जनभावनाओं को उकसाती जनप्रतिनिधियों की असंवेदनशीलता

विलेज टाइम्स। किसी भी सभ्य व्यवस्था में र्दुव्यवहार कभी भी अभिव्यक्ति का उचित माध्यम नहीं माना जा सकता। मगर जिस व्यवस्था से सहज अभिव्यक्त...

विलेज टाइम्स। किसी भी सभ्य व्यवस्था में र्दुव्यवहार कभी भी अभिव्यक्ति का उचित माध्यम नहीं माना जा सकता। मगर जिस व्यवस्था से सहज अभिव्यक्ति के माध्यम ओझल होने लगे और जनप्रतिनिधि असंवदेनशील हो कत्र्तव्य विमुख हो जाये तो कई तरह के शर्मनाक घटनाक्रम लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वभाविक रुप से सामने आ जाते है, जिन्हें उचित नहीं कहा जा सकता है। मगर हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह सब अनवरत चल रहा है। 


जनभावना की कीमत पर सत्ता आरुण लेागों को सोचना होगा कि लोकतंत्र के जिस तंत्र के सहारे वह लोक कल्याण का सपना पाल, सुबह से रात तक अपने को महान बनाने या कहलवाने में लगे रहते है। एक मायने में वह तंत्र ही किसी ाी लोक कल्याणकारी सत्ता, सरकार का प्रतिबि ब होता है जिसे चुने हुये प्रतिनिधि सदन में वोट दे, सरकार का रुप देते है। 

जब चुनी हुई सरकार का यह प्रतिबि ब जनता के साथ कत्र्तव्य विमुख हो जनभावना के विरुद्ध आचरण करता है ऐसे में आम जन खुद के वोट से चुने जनप्रतिनिधि और उस जनप्रतिनिधि के वोट से चुनी गई सरकार की ओर आशा भरी नजरों से देखता है। जब वहीं सरकार जनप्रतिनिधि जनभावना के विरुद्ध असंवेदनशील हो उन जनभावनाओं की अनदेखी करने पर उतारु हो जाये तो अन्तिम विकल्प के रुप में मीडिया का मंच ही एक दरवाजा उनके पास बचता है। 

मगर दुर्भाग्य कि अधिकांश मनी माइंण्ड मीडिया और सत्तासीन सरकार तथा उनके नौकरशाहों की हनक के चलते यह मंच भी जनभावनाओं के हाथों से जाता रहा, हालत ये है कि जिस सूचना स पर्क, जनस पर्क विभाग की स्थापना सरकार व आम जन की आवाज के बीच सेतु का कार्य करने के लिये की गई वह अब मात्र सरकारों के दलाल बनते जा रहे है और देखते ही देखते चाहे अनचाहे ढंग से मीडिया के रिंगमास्टर की भूमिका में आ गये है। जो अब किसी अखबार टी.व्ही. चैनल ही नहीं, चुन-चुन कर एक-एक पत्रकार को साम-नाम, दण्ड, भेद से कन्ट्रोल कर रहे है या प्रलोबन दे उन्हें अपने पक्ष में कर रहे है। बड़े चैनल अ ाबार सरकार को तो छोटे-मोटे अखबार चिन्दी पन्ने वालो को सरकारें अघोषित रुप से ब्लैक मेल कर रही है और जनभावनायें इस मंच के आभाव में दम तोड़ रही है।   

कारण साफ है कि लोकतंत्र केा जिन्दा रखने आजादी से लेकर आज तक मीडिया को लेकर कोई नीति ही नहीं बन सकी जिससे लेाकतंत्र के चौथे स्त भ और लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। 

इसके उलट अघोषित रुप से इतनी व्यवस्था अवश्य बन गयी कि जो बड़ा मीडिया हाउस है, वह सरकारों के माध्यम से अपने मनचाहे कार्य करा अपना-अपना इकबाल बुलन्द कर सरकारों की तरफदारी में जुटे रहते है और अखबार, चैनलों की आड़ में जमकर धन कूटते रहते है। 

सूचना स पर्क, जनस पर्क छोटे-मोटे अखबारों, पत्रकारों की मजबूरी का लाभ उठा उनकी मट्टी कूटते रहते है रहे कुछ रोटी राम सो वह सरकार के टुकड़ों पर जिन्दा रह स्वयं को गौरान्वित महसूस करते रहते है। 

क्योंकि हमारे लोकतंत्र में यह व्यवस्था आत्मसात हो चुकी है जिसको स्वीकारने में अब न तो कोई शर्म और न हीं अब गर्व महसूस करता है। यहीं कारण है कि अब हमारे महान लोकतंत्र में अभिव्यक्ति के प्रकार बदल रहे है किसी के मुंह कालिख तो किसी पर जूते फिक रहे है जो हमारे लोकतंत्र के लिये शर्म नाक ही नहीं, किसी भी स य समाज के लिये खतरनाक है। 

सच तो यह है कि अब सरकार में बैठे लोग भी सार्वजनिक मंचो से झूठ बोल रहे है और उनके नौकरशाह अहम मसलो से सरेयाम मुंह फेर रहे है। जिसमें विकाऊ मीडिया का तो भगवान ही मालिक है क्या दिखा क्या पढ़ा दे। कुछ भी नहीं कहा जा सकता। 

अगर यहीं हाल कालिख पोतने, जूता फेकने, बात-बात कर आगजनी, तोड़ फोड़ सॉशल मीडिया पर अन्धे भक्त बन, कोसने व चरित्रों पर लिखने बोलने का अनियंत्रित सिलसिला अनवरत चलता रहा। और जनभावना व्यक्त करने सहज स य मंच लोगों को नहीं मिला तो ऐसे ही हिंसा, कदाचरण, आत्महत्या और अनियंत्रित जन सैलाब आय दिन मंच ही नहीं सड़कों पर भी देखने मिलेगें। 

जो किसी भी स य समाज और हमारे महान लोकतंत्र के लिये किसी भी स्थिति में उचित नहीं होगा। बेहतर हो कि हम प्राकृतिक सिद्धान्त का पालन करते हुये तालाब, बांधो की तरह जरुरत अनुसार स्थापित मूल्य सिद्धान्त के अनुरुप विचार, जनभावनाओं पर रोक तो रखे मगर ऑव्हर फिलो होने की स्थिति में बेस्ट बीयर की व्यवस्था रखे तभी हम हमारे लोकतंत्र को बचा पायेगें।

COMMENTS

Name

तीरंदाज,328,व्ही.एस.भुल्ले,523,
ltr
item
Village Times: जनभावनाओं को उकसाती जनप्रतिनिधियों की असंवेदनशीलता
जनभावनाओं को उकसाती जनप्रतिनिधियों की असंवेदनशीलता
https://2.bp.blogspot.com/-Cs_REH6fFIs/VxPMugT1PyI/AAAAAAABLhM/ovii6XbZywAjgSlnnsrK7GAfLuSppWvhwCLcB/s1600/janta%2Bfile%2Bphoto.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-Cs_REH6fFIs/VxPMugT1PyI/AAAAAAABLhM/ovii6XbZywAjgSlnnsrK7GAfLuSppWvhwCLcB/s72-c/janta%2Bfile%2Bphoto.jpg
Village Times
http://www.villagetimes.co.in/2016/04/blog-post_16.html
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/
http://www.villagetimes.co.in/2016/04/blog-post_16.html
true
5684182741282473279
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy