जनसेवा के नाम, जनधन का उलीचा...

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज
भैया- दादा साथ, महाराज हाफ, अन्ना, मुन्ना सहित शेष बड़ बोलो का हुनर साफ, बोल भैये कैसी रही, अब तो हारे पूज्य पितामह, माननीयों का आर्शीवाद मने खुलेयाम प्राप्त है। इतने पर तो हारी सरकार निरविघन रुप से चल जायेगी और चढ़ती बेल पर अब न तो संगठन, न ही मालवा के मठाधीस और न ही अब खण्डवा, खरगौन वाले सिंह शाहो की मनमानी चल पायेगी। मने तो बोल्यू भैये अब हारे प्रदेश में शासन ऐसा चलेगा कि अब बच्चा-बच्चा ही क्या अब तो आम मतदाता भी हारी जय-जय कार कर जय बोलेगा, और इन गाड़ी भरे सूरमाओं का हाल देख अब कोई माई का लाल हारे खिलाफ बेवजह ही मुंह खोलने से पहले सौ बार अवश्य सोचेगा। 

भैये- लगता है भरी बरसात में ठीक सावन से पहले ही क्योंं बावला हो रहा है। क्या तने हारे लोकतंत्र का पावन सत्र नहीं दिख रहा है। ये अलग बात है कि भले ही हारे बुन्देलखण्ड वाले पण्डित जी के सितारे गॢदस में लगते हो, और कन्यादान कर पुण्य कमाने वाले पण्डित जी की व्यता पर लोग हसते हो, मगर सुनते है कि भाई भी चौसठ घर का खेल चौसठ चाल सोचकर खेलता है तभी तो भाई अच्छे अच्छों को नहीं झेलता है। 
भैया- मने तो बोल्यू हारे को पूरे एक दशक बाद ही सही पहली मर्तवा हारे पितामह और सूरमाओं के आर्शीवाद से बड़ी मशक्कत पश्चात हेन्ड फ्री मिला है, अब तो सरकार ही नहीं संगठन और शासन में भी हारा लगोंटा घूम रहा है क्योंकि मने भी अब इस मर्तवा उस्तादों का कोटा लक्ष्य से अधिक रखा है और र्निविघन हारा कारंवा आगे चल पड़ा है। 
भैये- मने तो लागे कि जनधन के उलीचे से मिली सौहारत पर इठलाना उचित नहीं, गर महान जनता ने गाड़े पसीने की कमाई का हिसाब पूछ डाला तो मिशन 2018 के लिये क्या बताओगे भले ही संघ साथी से कारंवा भरा रहे, मगर वोटो की झोली नहीं भर पायोगे। 
भैया- मने जानू, मगर कै करुं, पूरे एक दशक से महान जनता के बीच, जनता की खातिर लोकतंत्र में जनहित की खातिर डकरा रहा हूं। दीदी, अन्ना, मुन्ना, शाह, राजा, महाराजा सभी को तो सह समुचे संघ साथियों सहित संगठन को ढो रहा हूं। 
भैये- मने तो बोल्यू भाया इतना अंहकार ठीक नहीं, यह जनता जनार्दन है इसने बड़े-बड़े सूरवीर, शाहों को भी समय वेसमय जमीन दिखाई है, और आसमान से सडक़ पर ला उनकी औकात बताई है, इतिहास गवाह है। 
भैया- मने जाडू मगर कै करु माई बाप का आदेश है और फिर हारी जनता ही नहीं हारे को हारे संगठन का भी खुला  जनादेश है। अब हारे को चिन्ता कोणी, हारा अब समुचा प्रयास होगा। हारे प्रदेश में न तो भय, न ही भूख और न ही कहीं भ्रष्टाचार का नाम होगा। अब तो समुचे प्रदेश में बस केवल सुशासन होगा।  
हारे को तो लागे यही सुशासन मिशन 2018 के लिए अलाउद्दीन का चिराग साबित होगा जिससे चौथी मर्तवा भी हारी चल जायेगी और हारे कुनवे की सारी की सारी कौमें भी हाथों हाथ तर जायेगीं। 

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