सुशासन का दम भरने वालो अब तो शर्म करो

व्ही.एस.भुल्ले. कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था का इससे बड़ा नंगा नाच और क्या हो सकता है कि माननीय न्यायालय को उन कार्यो को देखने जांच कमेटी गठित कर हकीकत जानने भेजना पड़ रहा है जिन कार्य को समय से पूर्ण कराने की जबावदेही विधायिका कार्यपालिका व जबावदेह संस्थाओं की होती है, मगर शर्मसार होने के बजाये कत्र्तव्य विमुखता में मशगूल यह संस्थाये कुछ तो भी करके अपनी गलतियों को छिपाने में जुटी है।  


अपुष्ट सूत्रों की माने तो विगत वर्षो से कलफती जनता की सुनवाई सुशासन का ढंका पीटने वाली सरकार व उसके नौकरशाह, संस्थायें तो सुनने में असफल हो, कत्र्तव्य विमुख और अराजकता पर उतर आयी तब शहर के एक जाने माने  एडवोकेट विजय तिवारी को जनहित में प्रताडि़त जनता को राहत पहुंचाने उच्च न्यायालय जाना पढ़ा। 

मगर सरकार व सरकार के नौकरशाह, जबावदेह संस्थायें माननीय न्यायालय को भी गुमराह करने से नहीं चुकी तब पिटिसनर के अनुरोध पर माननीय न्यायालय को सरकार, नौकरशाह जि मेदार संस्था व जमीनी हकीकत जानने 4 सदस्यी कमेटी बना शिवपुरी शहर भेजना पढ़ रहा है। 
इससे बड़ी शर्म और अर्कमण्यता कत्र्तव्य, विमुखता की मिशाल इस म.प्र. में सरकार उसके नौकरशाह  जि मेदार संस्था नगर पालिका की कोई और दूसरी हो नहीं सकती। 

यह हाल म.प्र. के शिवपुरी जिले के उस जिला मु यालय शिवपुरी शहर का है जो अनियंत्रित सीवर प्रोजक्ट के चलते आजकल धूल का ढेर बन चुका है। विगत दो वर्षो से सीवर लाइन विछाने के नाम मनमाने ढंग से खुद रही शिवपुरी  शहर की सड़कों की अंधा धुंध खुदाई यहां रहने वाले लेागों को श्राफ बन गई। लेाग बैवस परेशान है और हो भी क्यों न, जब जबावदेह संस्थायें सरकार और उसके नौकरशाह अपनी अलाली अर्कमण्यता छिपाने माननीय न्यायालय तक को गुमराह करने से न चूक रहे हो ऐसे में में माननीय न्यायालय द्वारा जांच कमेटी का गठन कर शहर की सड़कों की स्थिति को दिखवाना लाजमी है। 

मगर यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी कि जांच समिति की रिपोर्ट क्या होगी और उस रिपोर्ट पर न्यायालय का रूख क्या होगा फिलहाल तो सरकार, नौकरशाह, नगरपालिका से तृष्ट, प्रताडि़त लेागों में चर्चा अवश्य है कि अब जरुर शहर वासियों को राहत और इस अराजकता के जि मेदार लेागों को अवश्य दण्ड मिलेगा तभी शिवपुरी शहर वासियों को जनहित में याचिका कत्र्ता के माध्यम से न्याय मिल सकेगा।  
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