50 वर्ष के उजाड़ को 45 दिन में समेटने की तैयारी

व्ही.एस.भुल्ले। हो सकता है भारत सरकार को 11 दिवसीय ग्राम उदय से भारत उदय अभियान 14 अप्रैल 2016 से 24 अप्रैल 2016 तक राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक सौहार्द, समरता एवं पंचायती राज प्रणाली को मजबूत एवं ग्राम विकास सहित किसान कल्याण, पोषण ग्राम पंचायत विकास में लोगों सहभागिता सुनिश्चित करने का प्रयास हो। मगर म.प्र. सरकार ने विगत 50 वर्षो में हुये गांवों के उजाड़ को 45 दिन में समेटने की तैयारी कर जो कार्य योजना तैयार की है। जो 14 अप्रैल से शुरु हो 31 मई तक चलेगी जिसका सम्पूर्ण प्रस्तुती करण जिले के कलेक्टर 25 जून से 30 जून 2016 तक मुख्यमंत्री करेगें। उसे देखते हुये नहीं लगता कि सरकार को कोई भारी कामयाबी मिलने वाली है।


क्योंकि बगैर बजट के विभागीय समन्वय के आधार पर जो गांव उदय से भारत उदय की तैयारी की गई है वह बड़ी ही हास्यपद है और ग भीर है। एक-एक छदम का हिसाब रखने वाले म.प्र. शासन से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी कि ग्राम पंचायतों के पास उसकी परिस पत्तियों का ही पर्ची साधारण नहीं। 

दूसरा अहम कारण कि ग्राम उदय करने ग्राम उदय से भारत उदय के विज्ञापन सिर्फ राज्य स्तरीय समाचार पत्रों में छपेगें। इन्हें कौन बताये कि विज्ञापन की जरुरत गांवों में है कि उन राज्य स्तरीय अखबार जो शहरों पढ़े जाते है। 

तीसरा कारण 13 विभागों की राज्य स्तरीय मु य सचिव की अध्क्षता वाली राज्य स्तरीय कमेटी (समिति) से जनजाति विभाग गायब है जिन्हें सर्वाधिक जरुरत ग्राम उदय में शामिल करने की है जिससे भारत का उदय ठीक से हो सके। 

म.प्र. एवं ग्रामीण विकास विभाग म.प्र. शासन द्वारा प्रकाशित मार्गदर्शिका पुस्तक में गांव के या शहर सहित बुद्धिजीवी पत्रकारों को समझने यह समरी भी नहीं कि वर्तमान में ग्राम उदय में सहायक ही नहीं उसकी स पूर्ण रीढ़ जमीन, जंगल, पानी, उपलब्ध संसाधनों की क्या स्थिति हे जिनके सहारे किसी भी गांव का खाका खीचा जा सके। जब किसी मर्ज का ही दवासाजो का पता न हो हो इलाजे क्या खाक करेगें। 

अगर लेागों की माने तो 2 वर्षो से हैरान परेशान किसान, मजदूर, भोले भाले ग्रामीणों तथा पंचायती राज्य की हत्या कर अपने मंसूबों को पूर्ण करने वालो की गलतियाँ छिपाने और पंच, सरपंच का ध्यान बटा सरकार के खाली खजाने से लोगों का ध्यान बटाने की असफल कोशिस मात्र है। 

क्योंकि खेत खाली किसान मजदूर भी खाली बैठे है वहीं खाली खजाने पर नौकरशाह, कर्मचारी हैरान बैठे है ऐसे ग्राम उदय से भारत उदय के बहाने अप्रैल-मई-जून कट जायेगें और बारिस होते ही किसान, मजदूर खेतों में काम पर तो विकास के कार्य कानूनन बन्द हो जायेगें। सो बैठे ठाले ग्राम उदय से भारत उदय का सपना देखने में हर्ज ही क्या?

मगर यह यक्ष प्रश्र यह है कि अगर म.प्र. में 12 वर्षो से सुशासन चल रहा है तो जो कार्य अब करने का अभियान चल रहा है वह तो पहले से ही म.प्र. में प्रचलित है इसमें नया क्या सिर्फ कत्र्तव्य विमुखता के अगर कत्र्तव्यनिष्ठा ईमानदारी के साथ कार्य हुआ होता तो गांवों का उदय तो पहले ही हो चुका होता। 

फिर क्या जरुरत थी राज्य स्तरीय अखबारों में विज्ञापन, चैनलों पर भाषण, दीवाल लेखन, पे पलेट किताब सामग्री रथ होल्डिंग बगैर प्लेक्स प्रचार केन्द्रीत कर मीडिया का मुंह चुप कर प्रशासनिक मशीनरी लगा ग्रामीणों को भरमाने की अब सच क्या है ये तो सरकार ही जाने मगर देर आये दुरुस्त आये अगर ग्राम पंचायतों में परिसं पत्तियों की पंजी निर्धारित और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकास उन्मुख जनभावना कल्याणकारी सलाह मशविरा सहित सही लेागों को लाभ और गलत लेागों को सरकार बन्चित करने वाली है वो भी ग्राम संसद के सहारे अगले वर्ष या 5 वर्ष का खाका खीचने वाली है तो हर्ज क्या। ऐसे में हर नागरिक का कत्र्तव्य है कि वह गांवों में होने वाली ग्राम ससंदों में भाग ले अधिक से अधिक भागीदारी निभाये और अपने गांव ही नहीं, आने वाली पीढ़ी के लिये देश को समृद्ध बनाये। 

क्योंकि जिस तरह से ग्राम उदय से भारत उदय की कल्पना जनता द्वारा  जनता के लिये कल्याण गांव विकास की गई वह तभी सफल होगी जब अधिका अधिक सहभागिता इन ग्राम संसदों ग्रामीण की बने और वह अनुभव कौशल का आभास इस ससंद को कराये। 
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