म.प्र. सुशासन की साख पर बट्टा, चिन्ता विषय

व्ही.एस.भुल्ले। म.प्र. जिस तरह से म.प्र. में विगत 12 वर्षो से सुशासन का डंका पीट सरकार को चलाया जा रहा है। उसी सुशासन में सहायता के लिये डकराते लोग इस बात का प्रमाण है कि व्यवस्था गत अराजकता इस प्रदेश में कितनी शहरी चढ़े जमा चुकी है कि क्या चुने हुये जनप्रतिनिधि, सत्ताधारी दल, विपक्ष, जनता की तो विशात  ही क्या ? जो घुटन ारे माहौल में जीने पर मजबूर है जो कुछ बोल पाये, अब तो चोटी के नौकरशाह भी व्यवस्था में बढ़ी अराजकता को लेकर सरेयाम सार्वजनिक मंचों से डकरा रहे है, जिन्हें संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। अर्थात म.प्र. की व्यवस्था के बड़े ब्यूरोक्रेट नौकरशाह आई.ए.एस. एक दो नहीं तीन-तीन आई.ए.एस अपनी व्यथा सार्वजनिक कर चुके है।


वहीं विगत वर्ष एस.ए.एस. संगठन से जुड़े नौकरशाह भी धमकी, कुटने, पिटने के बाद एक दिन का सेटडाउन कर अपना विरोध सरकार के आगे दर्ज करा चुके है। मगर कर्मचारी, अधिकारियों के कुटने-पिटने का सिलसिला प्रदेश में अनवरत जारी है। वहीं अध्यापक संघ, संविदा कर्मी, अतिथि शिक्षकोंं का दुखड़ा भी किसी से छिपा नहीं जहां अध्यापकों को भोपाल की सड़कों पर पटक-पटक कर पुलिस सबक सिखा चुकी है, इससे पहले कि  सरकार सांस ले पाती। 

कि त्रिस्तरीय पंचायती राज के लाखों चुने हुये जनप्रतिनिधियों ने उनके अधिकारों पर नौकरशाही के अधिपत्य को लेकर हल्ला बोल दिया। परिणाम कि सरकार को रतलाम उप लेाकसभा चुनाव में अपनी 1 लोकसभा सीट गबानी पढ़ी।

इससे पहले कि सरकार इन्फुट के आधार पर कुछ कदम बढ़ा पाती कि मु यमंत्री से विधायकों की वन टू वन मीटिंग के नाम संभाग बाइज हुई मुलाकात में विधायकों का सर्व टूट गया और विधायकों ने नौकरशाही को लेकर गुबार निकाल डाला, मगर जिस तरह से आई.ए.एस. रमेश थेटे, शशि कर्णावत और अब झाबुआ कलेक्टर का सच सामने आया है उसे देख सुन कर नहीं लगता कि म.प्र. में सुशासन के नाम की कोई चीज शेष रह गयी हो।

सुशासन की सबसे बड़ी फजीयज की मिशाल शायद ही म.प्र. ही नहीं देश में कहीं और किसी शहर में देखने मिले जो म.प्र. के एक जिला मु यालय के शहर शिवपुरी में देखने मिले। जहां की सड़कों की र्दुदशा को लेकर हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा 4 सदस्यीय समिति का गठन कर सड़कों की यथा स्थति को जानना पढ़ा।

कोर्ट कमीश्रर समिति का जनहित में माननीय न्याय के आदेश पर भ्रमण इस बात का प्रमाण है कि सरकार और नौकरशाही द्वारा किये जा रहे, सड़क निर्माण को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जानकारी की क्या काफी है।

इतना ही नहीं म.प्र. शासन के महात्वकांक्षी जनकल्याणकारी जनसुनवाई का आलम यह है कि किलो मीटरों दूर से अपनी समस्याओं का निदान कराने आने वाले लेागों को या तो आला नौकरशाह सुनते नहीं अगर सुन भी ले तो प्रताडि़त आवेदक को उसी विभाग के मुखिया के पास चलता कर दिया जाता है, जिससे वह प्रताडि़त होता है। 

इसी शिवपुरी जिले के राजस्व विभाग के 2-2 आला अधिकारियों के यहां लोकायुक्त का छापा इस बात का प्रमाण है कि सुशासन कहां तक जा पहुंचा है।

शासकीय कार्यालयों में पसरा सन्नाटा और भटकते लेाग अब तो चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते है। बहरहाल म.प्र. में सुशासन की यह वह छोटी-मेाटी नजीरे है। जिन्हें प्रमाण के तौर पर देखा जा सकता है। अगर यहां अव्यवस्था, असुरक्षा, अलाली के इतिहास लिखकर भी बट जाये तो शायद ही सुशासन का दम भरने वाले उस पर संज्ञान ले। क्योंकि सुशासन वालो को प्रचार-प्रसार के बहाने सकारात्मक सुशासन देखने व आम जनता को जनता के ही धन से दिखाने का मौका जो मिल रहा है। ऐसे में अराजक पूर्ण स्थिति में जा पहुंची व्यवस्था पर सज्ञान लेने का सवाल ही कहा उठता है क्योंकि प्रदेश की जनता जो भोली-भाली और उसे जागरुक रखने का दम भरने वाले मुंह में मुसीका डाल धन्धे पर जो उतर गये है देखना होगा कि आखिर सुशासन के नाम व्यवस्था में अराजकता का नंगा नाच और कितने दिन चलता है। फिलहाल तो मेहर विधानसभा का उपचुनाव सर पर है, जहां स्वराज को लेकर भी चिंगारी धधक रही है।



देश के सूखा प्रभावित किसानों को दी जाएगी १९५९ करोड़ रूपए की सहायता : फसल हानि के लिए आर.बी.सी. के तहत दी जाएगी सात सौ करोड़ रूपए की सहायता
रायपुर, ३१ जनवरी २०१६  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर प्रदेश के सूखा प्रभावित किसानों को विभिन्न प्रावधानों और घोषणाओं के तहत दी जाने वाली राहत राशि का आंकलन कर लिया गया है। इन किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र (आर.बी.सी.) ६-४ के तहत फसल हानि के लिए दी जाने वाली अनुदान राशि के अलावा विभिन्न प्रकार के छूट और अन्य सहायता के रूप में लगभग कुल १९५९ करोड़ ४७ लाख रूपए की सहायता दी जाएगी। इसमें अकेले राजस्व पुस्तक परिपत्र ६-४ के तहत फसल हानि के लिए आर्थिक सहायता अनुदान के रूप में प्रदेश के दस लाख २८ हजार ३७८ किसानों को कुल ७०० करोड़ रूपए की सहायता राशि का वितरण किया जाएगा। इसमें से प्रभावित जिलों में किसानों को सहायता राशि का वितरण शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सूखा प्रभावित किसानों के वर्ष २०१५-१६ में भू-राजस्व (लगान) सिंचाई कर में छूट देने की घोषणा की गई थी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार सूखा प्रभावित २४ लाख १८ हजार ०११ किसानों को दो करोड़ ६५ लाख रूपए की लगान में छूट दी जाएगी। इसी तरह छह लाख ९० हजार ६५५ किसानों के वर्ष २०१५-१६ के १५ करोड़ ५४ लाख रूपए का सिंचाई कर माफ किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा सूखा प्रभावित क्षेत्र के सभी गांवों में एक क्विंटल चावल के भण्डारण की व्यवस्था की गई है। इस पर कुल दो करोड़ १० लाख रूपए का भार राज्य शासन पर आएगा। मुख्यमंत्री घोषणा के अनुरूप महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत मजदूरों को १५० के बजाय २०० दिनों की रोजगार की व्यवस्था की जा रही है। इससे दस लाख मजदूरों को फायदा मिलेगा और इस पर ८० करोड़ रूपए खर्च किए जाएंगे। राष्ट्रीय फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमित किसानों को ३०० करोड़ रूपए की बीमा राशि का भुगतान किया जा रहा है। सूखा प्रभावित किसानों के अल्पकालीन ऋण को मध्यकालीन ऋण में परिवर्तन, ब्याज अनुदान और ऋण माफी के रूप में तीन सौ करोड़ रूपए की छूट दी जाएगी। इससे नौ लाख ५२ हजार किसानों को फायदा मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने सिंचाई पम्पों को १५०० यूनिट अतिरिक्त निःशुल्क बिजली देने का ऐलान किया था। उनकी घोषणा के अनुरूप चार लाख किसानों को १५०० यूनिट अतिरिक्त निःशुल्क बिजली देने की व्यवस्था की गई है। इससे उन्हें कुल २०८ करोड़ रूपए की छूट का लाभ मिलेगा। सूखा प्रभावित लघु और सीमांत किसानों को आगामी खरीफ सीजन वर्ष २०१६ के दौरान अधिकतम एक क्विंटल निःशुल्क धान बीज देने का प्रावधान किया गया है। इससे दस लाख २८ हजार किसानों को २६१ करोड़ रूपए के निःशुल्क प्रमाणित बीज मिलेगा। सूखा प्रभावित किसानों के बेटियों के विवाह के लिए भी राज्य सरकार द्वारा व्यवस्था की गई है। इसके तहत मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत दी जाने वाले सहायता राशि १५ हजार रूपए से बढ़ाकर ३० हजार की गई है। इससे लगभग पांच हजार किसानों को उनकी बेटियों के विवाह के लिए २० करोड़ रूपए की सहायता राशि दी जाएगी। सूखा प्रभावित किसानों को डीजल पम्प अनुदान के लिए तीन करोड़ २५ लाख रूपए का अनुदान दिया जाएगा। इससे लगभग डेढ़ हजार किसान लाभान्वित होंगे। विभिन्न विकास प्राधिकरणों के माध्यम से असाध्य विद्युत पम्पों का भी विद्युतीकरण किया जाएगा। इससे लगभग चार हजार किसानों को २२ करोड़ ४० हजार रूपए का फायदा मिलेगा। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की समस्या के निराकरण के लिए भी ४४ करोड़ ५३ लाख रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति के लिए २२ करोड़ ६३ लाख और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति के लिए २१ करोड़ ९० लाख रूपए का प्रावधान किया गया है।

विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा अजमेर
-प्रो. देवनानी जयपुर, 31 जनवरी। शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी ने कहा कि राज्य सरकार के दो वर्ष के कार्यकाल में अजमेर ने हर क्षेत्र में प्रगति की है। विकास की यह र तार और तेज होगी। शहर विकास के नये सोपान तय करेगा।
        शिक्षा राज्य मंत्री प्रो. देवनानी ने रविवार को मित्र नगर में दस लाख रुपये की लागत से बनने वाले सड़क निर्माण कार्य का शुभार भ किया। इस अवसर पर महापौर श्री धर्मेन्द्र गहलोत एवं स्थानीय पार्षद श्री चन्द्रेश सांखला सहित अन्य जनप्रतिनिधि व अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम को स बोधित करते हुए  प्रो. देवनानी ने कहा कि मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे के नेतृत्व में राजस्थान ने दो वर्षो में शानदार प्रगति की है। प्रदेश का हर क्षेत्र में विकास हुआ है। अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में दो वर्षो में 46 करोड़ रूपये के विकास कार्य करवाए गए है। विकास की यह र तार आगे भी जारी रहेगी।

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