आदिवासियों के अस्तित्व का अलख जगाती मशाल

विलेज टाइम्स।   प्रकृति पुत्र कहे जाने वाले अनुसूचित जनजाति के बीच अलख जगाती ये श सीयत ाले ही 40 वर्ष का अपना कड़ा अनवरत संघर्ष पूर्ण कर चुकी है। मगर जो न कभी थकी और न कभी रुकी, सतत जलने वाली यह मशाल स्वावलंबी बन आज भी प्रकृति पुत्रों के बीच अलख जगाने में जुटी है, आदिवासियों के मान, स मान, स्वाभिमान के लिये संघर्षरत जल, जंगल, जमीन के प्राकृतिक अधिकार पर भले ही स पूर्ण जीत हासिल न कर सकी हो, मगर आज भी गांधीवादी रास्ते के सहारे उसका अनवरत संघर्ष जारी है। 

आचार्य विनोवा भावे, जय प्रकाश नारायण और गांधी के अनुयायी रहे ब्र हचारी, सुबबा राव जी से लेकर सुभाषचन्द्र बोस की विचार धारा से ओप्रोत रहे इस शक्स ने आखिरकार सुबबा राव जी के मार्गदर्शन में गांधीवादी रास्ते को अ ितयार किया और 1985 से जल, जंगल, जमीन पर प्राकृतिक हक हासिल करने, मान-स मान, स्वाभिमान की यात्रा आज तक अनवरत जारी रखी। जिसमें दांडी यात्रा से लेकर धरना प्रदर्शन के कई पड़ाव बीच-बीच में आये मगर एकता परिषद के रुप में इसका विस्तार देश ही नहीं विदेशों तक जा पहुंचा। और आज भी प्रकृति पुत्रों की सेवा में जुट, अलख जगाने के काम में लगा है। 

यूं तो राजगोपालन पी.व्ही. के नाम से देश ही नहीं विदेशों तक में प्रकृति पुत्रों सहित देश भर में उन्हें राजू भैया के नाम से जाना जाता है। जो एक स य सरल धीर ग भीर प्रकृति के धनी है। उन्होंने प्रकृति पुत्रों के कई अहम मुद्दों पर कई सार्थक किताबें भी लिखी है और आज भी जल, जंगल, जमीन का संघर्ष अपने स्वावल बी संगठन एकता परिषद के माध्यम से जारी रख, पूर्णत: आदिवासी नेतृत्व तैयार करने में जुटे है।
जिससे भोले भाले आदिवासी अपनी समस्यायें मुद्दों का निदान स्वयं करा सके। 
एकता परिषद से ही जुड़े रामप्रकाश कहते है कि जो संघर्ष यात्रा हम लोगों ने आज कई वर्ष पूर्व जल, जंगल, जमीन के हक की खातिर गांधीवादी मार्गो से राजगोपालन जी के नेतृत्व की उसमें अहिंसा के मार्ग पर चल अभी हमें असिंक सफलता तो मिली है मगर पूर्ण सफलता प्राप्ति तक हमारा संघर्ष शेष है और यह तहे जिन्दगी प्रकृति पुत्रों की खातिर जारी रहेगा। 

वही एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल ने भी एकता संदेश के वार्षिक अंक 2015 के माध्यम से कहा है कि एकता परिषद के समस्त सदस्यों और कार्यकत्र्ताओ को उनके समर्पण और रचनात्मक कार्यो के लिये बधाई। आप सबके सहयोग से संघर्ष, संवाद और रचना की 25 वर्षो की सामूहिक यात्रा स पन्न हुई। आने वाले वर्षो में हम सबकों जयजगत के नये अभियान के लिये तैयार रहना है। वर्ष 2018 में 10 लाख लेागों के निर्णायक आन्दोलन से भारत के करोड़ों वंचितों के अधिकारों के लिये हम सबको मिलकर अभियान शुरु करना है। युवा वर्ग और महिलाओं की विशेष भूमिका इन भावी आन्दोलनों में होगी। आन्दोलन के दूसरे चरण में एक वैश्विक अभियान के लिये हम वर्ष 2019 में दिल्ली से जिनेवा की यात्रा प्रार भ करेगें, ताकि एक वैश्विक आन्दोलन की भूमिका का निर्वहन हम कर सकें। पूरी दुनिया में एक अहिंसात्मक-अनुशासित आन्दोलन के रुप में एकता परिषद के प्रति बहुत उ मीदें है इसीलिए हमारा दायित्व हमारी भूमिका और अधिक व्यापक हो रही है। मुझे विश्वास है कि हम सब और पूरा एकता परिषद परिवार इस नयी भूमिका के लिये तैयार है। 
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