नई शिक्षा नीति में नैतिकता और राष्ट्रीयता का भाव जरुरी

वही.एस.भुल्ले . तरीका जो भी हो, मगर राजकीय पाठशाला तथा विषय वस्तु के अन्दर नैतिकता राष्ट्रीयता की भावना के बिना नई शिक्षा का प्रयास बैजान शरीर की भांति ही भविष्य में व्यवहार करेगा।
समग्र शिक्षा के लिये जरुरी है 15 वर्षीय स्थायी शिक्षा नीति तभी समग्र देश एक साथ उस शिक्षा को प्राप्त कर पायेगा जिसकी भारत जैसे महान देश को स त जरुरत है और यह तभी स भव है जब केन्द्र की सरकार देश की 2 लाख ग्राम पंचायत ही नहीं, देश के शहर के वार्डो में सहित बुद्धि जीवियों, सदन में चर्चा से पूर्व विषय वस्तु का एजेन्डा और क्रियान्वयन नीति पर बहस कराये। क्योंकि किसी भी राष्ट्र की शिक्षा नीति उस राष्ट्र की रीढ़ ही नहीं उस राष्ट्र के शरीर का समुचा नर्वस सिस्टम होता है। 

बेहतर हो देश की मानव  संसाधन विकास मंत्री जो एक जीवट श िसयत ही नहीं, निर्णय और क्रियान्वयन में सक्षम है। अगर उनके द्वारा नई शिक्षा नीति निर्माण के लिये किये जा रहे प्रयास भारत की नई शिक्षा नीति को मैकाले की छत्रछाया या उनके वंशजो की छत्रछाया से बचाने में सफल रही और मैकाले की तरह शिक्षा नीति निर्माण में अन्नय राष्ट्र भक्ति का परिचय दिया तो यह भारत जैसे महान देश के लिये उनका यह प्रयास ऐतिहासिक होगा आने वाली पीढ़ी फिर किसी मैकाले को कोसने के बजाये आपके द्वारा किये प्रयासो को सराहेगी। 

समय भले ही लगे मगर 67 वर्ष बाद ही सही एक ऐसी शिक्षा नीति देश के सामने हो, जिसमें नैतिकता, राष्ट्रीयता और राष्ट्र खुशहाली स भावना कूट-कूट कर भरी हो। और आने वाली पीढ़ी ही नहीं मौजूद पीढ़ी भी खुशहाल भारत की अनुभूति कर पायें। ऐसी नई शिक्षा नीति होना चाहिए।  
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