क्या बन्द होगा बीएसएनएल

विलेज टाईम्स, अक्टूबर 2015। मप्र में जो हालात संचार सुविधाओं को लेकर ग्वालियर-चम्बल में प्याप्त है उन्हें देखकर तो यहीं कहा जा सकता है कि कभी सोने के अण्डे देने वाला भारत का संचार विभाग ऐसी मुफलिसी से गुजरेगा कि चर्चा बलबती होने लगे कि क्या बन्द होने के कागार पर है। भारत संचार निगम लिमिटेड सूत्रों की माने तो ग्वालियर संभाग का एक शिवपुरी जिला जहां उसके 10 हजार लैंण्डलाइन उपभोक्ता थे आज संचार सेवा की चौपट व्यवस्था और प्रायवेट क पनियों के बढ़ते रसूख के चलते लगभग 3 साढ़े 3 हजार उपभोक्तता तक जा सिमटी है। ऐसे ही हालात मोबाईल और इन्टरनेट सेवा के है।


संदेह तो तब यकीन में बदलने लगता है जब बीएसएनएल के बड़े-बड़े अधिकारी फ्री के मोबाईल, टेलीफोन उठाने में तौहीन समझते है। बजाये उपभोक्ताओं की समस्या सुनने के बजाये हड़काने तक पर उतर आते है और कनेक्शन कटबाने तक की सलाह देने लगते है।

भाड़े के कर्मचारी और साम्रगी विहीन इस निगम का आलम यह है कि जहां दिल्ली में बैठ संचार मंत्री मोबाइल सेवा में सुधार की बात करते है तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र के टावर बन्द पढ़े रहते है।

नाम न छापने की शर्त पर कर्मचारी कहते है कि आज नहीं तो कल प्रायवेट क पनियों का राज होगा क्योंकि बड़े अधिकारी नहीं चाहते कि बीएसएनएल में सुधार हो तभी तो वह सामान नहीं देते और बगैर सामग्री काम चलाने की बात कहते है।
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