खुद का भट्टा बैठालने पर उतारु बी.एस.एन.एल.

विलेज टाइम्स, जनवरी 2016- शनिवार-रविवार को इन्तमानन से छुट्टी मनाने वाले बी.एस.एन.एल के अफसर बी.एस.एन.एल से फोकट में मिले न बरों से आम उपभोक्ता का कॉल रिसीब करने में भले ही तौहीन समझते हो, मगर चौपट संचार सुविधाओं का आलम यह है कि अब तो वह वेतन भले ही बी.एस.एन.एल. से लेते हो, मगर सुविधाओं के नाम बैवस उपभोक्ताओं को कनेक्शन कटवाने की सलाह देने से भी नहीं चूकते। 


बैसे भी हजारों उपभोक्ता पहले ही बी.एस.एन.एल. के गैर जि मेदारना  व्यवहार के चलते, प्रायवेट प्रोवाइडरों की शरण में जा चुके है। शेष मानसिक रुप से प्रताडि़त हो वैबसी के चलते प्रायवेट प्रोवाइडरों के दर जाने की तैयारी में है और हो भी क्यों न क्योंकि उपभोक्ताओं की सुनना तो दूर फोन उठाने वाला तक नहीं है। यह आलम उन लेागों का है जो जे.टी.ओं.  से लेकर एस.डी.ओ., टी.डी.एम., जी.एम., सी.जी.एम. सहित सी.एम.डी. तक का दरवाजा खटखटाने तक में गुरेज नहीं करतेे। मगर अंधेर गर्दी चौपट राजा के रास्ते चलता यह महकमा कभी कमाई के मामले में देश के नवरत्नों में गिना जाता था। 

अगर अपुष्ट सूत्रों की माने तो जिन प्रायवेट क पनियों को बी.एस.एन.एल. अपनी सेवाये देता है उनके इन्टरनेट तो फर्रराटे से दौड़ रहे है, मगर बी.एस.एन.एल. की व्यवस्था का भट्टा बैठ जाना लेागों की समझ से परे है। ऐसे में केवल एक ही प्रायवेट क पनी ऐसी हैै जो अपनी खुद ही लाइने बिछा साम,नाम,दण्ड,भेद के माध्यम से अपने नये उपभोक्ता की सं या बढ़ाना चाहती है। 

परिणाम कि बी.एस.एन.एल. सेवा संघर्ष करने से पहले ही चारों खाने चित पढ़ी है और उपभोक्ता हैरान परेशान बहरहाल बी.एस.एन.एल. की उल्टी गिनती जारी है। देखना होगा कि वह और कितने दिनों तक अपना बजूद कायम रख पाता है। 
जय स्वराज ...................?

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