समय गलत हो सकता है, मगर समझ नहीं- जेएनयू में राहुल

विलेज टाइम्स, फरवरी 2016- कॉग्रेस का सामना आज किसी साधारण सरकार, संगठन, सोच से नहीं अब्बल बल्कि अपना व्यापक आधार तैयार कर चुके, ऐसे संगठन ...

विलेज टाइम्स, फरवरी 2016- कॉग्रेस का सामना आज किसी साधारण सरकार, संगठन, सोच से नहीं अब्बल बल्कि अपना व्यापक आधार तैयार कर चुके, ऐसे संगठन से है जो केन्द्र ही नहीं कई राज्यों में जिसकी सरकारे है। जिसकी जड़े विभिन्न स्वरुपों में एक वट वृक्ष की तरह लोकतंत्र में समाहित हो चुकी है। जिसका प्रार्दुभाव भारतीय लेाकतंत्र में आज से 20 वर्ष पूर्व ही हो चुका है। इसका एहसास अपनी-अपनी सत्ता और राजनैतिक रखूख कायम, मगर कॉगे्रस का बन्टाढार कर अब निस्तानाबूत करने पर उतारु उन मूड़धन्यों को नहीं हो सका, जो आज भी गाहे-बगाहे अपने- अपने स्वार्थ सिद्धि में लगे है। आज कमजोर हो चुकी कॉग्रेस के उदाहरण स्वरुप भारतीय राजनीति में अस्तित्व पा चुके कई दल है जिनमें प्रमुख रुप से, चाहे एम.डी.एम. के., टी.डी.पी. त्रिणमूल कॉग्रेस, बसपा, स.पा., रा.ज.द., जे.ड.यृू आप जैसे दल हो, सभी का उदभव कॉगं्रेस के ही गर्भ से किसी न किसी रुप में हुआ है। मगर किसी को कभी कॉग्रेस को स हालने की जरुरत नहीं पड़ी और न आज है। 


परिणाम कि कॉगे्रस का भविष्य भी समय के विपरीत तथा कथित रुप से देश द्रोहियों का अड्डा बनते जा रहे, जे.एन.यू. में   एक सजग विपक्ष के नाते जा पहुंचा, जो देश के लिये फिलहाल एक ग भीर मसला है। 
कॉग्रेस के इस नौजवान युवा तुर्क की जे.एन.यू. में उपस्थिति को लेकर सवाल जबाव हो सकते है। मगर सजग विपक्ष के मुखिया होने के नाते उनका यह कदम सटीक है, क्योंकि जे.एन.यू. देश की याति प्राप्त संस्था है। और वर्तमान में देश को चलाने वाली एक सक्षम सरकार, ऐसे में सरकार को और विपक्ष को अपनी-अपनी जबावदेही समझना अति आवश्यक है।  
अगर देश के ग्रहमंत्री देश की जनता को यह आश्वासन दे सकते है कि दोषी ब शा नहीं जायेगा। और किसी को परेशान नहीं किया जायेेगा। ऐसे में विपक्ष का मुखिया होने के नाते जे.एन.यू. राहुल का जाना भाषण करना एक सजग विपक्ष की पहचान है। 
अगर जे.एन.यू. में कुछ गलत है तो सरकार की जबावदेही है वह उसे दुरुस्त करे, कोई निर्दोष अपराधी न ठहराया जाये। यह विपक्ष की जबावदेही है सो स्वस्थ लेाकतंत्र में राहुल ने भी अपनी जबावदेही का पालन किया है फिर सवाल क्यों ? 
रहा सवाल राष्ट्र भक्ति का तो वह भी भारत के नागरिक है और देश एक प्रतिष्ठित ही नहीं देश भक्त परिवार के मुखिया भी है। जिसनें देश के लिये 3-3 शहादत दी है। निश्चित ही राहुल इस बात को जानते होगें। 
मगर विगत वर्षो से लेकर पक्ष या अन्य राजनैतिक दलों में राहुल को लेकर होने वाली चर्चायें उनकी समझ अनुसार हो सकती है और उन चर्चाओं के अपने- अपने कई मायने भी हो सकते है। मगर कॉग्रेस के मुखिया होने के नाते उन्हें उनके कत्र्तव्य निर्वहन के लिये दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 
क्योंकि वह 10 जनपथ के सलाहकार और कॉग्रेस की नीति निर्धारको से बाहर ही आज तक क हा निकल सके। जैसा कि अभी तक उनका इतिहास रहा है कि वह इन सलाहकार नीति निर्माताओं से अलग हट कभी कुछ करने का प्रयास किया हो, विरोधी तो विरोधी कई मर्तवा तो उनको लेकर उनके ही दल में दबी जबान सवाल होते रहे है। 
सवाल कत्र्ता सीधे राहुल पर सवाल दागने से पूर्व यह क्यों भूल जाते है कि सवा अरब की जनसं या वाले देश में कितने धर्म, जाति, क्षेत्र, भाषा, बोलियां और उनके रहन-सहन की अपनी आदते, पर परायें संस्कृति है। 
जिनका अनुभव, सलाह मशविरा छवि चमकाऊं क पनी, निजि सचिवों या देखने-सुनने से नहीं आता बल्कि लेागों की भावना, भारतीय लेाकतंत्र में मौजूद विभिन्न धर्म, जाति, भाषाई बोलियां वाले लेागों को मेहसूस करने में आता है। 
मगर कॉग्रेस में मौजूद फाइव स्टार कल्चर नेता या फिर राजनैतिक रुप से घाग नेताओं के व्यान तो  विभिन्न विवादों को लेकर आते है। जो जानते है देश का मर्म वो बोलते नहीं जो बोलते है। वह कॉग्रेस से इतर स्वयं का नफा नुकसान देख बोलते है। शेष को अनुभव ही नहीं कि वह क्या बोल रहे है और क्यों?  मगर र्दुभाग्य कि जब भी राहुल कुछ करने या फिर देश के लेागों को समझने का प्रयास करते है। विरोधी दल स्वभाव अनुरुप बबन्डर खड़ा कर सवाल करने में जुट जाते है। 
ऐसे में कॉग्रेस की स्थिति बड़ी विकट बनी हुई है देखना होगा कि आ िार और कब तक कॉग्रेस के अन्दर स्वार्थ पर ा खेल चलता रहेगा। क्योंकि अब न तो बड़ी तादाद में कॉग्रेस के शुभचिन्तक बचे, न ही वह मैदानी संरचना। और न ही वह मीडिया जिसकी दिलचस्वी कभी कॉग्रेस में हुआ करती थी। कारण साफ है ल बे समय से कॉगे्रस की संवाद, स पर्क हीनता और संगठनात्मक ढांचे को चर-मराने के बावजूद भी कॉग्रेस आज उस दिशा में काम नहीं कर पा रही, जिसकी उसे विगत 20 वर्षो से दरकार थी।  
                                                                           जय स्वराज............. 

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समय गलत हो सकता है, मगर समझ नहीं- जेएनयू में राहुल
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