राजधर्म की खातिर,अखिलेश के दो अहम निर्णय

व्ही.एस. भुल्ले 
विलेज टाइम्स , 3 दिस बर 2015- आरोप प्रत्यारोप आलोचनाओं से इतर उ.प्र. सरकार के मु यमंत्री अखिलेश यादव के दो अहम निर्णयों से साबित होता है कि सही समय पर लिये गये सटीक निर्णय दूरगामी ही नहीं सरकारों की निर्णायक शक्ति के भी परिचायक होते है। जो किसी भी सरकार की दिशा और दशा तय करने लेाकतंत्र में सहायक होते है।
अखिलेश यादव का पहला निर्णय पूर्ण रुपेण लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था रख अपने असूल सिद्धान्तों के लिये संघर्ष करने वाले बंशीधर से स बन्धित है। जिन्हें उ.प्र. सरकार में मंत्री बनाया गया है। यह निर्णय साफ करता है कि ईमानदारी से जीवन में किया गया संघर्ष लेाकतंत्र में कभी खाली नहीं जाता और उन्होंने बंशीधर बौद्ध को अपने मंत्री मण्डल में शामिल कर यह साबित कर दिया कि लेाकतंत्र में उनकी पहली पसन्द क्या है ?
दूसरा निर्णय अखिलेश यादव का उ.प्र. में 35000 सिपाही भर्ती का है जिसमें उनकी सरकार ने भर्ती नियमों का सरलीकरण ही नहीं पूरी पारदर्शिता के साथ गुणवत्ता का भी याल रखा है। 
आज जब सरकारों की नियत पर सवाल खड़े करना आम बात है। साथ ही प्रदेश में जब अराजकता का भाव हो ऐसे में नागरिको की सुरक्षा हेतु ऐतिहासिक निर्णय की घोषणा ही नहीं उसे अमल में लाना महत्वपूर्ण कार्य है। यह इस बात के स्पष्ट संकेत है कि उनकी निर्णायक क्षमता कितनी गजब है इसे लेकर भी आलोचक, आलोचना कर सकते है। मगर राजधर्म के पालन में अगर आलोचना होती है तो शासक को उस आलोचना को सहने सहर्ष तैयार रहना चाहिए और यहीं अच्छे शासक की लेाकतंत्र में अलग पहचान स्थापित करती है। 
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment