नहीं ली शासन ने किसान की सुध, ट्रेन से कटकर दी जान

विलेज टाईम्स, 22 अक्टूबर 2015। जनाक्रोश रैली के ठीक पूर्व ट्रेन से कटकर जान देने वाला पंचावली के किसान राजकुमार दागी भले ही अब इस दुनिया में न रहा हो, आत्महत्या के इस कदम ने शासन प्रशासन के सामने अवश्य कई सवाल रख छोड़े हो, जो आज तक उसके घर पहुंच उसके एक बेटे, 2 बेटी पत्नी और उसके पिता को ढांढस नहीं बंधा पाते।

फिलहॉल खबरों में ऐलान है कि  25 अक्टूबर से 27 अक्टूबर के बीच अपने उडऩ खटोले को किसी भी गांव में उतार प्रदेश के दुखित मुखिया फसल बरबादी और किसानों का हाल जान सकते है।

सो सकपाये जिला प्रशासन के आला अफसर गांव-गांव लेागों की आओं भगत में जुट चुके है जो जिला प्रशासन कुछ दिन पूर्व बर्बाद किसानों से अगिनत सवाल करते नहीं थकता था और 80 फीसदी किसानों के नुकसान को 20 फीसदी बता शासन में बाहवाही लूटने के चक्कर  में था। मगर स्वयं मंत्री के अवलोकन में 80 फीसदी बरबादी का खुलासा होने के बाद प्रशासन चकर घिन्नी है। उस पर से बर्बाद किसानों के बीच परेशान मु यमंत्री की आहट के चलते सरकार ने साफ कर दिया कि राहत का आधार सूखा घोषित करना नहीं अब इस राहत का आधार जो आफत बन सर पर खड़ी है। किसान का हुआ नुकसान होगा और आर.बी.सी. में जो प्रावधान होगा उसके अनुसार ही दिया जायेगा।

बहरहॉल जो भी हो मगर इस राहत और प्राकृतिक आफत के बीच जिस तरह से 3 किसानों ने आत्महत्या की है उससे यह साबित हो गया कि व्यवस्था किस स्तर पर कार्य करती है। बेहतर हो कि हर प्राकृतिक आपदा से आत्हत्यायें न हो ऐसी व्यवस्था की जाये और रेल से कटकर अब कोई न मरे, ऐसी संवदेनशीलता शासन में लाई जाये। तभी हैरान परेशान होगा सुशासन का सुख उठा पायेगें।
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