शिवपुरी में शासकीय धन की लूट के सरगना की, चर्चाये सरगर्म

व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स, म.प्र. शिवपुरी, फरवरी 2016- अब देश में मोदी की सरकार हो, या म.प्र. की शिवराज सरकार भ्रष्टाचार के खात्मे के लिये उठाये जा रहे कदमों का कितना ही दम क्यों न भरें, मगर भ्रष्टाचार के नाम पकड़े जाने वाले एक-दो लोग को छोड़ दें तो भ्रष्टाचार थमने के बजाये वह दिन-दूना रात चौगना बढ़ता ही जा रहा है। ये अलग बात है कि कभी म.प्र. के मु यमंत्री ने कभी भ्रष्टाचार के  खात्में की शुरुआत ऊपर से करने की कही थी। इस दिशा में लोकायुक्त द्वारा शिकायतों के आधार पर म.प्र. के आला अफसर एवं कर्मचारियों के यहां छापे डाल उन्हें रंगे हाथों पकड़ा भी जा रहा है। 


इसी क्रम में शिवपुरी जिले के एक आला अधिकारी सहित कई अन्य जगह भी लेाकायुक्त द्वारा छापामारी की गई। मगर शिवपुरी जिला है कि जिसमें भ्रष्टाचार या राजस्व की लूट थमने का नाम ही नहीं ले रही। चाहें खनिज राजस्व हों या फिर आबकारी राजस्व बड़े ही सुनियोजित तरीके से व्यवस्था के नाम करोड़ों के बारे-बारे न्यारे हो लिये और लेागों को कानो कान खबर नहीं हो सकी। 

ऐसा ही हाल विकास कार्यो और लोककल्याणकारी योजनाओं को लेकर है। चाहें वह मनरेगा में हुई 21 करोड़ से अधिक की जांच सिद्ध वित्तीय अनियमितता या फिर 12 करोड़ से अधिक का बी.आर.जी.एफ फण्ड 4 करोड़ से अधिक की आंगनबाड़ी मर मत हो सभी को लेकर सवाल हो रहे है। और चर्चायें भी सरगर्म है, अगर सूत्रों की माने तो एक अधिकारी ने तो आला अधिकारी के साथ हिस्सेदारी में स्टॉन क्रेशर तक लगा डाला। आबकारी में पुर्न नीलामी में करोड़ों रुपये मूल्य की दुकानों को औने पौने दाम दिये जाने का मामला हो, जिसमें आबकारी अधिकारी को निलंबित होना पड़ा या फिर अवैध रेत परिवहन में पकड़े जाने वाले वाहनों को छोडऩे का मामला हद तो तब है, जब 4500 रुपये में बिचने वाले रेत वाहन कीमत 500 रुपये मान जुर्माना करने का खेल खेला जाता रहा। 

इसी प्रकार राशन वितरण में बड़े पैमाने पर विगत वर्षो से चल रहे है घालमेल अर्थात गरीबों के हक की लूटपाट को लगभग 12 एफ.आइ..आर. दर्ज कराने वाले को हाल ही में आये फूड ऑफीसर को चलता कर दिया गया। 
वहीं प्रधानमंत्री द्वारा शुरु की गई योजनायें इस जिले में रेंगती नजर आ रही है। चाहेंंं वह स्वच्छता हो या फिर ग्रीन इंडिया, डिजिटल इंडिया, जनधन, जीवन सुरक्षा, अटल पेंशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई स्टार्टप सभी फाइलेा में चारों खाने चित पढ़ी है। 

जिस स्वच्छता का विगत वर्ष से ढिढौरा पीटा जा रहा है अगर जिला मु यालय के बाथरुमों का हाल देख लिया जाये तो सारी स्वच्छता समझ आते देर न होगी, मगर जिस मसले और जिलें में सिया को लेकर करोड़ों, अरबों रुपये की लूट पाट हुई है वह किसी से छिपी नहीं। हालात ये बन गये है विगत वर्षो से 1200 रुपये की रेत ट्राली 4500 से 5000 रुपये प्रति ट्राली और 8000 रुपये का रेत ड पर 16-18 हजार रुपयें में बिक रहा है। जिसमें बड़ा ड फर तो 18 हजार से 25000 हजार तक लगभग दर बिच रहा है किसी समय रेत का गढ़ रहे इस जिले की खदाने अगर बन्द है तो या निर्माण कार्यो में जुटे ठेकेदार, क पनियों की रायल्टियों की सी.बी.आई. द्वारा जांच की जाना चाहिए क्योंकि अवैध उत्खनन का मामला सीधे-सीधे वन एवं पर्यावरण मंत्रालय केन्द्र सरकार के अधीन आता है। जिसके क्षेत्र में किसी भी प्रकार का उत्खनन बगैर सप्रीम कोर्ट द्वारा चिन्हित कमेटी सिया की अनुमति के नहीं किया जा सकता। लेेकिन अपुष्ट सूत्रोंं की माने तो विगत 2 वर्ष में शिवपुरी के अन्दर रेत, मुरहम, बोल्डर का बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन किया गया है। 

जिसकी सच्चाई बगैर सी.बी.आई. जांच के सामने नहीं आ सकती। बहरहाल जो भी जिस तरह से लूटपाट में लीन लेागों द्वारा भारत सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों को इस जिले में पलीता लगा है। बैसा शायद ही देश में कोई दूसरा जिला हो, लगभग केन्द्र की सभी योजनाओं में फिसड्डी यह जिला अब तो जनसुविधा, विकास के नाम शासकीय राजस्व लूट का गढ़ बन गया। जैसी कि चर्चायें आये दिन शिवपुरी को लेकर सरगर्म बनी रहती है। 
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