कॉग्रेस: कमान सौंपने में कोताही क्यों?

विलेज टाइम्स, म.प्र. जनवरी 2016- राष्ट्रीय राजनीति में राहुल हो या म.प्र. में  ज्योतिरादित्य सिंधिया, मगर कॉग्रेस के लिये आज भी यह यक्ष प्रश्र सामने है कि कॉगे्रस की आखिर न जाने क्या मजबूरी, परेशानी है जो वह बड़े राज्यों में 2013 का विधानसभा तथा देश में बुरी तरह 2014 के लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद आज तक सही निर्णय ले, युवा तुर्को को कॉग्रेस की कमान सौंपने से कतरा रही है जबकि वर्तमान हालातों के मद्देनजर तथा कॉग्रेस के अन्दर ही मची खींचतान के बीच दिन व दिन कॉग्रेस रसातल को जा रही है। 



देखा जाये तो करारी हार के बावजूद भी कॉग्रेस की मजबूरी का क्रम आज भी अनवरत जारी है। जबकि हकीकत यह है कि भले ही गली मोहल्ले विधानसभा, लोकसभाओं के उपचुनवों में कॉग्रेस की जीत का क्रम व्यक्तिगत प्रयासो के चलते जारी हो, मगर अधि सं यक लेाग आज कॉग्रेस के घिसे पिटे, चेहरों को स्वीकारने तैयार नहीं, जो कि कॉग्रेस के साथ बड़ा अन्याय ही नहीं बड़ा विश्वास घात है। क्योंकि कॉग्रेस व्यक्ति विशेष न होकर एक विचार है जिसमें भारत की आत्मा बसती है। 
अगर म.प्र. में कोई युवा तुर्क ज्योतिरादित्य सिंधिया के रुप में कॉग्रेस को जगाने का प्रयास कर रहा है तो फिर बन्दिस कैसी, जबकि म.प्र. से लगे राजस्थान में कमान सचिन पायलेट व दिल्ली में अजय माकन के हाथ कभी की सौंपी जा चुकी है। फिर म.प्र. में निशकलंक ईमानदार कत्र्तव्य निष्ठ एक ऊर्जावान नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथ क्यों नहीं ?
चर्चाये होती है कभी कमलनाथ, तो व्यवहार में फिलहाल अरुण यादव के हाथ कमान है। अगर वाक्य में ही कॉग्रेस म.प्र. में कॉग्रेस का भला चाहती है तो फिलहाल युवा तुर्को में ज्योतिरादित्य सिंधिया से बड़ा नाम म.प्र. में कोई दूसरा नहीं, मगर दबे पांव कुछ लेाग म.प्र. में स्वयं के स्वार्थो के चलते, सुनियोजित तरीके से सत्ता में आने का सपना देख षडय़ंत्र में मशगूल है। तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल होगी। क्योंकि म.प्र. जागरुक हो चुका है। जिन लोगों को जनता विगत एक दशक से नकारती चली आ रही है शायद ही वह उन्हें 2018 में भी स्वीकार कर सके। इसलिये बेहतर है कि कॉग्रेस, दिल्ली, राजस्थान की तरह म.प्र. में भी कड़ा निर्णय ले और कमान ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे चमकदार नेतृत्च के हाथ सौंपे। अन्यथा अगर एक मर्तवा फिर से कॉग्रेस ने 2013 की भूल दोहराई तो म.प्र. में कॉग्रेस फिर से चारों खाने चित दिखाई पढ़ेगी और यह कॉग्रेस ही नहीं, कॉग्रेस विचार धारा के साथ एक बड़ा अन्याय होगा जिसका उत्तर भी आज नहीं तो कल अवश्य, उन कॉग्रेसियों को देना होगा जो देश और स्वयं के बेहतर भविष्य को लेकर विगत 10-12 वर्षो से संघर्ष करते चले आ रहे है।
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