कर्तव्यों से इतर, कानून की आढ़ में कब तक चलेगा शोषण

विलेज टाईम्स, 16 अक्टूबर 2015- मप्र।  महाराष्ट्र में हालिया डांस बारों को लेकर आये सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर महाराष्ट्र सरकार फिलहॉल अपील में जा सकती है जैसी कि स भावना है। क्योंकि महाराष्ट्र के मु यमंत्री का यह व्यान कि वह फैसले की कॉपी का अध्यन पश्चात ही किसी फैसले पर पहुंचेगें कि सरकार को करना क्या है ?


कहते है संस्कृति किसी भी समाज की आत्मा होती है अगर किसी समाज से उसकी संस्कृति को अलग कर दिया जाये तो वह बेजान हो जाता है और फिर उस समाज में कुरुतियों का जन्म होता है जिस पर कानून भी न कॉफी साबित होते है ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र के इन डांस बारों से जुड़ा है, जो बन्द है।

इतिहास गवाह है कि किसी भी समाज में नृत्य, नाच, गाना, इत्यादि का प्रचलन विभिन्न रुपो में होता रहा है या फिर आज भी कई समाजों में यह प्रचलित है फिर चाहे वह पूर्व में राजे, रजबाड़ो, बादशाहों के दरबार रहे हो या फिर गांव, चौपलो पर होने वाले सांस्कृतिक नृत्य सभी मनोरंजन के माध्यम हुआ करते थे।

मगर जैसे ही भारतीय संस्कृति, कला, नृत्य के क्षेत्र में पाश्चात्य संस्कृति हावी हुई गांव चौपाल के ड्रामे, डांस, नृत्य ओझल होते गये अगर शेष भी रहे तो इस कला से जुड़े लेागों के लिये वह साधन नहीं बचे, जो उन्हें मु बई जैसी मायानगरी या अन्य स पन्न जगहों पर हासिल हुये और लेाग चाहे, अनचाहें मन से पाश्चात्य संस्कृति में लुटती माया के कायल हो गये जिन्हें उन धन लालचियों का भी सपोट रहा जो पैसा बनाने में पागल रहे तथा सरकारों का वह मूक समर्थन जिन्होंने ने कानून पालन कराने या समाज में फैलती इस गन्दगी से मुंह फेर लिया इस क्षेत्र में कूदे लेागों को तो न कोई कानूनी संरक्षण देने का प्रयास हुआ न ही उनके सटीक व्यवस्थापन का परिणाम कि डासंबार के रुप में एक बड़ी समस्या पैदा हुई और उसे एक कानून के माध्यम से सुलझाने का प्रयास हुआ जो असफल रहा।

अब जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने संरक्षरण और कानून के पालन की बात कहीं है कि जिससे अश्लीलता न हो तो इसमें गलत क्या ?
काश सरकार पहले ही अश्लीलता पर रोक लगा डांसरों को कानूनी संरक्षण देती और लायसन्स देते वक्त सही कानूनों का प्रावधान राती तो लाखों लेाग बेवजह प्रताडऩा और नृत्य कला बदनाम होने से बच जाती।
देखना होगा कि माहराष्ट्र सरकार क्या कदम उठाती है फिलहॉल तो माननीय सुप्रीम कोर्ट ने वह रोक हटा दी है जो महाराष्ट्र सरकार ने कानून बना डांसबारों पर लगाई थी।

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