आधी आबादी का सच, ऐतिहासिक कार्यो पर भारी पुरुष प्रधान सत्ता

व्ही.एस.भुल्ले। दो महिला मंत्रियों का अपना मंत्रालय में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बावजूद मंत्री मण्डल विस्तार के नाम उनके विभागों की वापसी इस बात का धोतक है कि पुरुष प्रधान पार्टी, सत्ता या समाज के दृष्टि कोण में आज भी कोई बहुत बड़ा बदलाब आया हो, कहना मुश्किल है। 

क्योंकि हालिया केन्द्रीय मंत्री मण्डल विस्तार में स्मृति रानी से मानव संसाधन मंत्रालय छीन कपड़ा मंत्रालय देना, जबकि वह दो वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति जो किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है, में ऐतिहासिक बदलाब लाने और उसे प्रायोगिक तौर पर लागू कराने में कामयाब हुई। 

वहीं दूसरी ओर देश के इतिहास में किसी प्रदेश में उघोगों की स्थापना हेतु,  इन्वेस्टर मीट में विश्व के 24 देश और देश लगभग हर बड़े उघोगपतियों को निवेश के लिये इक_ा करना, म.प्र. की वाणिज्य उघोग मंत्री यसोधरा राजे सिंधिया का ऐतिहासिक कार्य था मगर उनसे भी वाणिज्य उघोग विभाग का चला जाना, इस बात का धोतक है कि पुरुष प्रधान पार्टियों सत्ता और हमारे समाज में सक्षम काबिल महिलाओं और देश की आधी आबादी की क्या स्थिति है। भले ही इस तरह की पुरुष प्रधान पार्टी, सत्ता या समाज महिला सशक्तिकरण की कितनी ही डीगे क्यों न मारे, मगर सत्ता स्तर के ये दो घटनाक्रम तो चीख-चीख कर यहीं कहते है कि पुरुष प्रधान सत्ता, पार्टी समाज में काबिल महिलाओं की कार्य क्षमता, नेतृत्व स्वीकार्य नहीं जबकि हमारे देश में आधी आबादी महिलाओं की है। 

अगर चर्चाओं की माने तो इन दो कद्दाबर महिला मंत्रियों का दोष इतना है कि इनकी कार्य प्रणाली सत्य को लेकर काफी आक्रमक रही है। मगर राष्ट्र व जनहित में पुरुष प्रधान सत्ता, पार्टी इन्हें स्वीकार्य नहीं कर सकी। 
दूसरी चर्चा यह भी है कि राजनीति में खासकर लोकतंत्र में सरकार चलाने अत्यअधिक आक्रमकता, सत्य का सामना करते हुये, कई बातों को दरकिनार करना पढ़ता है। साथ ही मातृ संगठन में स्थाई स्थान बनाये रखने उससे भी सामाजस्य बैठाना पढ़ता है मगर सत्य जो भी हो, फिलहाल तो भारतीय इतिहास में क्रान्तिकारी कदम उठाने वाली इन दोनों महिला मंत्रियों से उनके विभाग वापस ले लिये गये है और केन्द्र सरकार में मानव संसाधन मंत्री के रुप में कार्य करने वाली स्मृति अब कपड़ा मंत्री है। 
वहीं म.प्र. सरकार में वाणिज्य उघोग विभाग गवाकर यसोधरा राजे केवल खेल युवा कल्याण धर्मस्य विभाग की मंत्री है।
लगता है देश की आधी आबादी का सच भी यही है।  
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment