सूखा: कहीं, बैजुबानों की बददुआ तो नहीं...?

व्ही.एस.भुल्ले तीरंदाज 
भैया- मने तो पहले ही बोल्या भाया जीवन दायनी है ये इन्हें मत सताओं मगर मुओं को मुंह फाड़ कीमत कमाने की बीमारी जो हो चुकी है, सो दूध तो दूध और अधिक दूध की धारा निकले सो दूध निकालने सरेयाम टॉक्सीन का बेरहम इन्जेक्सन चल रहा था। दूध बन्द होने और बैचने पर मोटा मुनाफा कट रहा था सो भाया मने तो लागे इस मर्तवा स्वार्थी सुनार की हथोड़ी पर लोहार का हथोड़ा चला है और ऐसी बर्बादी देख अब तो गांव, गरीब भी रो पड़ा है।

भैया- अभी तो सूखा पढ़ा है देखता जा इस गांव, गरीब की धरती पर न जाने क्या-क्या और होने खड़ा है। कै थारे को मालूम कोणी, गौशालायें मिट गई, चरनोई की भूमि मिट गई, अब तो गांव, गरीब, बैजुबानो की भूमि पर खनन माफियाओं या गांव के बल शालियों का कब्जा है इसलिये बैजुबानों के आगे जीवन का संकट खड़ा है। मगर मने शिकायत उन बलशाली माफियाओं से कम मने तो सबसे बड़ी शिकायत उन धन लालची मूर्खो से है जिन्होंने अपनी ही पीढ़ी को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवन दायनी बनी उस पशुधन नस्ल कोई ही नष्ट कर दिया जो भारी विपदा और भीषण सूखें में संरक्षण प्रदान कर मानव को कोई नहीं गांव, गरीब को जिन्दा रखने का काम करती थी। मैं तो बोल्यू भैये यह अपराध ही नहीं जघन्य अपराध है इसलिये इन नाश पीटो पर सुनार की टुकटुकी की इस मर्तवा लोहार का हथोड़ा पड़ा है और नंगा भूखा बदबहास बर्बादी पर खुद के ही खेत में खड़ा है। बैसे भी कहावत है कि ऐसी हाय गरीब की कभी न खाली जाये मरी खाल की धोकनी से लोहा भस्म हो जाये। सो भैया मने भी दिन गिन रहा हूं और इस बर्बादी के बीच मां लक्ष्मी की पूजा का इन्तजार कर रहा हूं।
भैया- तो क्या दीपावली बाद इन  नफरमानियों को बैजुबानों से मिली बददुआं से मुक्ति मिल जायेगी जिसकी भरपाई सिर्फ और सिर्फ अब प्राश्चित है। क्योंकि पहले जब कभी सूखा होता था तब गांव गरीब अपने पशुधन पर ही निर्भर होता था जिसका दूध भोजन पानी की पूर्ति करता था और गोबर ईधन की व्यवस्था करता था मगर जब से धन लालचियों की सं या क्या बड़ी है  कि लक्ष्मी पूजन के पूर्व ही बर्बादी सामने खड़ी है। खरीफ तो निपटली अब तो रवी के भी लाले है अब चिल्लाते है फिरते है भाई लेाग कर्ज तले मरने वाले है।
भैये- लगता है तने कुछ ज्यादा ही इमोशनल हो रहा है और समय की नजाकत को नहीं समझ रहा। सुना है इस विपदा  की घड़ी मे हारी सरकारे हारे साथ खड़ी है। बसूली तो पहले ही रुक ली अब तो बीमा की लिस्टे चलने वाली है सो भाया किसानी को फायदे का धन्धा बनाने वाली सरकार की तिजोरी खुलने वाली है, सुनते है हम गांव, गरीब की दशा सुधारने हारे प्रदेश में करोड़ों की धन राशि लक्ष्मी पूजन से पूर्व ही बटेगी और हारी दिवाली भी बड़ी धूम-धाम से बनेगी।
भैये- फिर अब जमाना थारे जैसे तकिया नूसी वालो का नहीं, अब तो जमाना डिजीटल इण्डिया का चल रहा है। 2 जी, 3 जी छोड़ अब तो फोकट में 4 जी मिल रहा है क्योंकि अब हारे देश का 35 फीसद युवा एन्डोरॉयट पर गेम खेल रहा है और दिन भर सॉशल मीडिया पर 1-2, 1-2 कर रहा है।
भैया- मने जानू इसलिये तो मने अपने आपको कोस रहा हूं सजा जो भी हारे जैसे गांव, गरीब को मिले फिलहॉल तो अपनो के बीच बेजुबानों की बददुआं झेल रहा हूं, मगर भाया हारे को चिन्ता हारी कम उन नौजबानों की है जिनके सहारे हम गांव, गरीब की जिन्दगी कट सुनहरे भविष्य की कहानी गढऩे वाली है, गर बस चला तो इसी लक्ष्मी पूजन पर गौधूल चरण छू पूज आऊंगा और जीवन दायनी के साथ हुये अन्याय के लिये मने भी माफी मांग, मानव होने का धर्म निभाऊंगा।
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