पद की गरिमा कायम रखने में, कामयाब हुये प्रधानमंत्री

व्ही.एस.भुल्ले .भारत के लिये स्व. पण्डित जवारलाल नेहरु, इन्दिरा जी के बाद नरेन्द्र मोदी शायद तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री है जिन्होंने पद की गरिमा और देश की जरुरतों का याल रखते हुये, देश का मान-स मान बढ़ाने में अहम भूमिका भारत के प्रधानमंत्री के रुप में स्थापित की है। देश के प्रधानमंत्री के रुप में जिस रिपोर्ट कार्ड को उन्होंने 2018 में देश के सामने रखने की बात उन्होंने अपने पार्टी अध्यक्ष, वरिष्ठ नेता व सांसदो से खचाखच भरे हाल में कही थी वह अब अब धीरे-धीरे अपने धुंधले स्वरुप से बाहर निकल स्पष्ट तस्वीर के रुप में आकार लेने जा रही है।
हालाकि सहिष्णुता, असहिष्णुता को लेकर छिड़ी जंग के बीच उनकी सरकार कई ऐसे मुद्दों को देश की सवा अरब जनता के सामने लाने में सफल रही, जिन पर चर्चा कभी एक अघोषित अपराध के रुप में देखी जाती थी। आज ऐसे कई विषय है जिन पर खुली चर्चा देश के चहुमुंखी विकास के लिये चल रही है और वह अति आवश्यक भी थी जो किसी  भी स प्रभू राष्ट्र की एकता अखण्डता और राष्ट्रीय हित में जरुरी है जिससे विश्व पटल पर भारत एक परिपक्व समझ और मजबूत, शक्तिशाली राष्ट्र के रुप में उभर सके। 
अगर यो कहे कि विगत डेढ़ वर्ष मेें भारत के प्रधानमंत्री ने विश्व मंच पर अपने दौरों के माध्यम से विश्व विरादरी को यह समझाने में वह सफल रहे कि भारत एक अहिंसक, सहष्णु और विकास उन्मुखी राष्ट्र है जिसका नारा अहिंसा परमोधर्म और बासुवदैव कटुकु पकम का है। अर्थात देश के प्रधानमंत्री का यह नारा कि सबका साथ, सबका विकास देश की सीमाओ तक ही सीमित नहीं अब वह समुचे ब्रां हाड के लिये गूंझ रहा है। 
और यह तेजी से उभरते भारत के लिये जरुरी भी है भले ही विपक्षी दल आलोचक उन्हें उनके विदेशी दौरो को लेकर भिन्न-भिन्न उपाधियों से नवाज उनकी राष्ट्र भक्ति पर सवाल खड़े करते हो। मगर उन्होंने एक राष्ट्र भक्त के रुप में यह साबित कर दिया कि वह देश को एक नई दिशा ही नहीं, विश्व विरादरी में भी भारत को एक नई ऊचाई और निर्णायक भूमिका मे ले जाना चाहते है। 
यह प्रधानमंत्री जी की विश्व विरादरी में सहिष्णुता और सक्रियता का ही परिणाम है कि उन्होंने अपने रणकौशल के माध्यम से आय दिने भारत को धमकाने वाले पड़ोसियों को आंखों में आंखे डाल यह समझा दिया कि सहिष्णुता इतना व्यापक शब्द है और वह भारत जैसे महान देश में ही स भव है कि जिसका स मान सर्वोपरि है। उन्होंने उसी अस्त्र से भारत के दुश्मन नं. वन राष्ट्र और उसके द्वारा सुरक्षित उन लेागों को बता दिया कि हिंसा हमारा धर्म नहीं, मगर जरुरत पढऩे पर मानवता की रक्षा के लिये की गई ङ्क्षहसा भी कोई अधर्म नहीं बगैर गोली, बारुद गवाये देश के दुश्मनों को उन्हीं की माद में सहिष्णुता के माध्यम से मात देना ऐसा कौशल भारत में ही स भव है जिसका प्रदर्शन देश के प्रधानमंत्री ने विश्व मान चित्र पर कर बता दिया कि भारतीय संस्कृति, संस्कार, स यता क्या है ?  देश की बढ़ती आबादी के मद्देनजर और उसके बेहतर पुर्नवास के लिये संसाधन, रोजगार की खातिर वह विश्व मान चित्र पर एक ऐसा विश्सनीय माहौल बनाने में कामयाब रहे, जिसकी जरुरत हर विकास शील देश को होती है। जिसके लिये उन्होंने एक ब्रान्ड ऐमवेस्डर की तरह कई देशों में आपसी समझ और संसाधनो के तालमेल की पृष्ठ भूमि तैयार की। मगर  अब देश को जरुरत है उन मौकों के लाभ उठा देश व विश्व के विकास शील, अविकस्ति विकसित देशों के साथ ताल मेल बैठाने की जिससे भारत ही नहीं अन्य देश भी मानव विकास कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ सके। जरुरत है आज की हम समस्त देश वासी प्रधानमंत्री जी द्वारा देश के लिये बनाये गये उस मार्ग पर एक राष्ट्र भक्त की तरह चलने की। क्योंकि सहमति असहमति तो किसी व्यवस्था के दो पहलू हो सकते है। और उन पर बाद विवाद भी किया जा सकता, मगर जरुरत हमें अपने बेहतर भविष्य गढऩे की है ऐसे में प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व वाली सरकार के मंत्रियों को भी चाहिए कि वे ऐसी विकास उन्मुख, रोजगार उन्मुख योजनायें बनाये व पूर्ण प्रमाणिकता के साथ उनका क्रियान्वयन सुनिश्चित करे, तभी हम एक हमारे प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विश्व के मार्गदर्शक, शक्तिशाली, खुशहाल राष्ट्र की कल्पना को साकार कर पायेगें। 
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