विपक्ष की अहम भूमिका के आभाव में पनपदा बहम

विलेज टाइम्स, जनवरी 2016- किसी भी लेाकतांत्रिक व्यवस्था में हर किसी बात के बैवजह का विरोध स्वस्थ लेाकतांत्रिक व्यवस्था के लिये उचित नहीं, तर्क पूर्ण सकारात्मक विरोध सदन से सड़क तक भी हो तो उसे लेाकतांत्रिक व्यवस्था में स्वस्थ ही कहा जायेगा। अगर किसी भी प्रकार का विरोध व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या अंहकार बस हो भले ही वह संगठनात्मक हो वह गलत ही कहा जायेगा। 

ऐसे में सबसे अहम भूमिका उस सत्ता धारी दल की होती है जिसे किसी भी देश की जनता देश की सुरक्षा विकास और उसके खुशहाल जीवन के लिये चुनती है। उसकी जबावदेही बनती है। कि वह व्यक्तिगत टीका टिप्पणी से इतर सदन में स्वस्थ माहौल तैयार करे, जिससे देश व देश की जनता का भाग्य लिखने वाले कानून व्यापक बहस के पश्चात मूर्तरुप ले सके और उन पर खुली चर्चा भी हो सके। न कि पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत जनता के धन से चलने वाला सदन बार-बार स्थगित और अनिश्चित काल के लिये स्थगित हो बन्द हो सके। 

मगर इसे हम देश का सौभाग्य ही कहेगें कि केन्द्र में सदन के अन्दर भले ही कितना ही विरोधाभास रहा हो, मगर कार्यवाही निर्धारित समय तक चली। 

ये सही है कि अहंकार किसी के भी अन्दर हो सकता है फिर वह पक्ष हो या विपक्ष, मगर लेाकतंत्र का तकाजा यह होता है कि लेाकतंत्र में जनता सर्वोपरि होती है, क्योंकि लेाकतंत्र में सदनों तक पहुंचाने का कार्य पक्ष-विपक्ष को जनता ही करती है। अगर ऐसे में व्यक्तिगत या वैचारिक अहम के चलते सदनों में जन भावनाओं की फुटबॉल बनाया जाये, तो यह हमारे महान लेाकतंत्र के लिये घातक है। और उस जनता के साथ विश्वासघात है जो खुद की खुशहाली और रक्षा के लिये उन्हें  चुनावों में अपना बहुमूल्य मत दे चुनती है। 

बेहतर हो देश की रक्षा और खुशहाली के लिये पक्ष-विपक्ष एक दूसरे के साथ सालीन व्यवहार रखे और तर्क पूर्ण तथ्यात्मक बहस के माध्यम से ऐसे कानूनों का तेजी से निर्माण हो, जिससे आम गरीब के बीच खुशहाली के भांव के साथ राष्ट्र सुरक्षित और खुशहाल बन सके। यहीं तकाजा आज हमारे महान लोकतंत्र का है। 

जल का निर्माण कारखानों में नहीं होता है    - चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री
जयपुर, 27 जनवरी । चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री तथा झुंझुनूं जिल के प्रभारी मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा है कि जल का निर्माण कारखानों में नहीं होता है इसलिए इसको संजोना ही होगा। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्रांति हुए 300 वर्ष के लगभग समय हो चुका है। लेकिन हम आज भी कारखानों में पानी नहीं बना पाए हैं। पानी का स्त्रोत धरती ओर आकाश हैै और हमें इन्ही स्त्रोतों से प्राप्त जल का संचय करना होगा। श्री राठौड बुधवार को अलसीसर पंचायत समिति के टमकोर गांव में मु यमंत्री जल स्वावल बन अभियान का आगाज करते हुए बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि विश्व में सभी स यताओं को उदय नदियों के किनारे हुआ और यह भी सत्य है कि उन स यताओं के पतन में सबसे बडा कारण जल की कमी रही। जिस प्रकार हम किसी व्यक्ति से कोई सामान लेकर उसे समय पर लौटाते हंै, उसी प्रकार हमारी जि मेदारी बनती है कि धरती से हम जितना जल ले रहे हंै, उसकी समय पर पूर्ति करें। इसी भावना को ध्यान में रखकर इस अभियान का शुभार भ किया गया है। जिसका उदेश्य पार परिक जल स्त्रोतों का उदार कर भू जल स्तर को बढ़ाना है और जल का बेहतर से बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होनें कहा कि इस अभियान की शुरूआत एक यात्रा की शुरूआत है, जिसमें अधिक से अधिक लोग जुड़कर और अपने तन, मन एवं धन से सहयोग करके इस अभियान को आंदोलन में बदलना होगा। झुंझुनू सांसद संतोष अहलावत ने कहा कि हमें जल की एक-एक बूंद को धरती में समायोजित करना होगा। उन्होंने लोगों से इस अभियान में जुडऩे की अपील करते हुए कहा कि जो पैसे से सहयोग कर सकता है वो पैसे से सहयोग करे और जिसके पास पैसा नहीं है व श्रम से सहयोग करें तथा जिसके पास उपकरण है, वह उपकरणों से सहयोग करें। किसी भी तरह का सहयोग जो इस अभियान को सफल करता हो, उसकी अपेक्षा लोगों से की। अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष सुंदरलाल ने कहा कि यह सबका कार्यक्रम है। इसलिए सभी को मिलकर इस अभियान को सफल बनाना होगा। मण्डावा विधायक नरेन्द्र कुमार ने लोगों से यह वादा लिया कि हम अपने घर का पानी बाहर नहीं आने देंगे। खुद को स्वस्थ और साफ सुथरा रखेंगे।

इससे पूर्व कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित अतिर्थियों ने भूमि पूजन कर कार्यक्रम का विधिवत आगाज किया। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र कुमार गुप्ता, उपवन संरक्षक आर एन मीणा, उप जिला प्रमुख बनवारीलाल, अलसीसर प्रधान गिरधारी लाल, उपखण्ड अधिकारी सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, मीडियाकर्मी एवं ग्रामीण उपस्थित थे। इसी प्रकार जिले की अन्य चयनित ग्राम पंचायतों में भी जनप्रतिनिधियों द्वारा इस अभियान का शुभार भ किया गया।
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