राजस्व अधिकारियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में, हो सकता है 7 वर्ष का कारावास- आयुक्त ग्वालियर

विलेज टाइम्स, म.प्र. ग्वालियर, फरवरी 2016- प्राप्त जानकारी के अनुसार अपनी मजबूत प्रशासनिक दक्षता: के लिये जाने जाने वाले ग्वालियर आयुक्त के.के खरे  ने राजस्व की बढ़ती समस्याओं के मद्देनजर कमजोर भू-स्वामियों की भूमि पर दबंगों के साथ सांठ-गांठ कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्रकरण दर्ज कराये जा सकते है। यह निर्देश संभाग आयुक्त के.के खरे ने ग्वालियर संभाग के सभी जिला कलेक्टरों को दिये है।

संभाग आयुक्त के.के खरे ने कहा है कि महिला भू-स्वामी विधवा, नाबालिग, वृद्ध व कमजोर भू-स्वामी की भूमि पर दबंग व्यक्तियों द्वारा अवैध कब्जा कर लिया जाता है। खरे ने कहा कि अवैध कब्जे से पीडि़त भू-स्वामियोंं के द्वारा नायब तहसीलदार न्यायालयों मेे भू-राजस्व संहिता की धारा-250 के तहत आवेदन प्रस्तुत करने पर राजस्व अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण हेतु राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों को भेजा जाता है। राजस्व अधिकारी द्वारा स्थल निरीक्षण रिपोर्ट में अतिक्रमणकर्ता का उस जमीन पर अंदाजन 30 से 40 वर्ष का कब्जा लिख दिया जाता है। जबकि राजस्व अधिकारी को स्थल निरीक्षण के दौरान उस समय क्या स्थिति है ऐसे तथ्य लिखना चाहिए। इस तरह की रिपोर्ट संबंधित राजस्व अधिकारी द्वारा लोक सेवक के दायित्चों का निर्वहन नहीं माना जा सकता। ऐसे राजस्व अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-188 के तहत प्रकरण दर्ज कर सात वर्ष का कारावास हो सकता है। संभाग आयुक्त ने संभाग के सभी कलेक्टरों को ऐसे प्रकरणों की विस्तृत जांच करने और  इस बिन्दु को राजस्व अधिकारियों की मासिक समीक्षा बैठक के स्थायी एजेण्डे में स िमलित करने के निर्देश भी दिए है।

तिल की खेती से किसान श्री लालचन्द की आर्थिक हालत सुधरी : सालाना ८० हजार की शुद्ध आमदनी
रायपुर  ३ फरवरी २०१६ कृषि विभाग की योजनाओं का फायदा लेकर छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिलों के किसान भी नगदी फसलों की खेती को अपनाने लगे हैं। इन्ही योजनाओं का लाभ लेकर सरगुजा जिले के प्रेमनगर विकासखण्ड के ग्राम महोरा के किसान श्री लालचन्द ने आधुनिक तौर-तरीके से नगदी फसल तिल की खेती कर अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधार ली है। किसान श्री लालचंद खरीफ मौसम में अपने खेतों में तिल बोते हैं। पिछले खरीफ मौसम में लगभग पांच हेक्टेयर में तिल की खेती की थी। तिल की खेती से ८० हजार रूपए की आमदनी हुई। इतना ही नहीं उन्होंने समन्वित खेती पद्धति को अपनाकर मछली पालन और साग-सब्जी की खेती को आय का अतिरिक्त जरिया बनाया है। श्री लालचंद के पास ८ हेक्टेयर कृषि भूमि है।किसान श्री लालचंद पहले परम्परागत ढंग से खेती करते थे। जिससे उन्हें कम फायदा होता था। श्री लालचन्द अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारने केे लिए परम्परागत खेती के स्थान पर उन्नत तौर-तरीके से खेती करने फैसला लेकर कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारियों से सम्पर्क किया। श्री लालचंद ने कृषि विज्ञान केन्द्र अजिरमा सूरजपुर के वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया और आधुनिक तरीके से खेती करने की योजना बनाई। श्री लालचन्द ने खरीफ मौसम २०१५-१६ में ५ हेक्टेयर में तिल की खेती की। इससे १८ क्विंटल तिल की पैदावार हुई। श्री लालचन्द तिल की खेती के साथ-साथ निचली जमीन पर धान की खेती भी करते हैं। इसके अतिरिक्त मछली पालन व सब्जी-भाजी की खेती कर अच्छी आमदनी ले रहे हैं। श्री लालचंद एकीकृत रोग एवं कीट प्रबंधन के साथ-साथ जैविक खाद का उपयोग करते हैं। कृषि विभाग की ओर से सिंचाई के डीजल पम्प भी मिला है। बीते खरीफ मौसम में श्री लालचन्द को तिल की खेती से ८० हजार रूपये की शुद्ध आमदनी हुई। किसान श्री लालचन्द अपने बच्चों की पढ़ाई लिखाई अच्छे से करा पा रहे हैं। उसके जीवन स्तर में आशाजनक सुधार आया है।

मच्छरजनित जिका बुखार के प्रति सतर्कता बरतें -चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
जयपुर, 3 फरवरी।  चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ के निर्देशानुसार जिका वायरस के संभावित प्रसार को रोकने हेतु प्रदेश के सभी मु य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किये हैं। प्रदेश में अब तक जिका वायरस का कोई भी प्रकरण सामने नहीं आया है। डेंगू चिकिनगुनिया की भांति जिका वायरस का वाहक भी एडेस एजिप्टि मच्छर होने के कारण मच्छर जनित बीमारियों की प्रभावी रोकथाम के निर्देश दिये गये हैं।
श्री राठौड़ ने प्रदेश में आगामी 8 फरवरी से 22 फरवरी तक क्रेश प्रोग्राम के तौर पर फोगिंग, स्पे्र, एंटीलार्वा गतिविधियां करवाने हेतु सभी मु य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिये हैं।
चिकित्सा मंत्री ने प्रदेश के आम नागरिकों से अपने घर के आसपास टायर, टिन के डिब्बे, प्लास्टिक की बोतले, पक्षियों के परिन्डे, सीमेंट की टंकियों, कूलर, रेफ्रिजरेटर की निचली टे्र इत्यादि को सप्ताह में एक बार खाली करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही अस्पताल में खून की जांच करवाने और डॉक्टर की सलाहनुसार उपचार लेने का भी आग्रह किया है।
अतिरिक्त निदेशक ग्रामीण स्वास्थ्य डॉ. सुनिल सिंह ने बताया कि इस वायरस के उपचार में एसिटोमिनाफेन नामक टेबलेट चिकित्सक द्वारा दी जाती है। इसके साथ ही मरीजों को द्वव्य पदार्थों का सेवन कराने के साथ ही पर्याप्त आराम भी आवश्यक है। 

विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्ध-घुमक्कड़ जातियों का विस्तृत सर्वे और पंचायत होगी

भोपाल : बुधवार, फरवरी ३, २०१६

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिये हैं कि प्रदेश के सभी जिलों में विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्ध-घुमक्कड़ जातियों का विस्तृत सर्वे करवायें। पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति वितरण की लगातार मॉनीटरिंग करें। मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध-घुमक्कड़ जाति कल्याण विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री श्री अंतरसिंह आर्य और मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्ध-घुमक्कड़ जातियों को समाज की मुख्य धारा में लाने के लिये योजनाबद्ध प्रयास किये जायें। इन जातियों की पंचायत आगामी अप्रैल माह में बुलाई जाये। विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्ध-घुमक्कड़ जाति कल्याण विभाग के सुदृढ़ीकरण के साथ ही इन जातियों के हितग्राहियों की आवास योजना की अनुदान राशि बढ़ाई जाये। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पिछड़ा वर्ग विभाग की हितग्राहीमूलक योजनाओं के अमल पर लगातार ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति समय-सीमा में उपलब्ध करवाई जाये। बताया गया कि विमुक्त, घुमक्कड़ और अर्द्ध-घुमक्कड़ जातियों के विद्यार्थियों के लिये प्रदेश में १४० छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं। विमुक्त जाति आवास योजना में इन जातियों के हितग्राहियों के लिये १,०८४ आवास बनाये गये हैं। विमुक्त जाति बस्ती विकास योजना में एक करोड़ १६ लाख रुपये की लागत के ४९ कार्य करवाये गये हैं। प्रदेश में प्री-मेट्रिक पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति योजना में ३३ लाख ९ हजार ६८८ तथा पोस्ट-मेट्रिक पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति योजना में ४१ लाख ३ हजार ७५६ विद्यार्थी को लाभान्वित किया गया है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के १२ हजार युवाओं को कौशल विकास योजना में मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


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