माननीय श्रीमानों और कब तक सडक़ों पर अपमानित होगें हम

व्ही.एस.भुल्ले। अब तो आपके बीच के लोग ही निशाना बनाते है हमें और सुरक्षा मेें तैनात श्रीमानों की फौज मूगदर्शक बन तमाशबीनों की मुद्रा में ...

व्ही.एस.भुल्ले। अब तो आपके बीच के लोग ही निशाना बनाते है हमें और सुरक्षा मेें तैनात श्रीमानों की फौज मूगदर्शक बन तमाशबीनों की मुद्रा में नजर आती है फिर घटनाक्रम जो भी हो, आखिर सडक़ों पर झुंड के रुप में न्याय करने उतारु भीड़ का निशाना कब तक हम र्निअपराध लोग हमारी बहन, बेटी, बच्चे बनते रहेगें। कुछ तो शर्म करों आपकों वोट देकर विधायिका और टेक्स के रुप में नोट देकर आपकी कार्यपालिका को सक्षम सुरक्षित अधिकार स पन्न हम बनाते है, जिससे आप हम और हमारे लोगों का भविष्य को बेहतर ढंग से गढ़ सक्षम और सुरक्षित बना सके।

आभावों में जीते अपने भाग्य भरोसे हम लोग जैसे-तैसे कड़ी मेहनत कर कभी चोर, तो कभी लुटेरों और गुन्डो, भ्रष्टचारियों का शिकार हो, अपना जीवन निर्वहन कर रहे है। मगर अब तो आप लोगों के द्वारा गठित आदर्शबादी, संस्कारवान, अनुशासित दल ही सरेयाम झुंण्ड के रुप में सडक़ों पर विरोध के नाम गुन्डागर्दी पर उतारु है। हमारें बच्चे, माता-बहिने तक उस अपमान से असुरक्षित है, जिस सुरक्षा की जबावदेही आपकी है। फिर दल जो भी हों, आखिर किस नियम कानून के तहत इन्हें सडक़ों पर झुंण्ड के रुप में गुन्डागर्दी की स्वीकृति मिली हुई है। जिससे आज हम लोगों के बीच ाय और असुरक्षा का माहौल है। 

क्यों ऐसे श्रीमानों पर आप लोग कार्यवाहीं करते, जो उपद्रव के समय अपने कत्र्तव्यों से विमुख हो, हमारे अपमान का तमाशा देखते है। क्यों नहीं ऐसे दलों की मान्यता खत्म कर उन उपद्रवियों पर कड़ी कार्यवाही करते है, जो अपने जुनून के चलते समुचे समाज ही नहीं हम जैसे गरीबों को अपमानित कर दहत पैदा करते है। 

माननीय आप और आपके श्रीमान संवैधानिक के रुप से ही नहीं, उन कानूनों के तहत अधिकार स पन्न है जिसे हम नागरिकों ने सहर्ष स्वीकार किया है, अपने टेक्स के पैसे से आपकों मोटे-मोटे वेतन भत्ते आलीशान सुविधाओं सहित जरुरत के संसाधनों से भी सक्षम बना रखा है। फिर हमारी आप लोगों के रहते ऐसी दुर्गति क्यों? आज जब हम सडक़ों पर अपने बच्चे माता-बहिनों के चेहरे पर संगठित हुड़दंगियों के तमाशे के चलते भय देखते है, तो हमें एक वैवसी भरी गिलानी और इन्सानियत के नाते आक्रोश भी पैदा होता है। मगर हमारे संस्कार हमें मजबूर करते है, उस समाज की ाातिर जिससे आम नागरिक का जीवन सुखद और खुशहाल बनता है। जिससे एक सशक्त और खुशहाल राष्ट्र का निर्माण होता है। हमारी औकात नहीं माननीय, श्रीमानों  जो हम आपके सामने कोई गुस्तागी कर सके। 

क्योंकि हमें हमारे देश का महान संविधान कानून हमारे संस्कार, संस्कृति, स यता, मूल्य सिद्धान्त सर्वोपरि है। हम आपसे गुजारिश भी नहीं सिर्फ निवेदन कर सकते है कि आप हमारी व हमारी मां, बहन, बेटियों की सुरक्षा तय करे, बरना हम आभावों में तो जी सकते है। अगर हम गरीबों के स्वभिमान भी जाता रहा तो यह हमारे लोकतंत्र और समाज को सबसे बड़ी गाली होगी जिसे शायद कोई भी भला इन्सान सहन न कर सके। 
हमें उ मीद है कि आप हमारी पीढ़ा को समझ व्यवस्था और समाज को एक नई दिशा दे अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करेगें जिस तरह से हर नागरिक अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन करता है। 

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तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
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