सियासी षडय़ंत्र के खुलासे पर मंत्री के आगे निरुतर नौकरशाहों ने साधी चुप्पी, शिवपुरी शहर की र्दुदशा का सच

विलेज टाइम्स/मप्र शिवपुरी 24 जुलाई 2016। दो बाई 3 किलोमीटर के रेडियस में फैले इस छोटे से शहर का र्दुर्भाग्य यह है कि विगत 10 वर्षो से यह ...

विलेज टाइम्स/मप्र शिवपुरी 24 जुलाई 2016। दो बाई 3 किलोमीटर के रेडियस में फैले इस छोटे से शहर का र्दुर्भाग्य यह है कि विगत 10 वर्षो से यह हलकट सियासत का अखाड़ा बन गया है। जिसमें सरकार के आला नेताओं सहित कुछ विपक्ष के नाम से चिरपरिचित नेता भी जमकर हाथ आजमा रहे। जनता वैवस और नौकरशाह उददंण्डों की भूमिका में  नजर आ रहे है। वहीं कुछ मीडिया भी जनता की इस र्दुदशा पर रोटियां सेकने और सियासतदार नेताओं के इशारों पर सच पर पर्दा डालने से नहीं चूक रहे। 

हालात ये है कि गांव से बदत्तर सडक़ों पर लोग टूट-फूट गिर रहे है। मगर नौकरशाही है, जो मंत्री तक को यह बताने तैयार नहीं कि ऐसे हालात क्यों है और वह किसके इशारे पर इस शहर को नरक बनाने पर उतारु है।

सच यह है कि कानून की किताबों में भी जनसुविधाओं को लेकर जो नियम कानून उनकी भी उन नौकरशाहों द्वारा सरेयाम धज्जियां सरकार के संरक्षण में उड़ाई जा रही है। अगर दूसरे शब्दों में यो कहे कि न तो यह चुने हुये जनप्रतिनिधि, पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, पार्षद, सरपंच, विधायक, सांसद और न ही पदेन सरकार के मंत्री की सुनने तैयार है। बड़ा अफसोस होता है शहर की र्दुदशा लाचार चुने हुये जनप्रतिनिधि और जनता की वैबसी तथा दम तोड़ते कानूनों को देख कि आखिर इस शहर में कौन सा शासन और कैसी सरकार चल रही है, जिसकी नौकरशाही न तो कानूनों को देख रही, न ही मंत्रियों की सुन रही और बड़ी बेरहमी से सरेयाम जनभावनाओं को कुचल नादिरशाही चलाने में जुटी है। 

गर्मी जाते ही जैस-तैसे लोगों को धूल-धक्कड़ पेयजल से निजात मिली, तो अब बारिश के चलते दल-दल से सनी गड्डों में तब्दील सडक़ों ने लोगों का जीना हराम कर दिया। जब हमारे स पादक वीरेन्द्र शर्मा जी ने म.प्र. सरकार की खेल युवा कल्याण धर्मस्य मंत्री श्रीमंत यसोधरा राजे से यह सवाल किया कि सडक़ों का निर्माण और मर मत के लिए जबावदेह विभाग के मेन्यूअल में स्पष्ट उल्लेख है कि बरसात के दौरान सडक़ों पर होने वाले गड्डों को भरने बारिश पूर्व निवदायें बुला एजेन्सी निर्धारित की जाती है या फिर विभागीय स्तर पर ही सडक़ मर मत मटेरियल की सप्लाई लेने हेतु एजेन्सी निर्धारित की जाती है। और विभागीय तौर पर फिर सडक़ों में होने वाले गड्डों को भर या मर मत कर सडक़ो को चलने लायक बनाया जाता है जिससे यातायात बाधित न हो। 

वहीं दूसरी ओर जब नवीन सडक़े बनाई जाती है, तब भी बुलाई जाने वाली निवदाओं में सडक़ निर्माण के दौरान यातायात बाधित न हो, तो  चलने लायक सडक़ निर्माण के लिए प्रावधान किया जाता है। क्या सरकार के जि मेदार लोग बतायेगें कि उन्होंने यातायात बाधित न हो और र्निविवाद रुप से यातायात चलता रहे कितनी निवदायें कितने रुपये की लागत से बुलाई गई है, जब जबाव के लिये मंत्री ने इशारा कर पीडब्लूडी के कार्यपालन यंत्री को जबाव देने कहा तो वह निरुतर हो गये। बार-बार पूछने के बावजूद भी वह कोई सन्तोषजनक जबाव नहीं दे सके। जिस पर मंत्री ने इन्जीनियर को रोकते हुये कहा कि अब रहने दीजिये आपके बगैर यहां से जाये। इस शहर में सडक़ों की दशा सुधरने वाली नहीं। 

सच यह भी है कि सडक़ निर्माण से जुड़ी एजेन्सियों द्वारा आवागमन सडक़ों पर बाधित न हो, इसलिये बरसात से पूर्व कच्चा पेंच रिपेयर जरुरत पडऩे पर इमलशन डामर से पक्का पेंच रिपेयर कराया जाता है। जिसके लिए अगर ठेकेदार निर्धारित है तो ठेकेदार टाइम कीपर, एसडीओं के मार्गदर्शन और निर्देशन में पूरी बरसात गड्डे भरने का और सडक़ मर मत करने का काम करती है। अगर पेंच रिपेयर के लिए ठेकेदार निर्धारित नहीं है तो विभागीय स्तर पर सेकड़ों मस्टर कर्मियों के माध्ययम से टाइम कीपर, सबइन्जीनियर, सहायक यंत्री के मार्गदर्शन में गड्डे भरने एवं सडक़ मर मत का कार्य निरन्तर कराया जाता है।  बरसात खत्म होते ही डामर से पक्का पेंच रिपेयर या सडक़ों को अच्छा बनाने के लिए रिन्युअल वर्क भी कराया जाता है। यह इन एजेन्सियों के कानून ही नहीं कत्र्तव्यों में वैधानिक रुप से सुमार है। जो सडक़ों के रख-रखाव के लिये जबावदेह है।  मगर विभागीय अधिकारियों द्वारा इस तरफ से मुंह फेरना वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा चुप रहना और सरकार द्वारा इन जि मेदार अधिकारियों पर कोई कार्यवाहीं नहीं करना, इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार का ऐसे अधिकारियों को सह और संरक्षण प्राप्त है। जो शिवपुरी शहर की जनता को खून के आंसू रुलाना चाहती है। 

शिवपुरी शहर की जनता से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है यह तो सरकार और वह नेता ही जाने, जो जिन्दाबाद करते नहीं थकते और अपने ही शहर के बैवस लोगों की मजबूरियों पर अपनी रोटियाँ सेकने से नहीं थकते। अगर सूत्रों की माने तो शहर ही नहीं सरकार की सह पर नौकरशाह और कुछ नेताओं को पूरा का पूरा एक रैकेट काम कर रहा है, जो मीडिया में वेसर पैर के मुद्दों को उछाल उसे असल मुद्दों से भ्रमित कर बैवजह के के मुद्दों में उलझाये रखता है। और सरकार से आना वाला करोड़ों का फंड यहीं रैकेट नौकरशाहों से मिल, अपना घर भर स्वच्छ छवि वाले नेता, समाजसेवी व मीडिया को बैवस या बदनाम करता रहता है। 
बरहाल अ ाी भी हम नहीं जागे तो हमारे बुजुर्ग ही नहीं हम तो इस र्दुदशा के चलते नरकीय जीवन जी रहे है, अगर यहीं हाल रहा तो हमारी नस्ल कलफ जायेंगी। बेहतर हो, हम सच को जान झूठ से मुकाबला करने तैयार हों। 

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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