सोनिया गांधी को शेरनी बता सिंधिया ने किया किसानों की खातिर, क्रान्ति का आगाज

विलेज टाईम्स, 17 अक्टूबर 2015- मप्र।  शिवपुरी अपने पूरे लावो लश्कर के साथ जनाक्रोश रैली को सम्बोधित करते हुये पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि आज हमारा अन्नदाता परेशान है आत्महत्यायें कर रहा है अशोकनगर, बदरवास, पोहरी की हालिया आत्म हत्यायें ही नहीं, बैहाल अन्नदाता समुचे प्रदेश में आत्म हत्यायें कर रहा है।

वहीं हमारे प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री का विदेशी दौरा हो रहा है। म.प्र. के मुख्यमंत्री यह कहते नहीं थकते कि म.प्र. एक मन्दिर है मैं पुजारी सेवक और इस प्रदेश की जनता मेरी भगवान है। 

आज प्रदेश का अन्नदाता परेशान है प्रकृति के हाथों 4 वर्ष से पिटता किसान बर्बादी के कागार पर है। मगर सरकार है कि वह आज भी राजनैतिक तौल-मोल कर तत्काल राहत देने के बजाये कागजी घोड़े दौड़ा रही है। यह अन्नदाताओं का अपमान है और इस अपमान को किसी भी स्थिति में बर्दास्त नही किया जायेगा। 

उन्होंने केन्द्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लेते हुये कहा कि यह तो अन्नदाताओं की मातृभूमि को कानून बना उघोगपतियोंं को सौपना चाहती थे। मगर हमारी नेता श्रीमती सोनिया गांधी, राहुल गांधी 200 सांसदों के साथ शेरनी की तरह खड़ी हो गयी और केन्द्र सरकार को भूमि अधिग्रहण बिल वापस लेना पड़ा। 

उन्होंने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह जी कृषि विकास पर 4.5 थी वह घट कर अब 1.1 रह गई। इसी प्रकार पैट्रोलियम पदार्थो की कीमत अन्तराष्ट्रीय बाजार 55 फीसदी कम होने के बावजूद पैट्रोल, डीजल की कीमत कम नहीं हुई। 

जिस रेत का मूल्य 5 हजार रुपये हुआ करता था आज 40,000 रुपया हो गया है जिस किसान को बिजली कनेक्शन फ्री मिलना चाहिए। उनसे कनेक्शन के नाम 16,000 तक बसूला जा रहा है। सही मायने में विकास किसान का नहीं भाजपा का हुआ है हमारा अन्नदाता गरीब तो भाजपा नेता माला माल हुआ है भाजपा की कार्यप्रणाली को देखकर लगता है कि भाजपा के शासन में रेत मिलेगी राशन में, इतना नहीं 30-32 रुपये से लेकर 60 रुपये किलो बिचने वाली दाल 230 रुपये किलो बिच रही है और गरीब किसान की आत्मा इन जमा खोरों को कोस रही है। 

अन्त में सिंधिया ने कहा कि मैं अन्नदाताओं की आत्महत्याओं से बहुत आहत हूं। और अपने अन्नदाताओं को उनका हक दिलाने इस पावन भूमि से क्रान्ति की घोषणा करता हूं जब तक किसानों को फ्री अस्थाई बिजली कनेक्शन, खाद, बीज और रिण माफ नहीं हो जाते तब तक चैन से नहीं बैठूगां। क्योंकि मैं उस दल का सिपाही हूं जिसके नेता स्व. लालबहादुर शास्त्री ने जय जवान, जय किसान का नारा दिया। स्व. इन्दिरा जी जिन्होंने हरित क्रान्ति स्व. राजीव जी ने श्वेत क्रान्ति का आगाज किया और श्रीमती सोनिया जी ने एन.डी.ए. सरकार के दौरान देश भर में लगभग तीन हजार से अधिक आत्महत्याओं से व्यथित हो, यूपीए सरकार में कारगार कृषि नीति, मनरेगा, जल ग्रहण मिशन, फूड सिक्योरिटी बिल का आगाज किया। इस मौके पर हजारों की भीड़ के साथ कई पूर्व और वर्तमान विधायक मंच पर उनके साथ मौजूद थे।
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