पहचान बनी परंपरा, जनसेवा को समर्पित, सिंधिया परिवार

विलेज टाइम्स/म.प्र. शिवपुरी मार्च 2016। जिस तरह से गत दिनों शिवपुरी आकर और ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर 3 अप्रैल को आने वाली लाइफ लाइन एक्सप्रेस की तैयारियों को मूर्त रुप देने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और सांसद श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया जी की धर्म पत्नी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया और उनकी बेटी ने मय परिवार स्थानीय लेागों से चर्चा सलाह मशविरा पश्चात तैयारियों का खाका खीचा उससे जाहिर है कि क्षेत्र के लेागों के प्रति उनका कितना आत्मीय लगाव है। 


क्षेत्र के नागरिकों के सुख-दुख में नियमित सिरकत करने वाले सिंधिया यूं तो न कभी थके न कभी रुके अभी कुछ दिन पहले ही 18 करोड़ की लागत सेे निर्मित हो रहे, जिला चिकित्सालय के नये भवन निर्माण और जीर्णेाद्वार का अवलोकन करते हुये उपस्थित मीडिया के लेागों से बोले कि आप लोग भी रक्तदान शिविर लगाये कॉग्रेस के लेागों से भी कहूंगा और मैं भी रक्त दान करुंगा। 

अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित जनसेवा की पर पराओं को आगे ले जाते और लेागों के बीच सुख-दुख की घड़ी में हमेशा साथ खड़े रहने की नई पर परा का सूत्रपात करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया की क्रियाशीलता जनसेवा में यहीं समाप्त नहीं हो जाती बल्कि वे क्षेत्र के मुखिया होने के नाते इससे आगे बढ़ के भी जनसेवा में विश्वास रखते है। उन्होंने अपने कै. वासी पिता श्रीमंत माधवराव सिंधिया के पद चिन्हों पर आगे बढ़ते हुये गुना-इटावा रेल लाइन की तरह लगभग 350 कि.मी. आगरा-मु बई को जोडऩे वाला राष्ट्रीय राजमार्ग देवास-ग्वालियर फॉरलेन मंजूर करायी वहीं सवा सौ करोड़ का एन.टी.पी.सी. इन्जीनियरिंग कॉलेज जो अमेठी के बाद दूसरा शिवपुरी में होगा 190 करोड़ का मेडिकल कॉलेज, पॉलिटीकल कॉलेज रेल फुट ब्रिज कई नई रेल गाड़ी, सीवर लाइन इत्यादि वह बड़े कार्य है। जिनकी चर्चा अवश्य लेागों के बीच होना चाहिए। 

बहरहॉल मौका है 3 अप्रैल को आने वाली लाइफ लाइन एक्सप्रेस का है जिसमें आंख, कान, गला, कटे हॉट और अन्य बीमारियों के इलाज के लिये दिल्ली से दिल्ली के डॉक्टर शिवपुरी मेेंआकर शिवपुरी के लेागों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करेगें, जिसमें अभी तक लगभग 5000 लोग रजिस्ट्रेशन करा चुके है। 

निश्चित ही जहां कै. महाराज माधौराव प्रथम ने जहां सामाजिक सरोकार संस्कार और विकास की पर परा का सूत्रपात इस क्षेत्र में सिंधिया स्टेट के मु िाया के रुप मेंं किया, उसकी निरन्तरता उनके पुत्र कै.महाराज जीवाजी राव ने भी यह क्रम जारी रखा, उसके बाद यहीं क्रम कै. महाराज माधव राव सिंधिया ने भी जारी रखा और अब श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया तक जारी है। मगर जिस पर परा की नीव डाल जिस सामाजिक सरोकार, संस्कारों की भव्य ईमारत श्रीमंत ज्योतिरादित्य सिंधिया खड़ा करने में जुटें है वह भी राजनैतिक खींचतान के बावजूद भी, वह जब भी अस्तित्व में आयेगी निश्चित ही ऐतिहासिक होगी और सामाजिक समरसता के नये आयाम तय करेगी। 

मगर वर्तमान सियासत और समाज के बीच सेतु का कार्य करने में जुटे है सिंधिया जैसा कि वह क्षेत्र के लेागों से कहते है कि उनका क्षेत्र उनका परिवार है और वह इस बात को समय-समय पर अपने कार्यो से ऐहसास भी कराते है। मगर वह फिर भी कभी भी कोई शिकायत किसी के प्रति जाहिर नहीं करते, यहीं उनकी सहदृयता है, इतना ही नहीं वह जब तब विकास या जनसेवा के मुद्दों पर भी कभी विपक्ष से गुरेज नहीं रखते और मंचो से भी विकास जनसेवा के लिये एक होकर कार्य करने का आव्हन करते रहे, ऐसे सहदृयी विराट व्यक्त्तिव का धन्यवाद ही नहीं, अभिनन्दन भी बनता है। बरना आज के सार्वजनिक जीवन में या राजनीति में ऐसे जननेता कहां है। जिनका सिर्फ और सिर्फ अन्तिम लक्ष्य जनसेवा, दीन दुखुयो की सेवा है। फिर चाहे वह सामाजिक सरोकार हो या फिर विकास हो, ऐसे में क्षेत्र के नागरिकों का कत्र्तव्य बनता है कि वह कई वर्षो से सुनियोजित तौर पर फैलाये जा रहे भ्रम से बाहर निकल उन कार्यो पर निगाह दौड़ाये जिससे  नागरिकों का सीधा सरोकार होता है। बरना भ्रम की दुनिया बहुत बड़ी है और अच्छे नेता और नेतृत्व कम सोचना चाहिए क्षेत्र नहीं तो कम से कम अपनी आने वाली पीढ़ी के लिये तो अच्छे गलत का फर्क समझाना चाहिए। कि समाज, सरोकार, संस्कार और संस्कृति किसे क्या होती। तभी हम एक अच्छा समाज और व्यवस्था हम बना पायेगें। 

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