आओं तुम्हें सुनाते है कहानी एक प्रदेश की

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज
भैया- आओं तु हें सुनाते है कहानी एक प्रदेश की 1 सालो साल सरकार चले, माननीय तो माननीय मातहत भी जेब भरे, छापों में लाख नहीं करोड़ों के सामान मिले फिर चारु भाट हर रोज शान में कसीदे गढ़े ऐसे महान प्रदेश की आओं तु हें सुनाते है कहानी एक प्रदेश की।

भैये- भीषण गर्मी में तो बच लिया लगता कुआर की गर्मी में सरक लिया, तने कै  अर्र-बर्र बोले जा रहा है। कै थारे को मानहानि का डर नहीं सता रिया शै।
भैया- डरे हारी जूति मने भी छवि चमकाने वाली क पनी गांव गली की चिन्ता छोड़ चला रिया हूं और हाथों हाथ मुंह मांगी कीमत दल्लो को चुका माल बना रहा हूं।
ौये- तने तो बावला शै जरा मुंह पर लगाम लगा और चक्कर क्या है जरा विस्तार से बता।
भैया- हारे को भूपाल यात्रा के दौरान खबरचियों से ज्ञात हुआ कि छवि चमकाने का धन्धा जोर-शोर से चल रहा है। क पनियों के माध्यम से जबरदस्त खेल चल रहा है। क्योंकि जरा सी चाय पानी पर मुये चिन्दी पन्ने वाले चिल्लाते है हारे अरेरा कॉलोनी वाले साहब को मुंह भरकर सुनाते है। मशखरे ऐसे कि सोशल मीडिया पर पण्डित जी के बड़े-बड़े महान कारनामें सुनाते है। सो जनता की आवाज और शासन के सेतु बने इन्जीनियरों ने ऐसा जाल बिछाया कि सबसे मंहगा टेन्डर छवि चमकाऊ क पनी को टिकाया। दिल जले कहते है कि गत दिनों में बैचारे मुखिया की खासी किरकिरी हुई है। इसलिये छवि चमकाने वाली क पनी को छवि सुधारने की सुपारी मिली है।
भैये- मने समझ लिया थारे को भी हारे त्रिस्तरीय सरकार वालो की तरह थारे को भी भाई लोगों में हायर कर लिया है, तभी तो जन्म जात सरकार की छवि चमकाने की लीज लिये हारे श्रीमानों पर उगंलियाँ उठा रहा है फिर श्रीमान वाणगंगा वाले हो या फिर अरेरा वाले।
भैया- मेँ जाड़ू थारे जैसे चारु भाटो को जो जरा सी बखसीस के चलते आज भी शान में कसीदे सुनाते हो, मगर जनता के दुख दर्द पर मय अण्डी बच्चों के चुप हो जाते हो। कै थारे को मालूम कोणी गरीब जनता का पैसा किस तरह लुट रहा है और आम गरीब गांव गली में अकेला खड़ा डकारे मार रहा है। मने दुख है थारे जैसे लोगों को देख जिनका धन्धा अब ऐसा बन चुका है कि जहां दिखेगी भरी परात, वहीं नांचूगीं सारी रात, सो मने न बता हारे को तो बस अब क पनी बनानी है छवि चमकाने के धन्धे में ही सही अब तो हारे को भी दौलत कमानी है।
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