70 करोड़ का होगा सत्यानाश, नहीं बन सकेगी गुणवत्ता पूर्ण सड़के

धमैन्द्र गुर्जर/म.प्र. शिवपुरी, विलेज टाइम्स 20 जनवरी 2015- म.प्र. के शिवपुरी जिले मु यमंत्री ग्राम स पर्क सड़क की शुरुआत यूं तो 2010 से हुई जिसमें प्रथमफेज और द्वितीय फेज की सड़कों के निर्माण पश्चात म.प्र. शासन द्वारा तृतीय फैज लिये 70 करोड़ की राशि आवंटित की जिससे 500 से कम आबादी वाले ग्रामो को मु य सड़कों से जोडऩे लगभग 124 सड़को का निर्माण ग्रेवल रोड के रुप में किया जाना है।


मगर दो संभाग के माध्यम से बनाई जाने वाली सड़कों की अधीक्षण यंत्री कार्यालय द्वारा आमंत्रित  निविदा में ठेकेदार द्वारा जिस तरह से लगभग 27 से 31 प्रतिशत कम दर पर सड़क निर्माण का ऑफर किया है उसे देखकर नहीं लगता कि अब जिले में 70 करोड़ की लागत से बनने वाली लगभग 124 सड़के गुणवत्ता पूर्ण बन पायेगी। अपुष्ट सूत्रों की माने तो निविदा प्रक्रिया में ठेकेदारों का चुनाव करते वक्त जहां प्राकृतिक, भौतिक पात्रता का पैमाना रखा गया। मगर पी.डब्लू डी.  या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क की तरह सड़क निर्माण की दरे कम आने की स्थति में निर्धारित शासकीय दर से कम होने पर अन्तर की राशि नगद  जमा कराये जाने का प्रावधान निविदा विज्ञाप्ति में नहीं रखा गया। 

4 लेयर में बनने वाली इन सड़कों के निर्माण प्राक्कलन में जहां अर्थ वर्क, सिलेक्टेड सॉयल, जी.स.वी. एवं ग्रेवल मटेरियल से सर्फेस निर्माण किया जाना है।  जिसमें सड़क की गुणवत्ता बनाये रखने कॉ पेक्शन वाटरिंग का विशेष जोर होगा। 

अब अगर ऐसे में ठेकेदारों द्वारा 27 से 31 प्रतिशत कम दरे दी है तो लगता नहीं कि पूर्व भांति इस मर्तवा भी गुणवत्ता पूर्ण सड़के बन पायेगी। कारण साफ है कि इन सड़कों के निर्माण हेतु  जो दर आयी है वह दर्शाती है कि या तो इन सड़कों में वे सड़के शामिल है। जिन्हें ग्राम पंचायत या विभिन्न मदो से पूर्व में तैयार किया गया है या फिर सड़कों का सत्यानाश सुनिश्चित है। सच जो भी हो लगता नहीं कि लोग ल बे समय तक इन सड़कों का लाभ उठा पाये। 

 सुशासन का दम भरने वालो अब तो शर्म करो,  सत्य जानने पहुंची कोर्ट द्वारा गठित जांच कमेटी 
व्ही.एस.भुल्ले/विलेज टाइम्स, म.प्र. शिवपुरी 19 जनवरी 2016- कत्र्तव्य विमुख व्यवस्था का इससे बड़ा नंगा नाच और क्या हो सकता है कि माननीय उच्च न्यायालय को उन कार्यो को देखने जांच कमेटी गठित कर हकीकत जानने भेजना पड़ा, जिन कार्य को समय से पूर्ण कराने की जबावदेही विधायिका कार्यपालिका व जबावदेह संस्थाओं की होती है, मगर शर्मसार होने के बजाये कत्र्तव्य विमुखता में मशगूल यह संस्थाये कुछ तो भी करके अपनी गलतियों को छिपाने में जुटी है।  
अपुष्ट सूत्रों की माने तो विगत वर्षो से कलफती जनता की सुनवाई सुशासन का ढंका पीटने वाली सरकार व उसके नौकरशाह, संस्थायें तो न कर सकी और अपनी अर्कमण्यता का परिचय देते हुये कत्र्तव्य विमुख हो, अराजकता पर उतर आयी तब शहर के एक जाने माने  एडवोकेट विजय तिवारी को जनहित में प्रताडि़त जनता को राहत पहुंचाने उच्च न्यायालय जाना पढ़ा। 
मगर सरकार व सरकार के नौकरशाह, जबावदेह संस्थायें माननीय न्यायालय को भी गुमराह करने से नहीं चुकी तब पिटिसनर के अनुरोध पर माननीय न्यायालय को जमीनी हकीकत जानने 4 सदस्यी कमेटी बना शिवपुरी शहर भेजना पढ़ा। 
इससे बड़ी शर्म की बात इस अर्कमण्यता कत्र्तव्य, विमुखता की म.प्र. में सरकार उसके नौकरशाह  जि मेदार संस्था नगर पालिका की और क्या हो सकती, जिसने एक मिशाल कायम कर दें। 
यह हाल म.प्र. के शिवपुरी जिले के उस जिला मु यालय शिवपुरी शहर का है जो अनियंत्रित सीवर प्रोजक्ट के चलते आजकल धूल का ढेर बन चुका है। विगत दो वर्षो से सीवर लाइन विछाने के नाम मनमाने ढंग से खुद रही शिवपुरी  शहर की सड़कों की अंधा धुंध खुदाई यहां रहने वाले लेागों को श्राफ बन गई। लेाग बैवस परेशान है और हो भी क्यों न, जब जबावदेह संस्थायें सरकार और उसके नौकरशाह अपनी अलाली अर्कमण्यता छिपाने माननीय न्यायालय तक को गुमराह करने से न चूक रहे हो ऐसे में में माननीय न्यायालय द्वारा जांच कमेटी का गठन कर शहर की सड़कों की स्थिति को दिखवाना लाजमी है। 
मगर यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगी कि जांच समिति की रिपोर्ट क्या होगी और उस रिपोर्ट पर न्यायालय का रूख क्या होगा फिलहाल तो सरकार, नौकरशाह, नगरपालिका से तृष्ट, प्रताडि़त लेागों में चर्चा अवश्य है कि अब जरुर शहर वासियों को राहत और इस अराजकता के जि मेदार लेागों को अवश्य दण्ड मिलेगा तभी शिवपुरी शहर वासियों को जनहित में याचिका कत्र्ता के माध्यम से न्याय मिल सकेगा।  
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment