सेवा, सत्संग और संस्कार ही हमारा मंत्र है: अर्चना जी

विलेज टाइम्स। म.प्र. शिवपुरी। धैर्य पूर्ण, बैबाक शैली की धनी दुर्गावाहिनी की प्रान्त संयोजक अर्चना सिकरवार कहती है कि हिन्दु समाज के उत्थान हेतु मातृशक्ति का मूल है, सेवा सत्संग और संस्कार वहीं दुर्गा वाहिनी के लिये सेवा, सुरक्षा और संस्कार है। 


ज्ञात हो कि दुर्गा वाहिनी में जहां 15 से अधिक उम्र की हमारी बहिने हमारे कार्यक्रमों से जुड़ लाभान्वित होती है। वहीं मातृशक्ति में वह बहिन, माताये अपनी जवावदेही निभा समाज कल्याण हेतु लाभान्वित होती है।  मैं उल्लेख करना चाहूंगी कि अभी हाल ही में हमने हमारी मूल संस्था विश्व हिन्दु परिषद स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर स्वर्ण जयन्ती वर्ष के रुप में मनाया जाता है। जिसके तहत हमने प्रदेश भर में सतसंग शिविर लगा इसे वौद्धिक भव्यता प्रदान करते हुये हमारे हिन्दु समाज में मानव कल्याण हेतु प्रयास किया है। 

हमारा प्रयास है कि जहां हमारी मातृ शक्ति सेवा, सत्संग, संस्कार निर्माण में अहम भूमिका निभाये वहीं हमारी दुर्गा वाहिनी सेवा, सुरक्षा, संस्कार के मूल मंत्र को धारण कर हिन्दु समाज के उत्थान ही नहीं उसे शसक्त खुशहाल बनाने में भूमिका निभाये इसी परिपेक्ष्य में कल यहां हमारा कार्यक्रम था जहां हमारी बहिनो, माताओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया। 

उक्त बाते, दुर्गा बाहिनी की प्रांतीय संयोजक मातृ शक्ति अर्चना ने विश्व हिन्दु परिषद कार्यालय पर विलेज टाइ स से अनौनचारिक चर्चा के दौरान कही। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य हिन्दु समाज में उस जागरुकता का प्रवाह करना है, जिसके लिये वह जाना जाता है। 

क्योंकि सबसे पुराना इतिहास सनातन धर्म का ही है और इसकी रक्षा करना हर हिन्दु का धर्म होना चाहिए। 
हमारा प्रयास है कि इस तरह के जागरुकता शिविर राष्ट्र कल्याण, मानव कल्याण हेतु रुट लेवल पर भी लगे, जिससे जड़ीय स्तर पर सनातन धर्म के प्रति लेागों को जाग्रत किया जा सके। 

मुझे यकीन ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि जल्द ही हम प्रकृति ही नहीं, मानव कल्याण की इस जंग को एक बार फिर से सनातन धर्म की प्रतिबद्धता साबित करने में सफल होगेें। 

जिसके लिये हमें जररुत होगी जमीनी स्तर पर पहुंच बना, प्रकृति की रक्षा, मानव कल्याण और जागरुकता की। जिसके लिये हम प्रयास रत है। दुर्गा बाहिनी की प्रान्त संयोजिका अर्चना जी ने विश्व हिन्दु परिषद के सामाजिक समरसता कार्यक्रम के बारे में बताया कि समय की आवश्यकता है कि हिन्दु समाज की सभी जातियां एवे भारतीय भू-भाग पर उदित जैन सिख, जैन, बौद्ध कबीर आदि महापुरुषों के अनुयायीयों को हिन्दु होने पर गर्व कराने की आवश्यकता है। भारतीय दर्शन बसुधैव कुटु बकम पर आधारित है, इसमें कोई छोटा बड़ा कोई भेदभाव नहीं है। राष्ट्र सेवा सभी अपने कत्र्तव्यों का निर्वहन कर रहे है। कोई अध्यापन तो कोई सैनिक देश की रक्षा तो कोई राष्ट्र की ऊर्जा व्यवस्था को सुद्रण बनाने अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। तो कोई समाज सेवा कर राष्ट्र उत्थान में जुटा है। यह सभी कार्य मनुष्य अपनी योग्यता के आधार पर कर रहे है। इनके बीच बैमनस्यता फैला राष्ट्र को कमजेार करने की कोशिसे होती रही है। अब समय आ गया है। जब ऐसे कुतसिक प्रयासो का मुंह तोड़ जबाव दिया जाये, हिन्दु समाज एक है। जिनके भगवान राम आराध्य है, विश्व हिन्दु परिषद का उद्देश्य समुचे विश्व में जहां भी हिन्दु रहते है। उनकी रक्षा कल्याण हेतु क्रत संकल्पित हो कार्य करना है। 
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