुंह मांगे वेतन निर्धारण का मौका देती है और सवाल भी नहीं करती। 
उसे कष्ट है कि आ िार क्यों उनकी आने वाली पीढ़ी को 1.40 लाख करोड़ का कर्जदार उनके बगैर संज्ञान में लाये बनाया गया। कोई भी मां बाप कुछ भी सह सकता है। मगर उनके बच्चे कर्जदार हो वह कभी स्वीकार नहीं कर सकता। 

सरकार के साथ आखिर विपक्ष क्या करता रहा, जो कार्य विपक्ष को करना था वह कार्य सत्ताधारी दल के सदस्य को करना पढ़ा, आज प्रदेश के सामने यह भी एक यक्ष प्रश्र है। 
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