बगैर स्वराज अस भव खुशहाली, तय करे, युवा तरुणाई- संयोजक स्वराज

जिस महानतम व्यवस्था की कल्पना हमारे महान नेताओं ने भारत महान में की निश्चित ही लेाकतंत्र के रुप में सर्वोत्तम व्यवस्था हमारे बीच मौजूद है। मगर कत्र्तव्य अधिकार की आधी में हमारा महान लोकतंत्र ऐसा स्वरुप धारण करेगा किसी ने सपने में भी न सोचा होगा क्योंकि हम बेहतर, निस्वार्थ क्रियान्वयन के आभाव में दिशा भटक गये, जिसे लेकर हमारे महान लेाकतंत्र में व्यवस्था चारो खाने चित पढ़ी है। आयदिन नित नये ढंग से सेवा, सुधार के कार्य भी अब न काफी साबित हो रहे है। जिसके चलते खुशहाली कोसो दूर नजर आती है। 

जिस तरह से शिक्षित आजाद यालों वाली युवा तरुणाई के राजनैतिक प्रवेश के स्वतंत्र रास्ते बन्द कर किसी न किसी दल के सांचे में ढाल उन्हें तैयार किया जा रहा है। उसके चलते या तो शिक्षित युवा तरुणाई राजनीति से विमुख हो स्वयं के उत्थान को सर्वोपरि मान स्वयं के विकास में जुट गई। या फिर शेष बची जमात या तो किसी न किसी दल की वैचारिक गुलाम हो उनके इशारों पर चलने पर मजबूर नजर आती है। 
मगर युवा तरुणाई के नाम राजनीति में जुटी गुन्डे मबालियों की फौज इतनी बढ़ गयी। कि देश के बड़े बड़े दल ऐसे लेागों को टिकिट दे, अपनी शान समझते है और जीत को सर्वोपरि जिसके चलते आज हमारे महान लोकतंत्र में स्वराज खतरे में पड़ गया है। कारण साफ है जब पढ़े लिखे सुलझे शरीफ लेाग राजनीति में नहीं होगें तो कौन स्वराज, कौन खुशहाली के लिये सदनों में आवाज उठायेगा जिस तरह से विगत 15-20 वर्षो से हमारे महान सदन लेाकतंत्र के मन्दिर राजनैतिक दल, नेताओं के अहम अंहकार के अखाड़े बन चले है। ऐसे में गांव, गरीब, देश की बात कौन करेगा। इसलिये जरुरी है कि स्वराज के लिये युवा तरुणाई सकारात्मक संघर्ष की शुरुआत हो और यह तभी स भव है जब देश की युवा तरुणाई स्वयं के बेहतर भविष्य के साथ देश की बेहतरी और उसके बेहतर भविष्य गढऩे की राजनीति में बढ़े पैमाने पर शुरुआत करे।

क्योंकि न तो अब बचपन, जवानी खुशहाल रही, न ही अब बुढ़ापा खुशहाल बचा, स्वराज की आश लगाये खुशहाली  के आभाव में आज न जाने हमारी कितनी पीढ़ी सफर कर चुकी है। तो कुछ पीढ़ी सफर के लिये करने तैयार है। मगर निदान अभी तक कोई नहीं दे सका। 

इसलिये कारण साफ है। जब तक शिक्षित युवा वर्ग देश व देश की सवां अरब आबादी की खुशहाली के लिये राजनैतिक लगाम नहीं स हालेगा तब लेाकतंत्र के महान मन्दिरों में इसी तरह हुडदंग चलता रहेगा। इसलिये देश के युवाओं को चाहिए कि वह परिणाम मूलक राजनीति की शुरुआत कर, उन सदनो  की ओर वैचारिक रुप से संघर्ष  की शुरुआत कर वहां पहुंचे, जहां सुरक्षित राष्ट्र और खुशहाल जीवन के लिये नीति कानून, नियम बनाये जाते है। तभी हम असली स्वराज के सपने को साकार करने में कामयाब होगें। जिसे कभी हमारे महान नेताओं ने अपनी कुर्बानी देते वक्त या अंग्रेजों की लाठी, गोली खाते वक्त देखा होगा। 
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