जीवन दायनी को जीवन के लाले

विलेज टाईम्स, 8 अक्टूबर 2015। म.प्र. ग्वालियर अब इसे दूध, दही, औषधि, ईधन देने वाली जीवन दायनी गाय का दुर्भाग्य कहे या फिर हम भारत वासियों का दुर्भाग्य जो कहीं तो लोग असली पौष्टिक दूध-दही को तरस रहे है या फिर ईधन के लिये जंगल साफ और गैस पर मिलने वाली सब्सिटी के लिये दर-दर भटक रहे है। हालात ये है कि कहीं ब्लैक में सिलेन्डर तो कई कहीं नकली दूध, दही, पनीर, मावा, मिठाईयाँ खरीद रहे। वहीं पशु पालक भी बढ़ती दूध की मांग के चलते उत्पादन बढ़ाने टॉक्सीन जैसे घातक इन्जेक्शनों का बेजुबान पशुओं पर इस्तमाल कर रहे है और देश की नस्ल की नस्ल को बरबाद कर रहे है। धन लालच ऐसा कि दूध देना बन्द करने पर चन्द रुपयों की खातिर उनकी जिन्दगिंयों तक का सौदा कर रहे है जिसके चलते आय दिन फसाद होना आम बात हो गयी है। शहर ही क्या गांवों में भी जीवन दायनी अब अनुउपयोगी साबित हो रही है। 


कारण साफ है कि हमने संकट मौचक जीवन दायनी का ही जीवन चन्द रुपये के लालच में संकट में डाल दिया है। पहले शहरों में कांजी हाउस और गांवों में पशुधन को चरने चरनोई की जमीन हुआ करती थी मगर धन लालचियों ने अपनी नस्ल सुधारने इस पशुधन की नस्ल का जीवन संकट में डाल दिया। 

परिणाम कि आज पशुधन सलाटर हाउसों की मांग बन गया है और फसाद का गहरा बीज आज देश में बोया जा रहा है। नहीं तो पौष्टिक आहार के रुप में दूध, दही, मिठाई, मावा, पनीर परोसने वाला यह पशुधन अनुपयोगी कैसे हो गया स्थानीय ईधन खाद औषधि का शसक्त माध्यम बैकार कैसे हो गया। जबकि बरबाद होती नस्ल को बचाने पौष्टिक आहार ईधन, खाद, औषधि की देश ही नहीं विश्व में जबरदस्त मांग है और इस मांग पूर्ति का पूरा माहौल हमारे देश में मौजूद है उसके बावजूद भी जिसकी पूर्ति करने में अच्छे से अच्छी सरकारों को पसीने आ रहे है और देश के गरीब पौष्टिक आहार, खाद, औषधि ईधन के आभाव में बढ़ती बीमारियों के बिल तक नहीं चुका पा रहे है। ऐसे में प्रकृति असन्तुलन से जूझता इन्सान आज भी नहीं चेता तो वो दिन दूर नहीं जब दूध, दही, मक्खन वाली नस्ल, पीजा, बर्गर और मेगी में सिमट बैकार हो जायेगी और बरबाद होती हमारी नस्ल को बचाने कोई तजबीज काम नहीं आयेगी, बेहतर हो कि सरकारे और समाज आवारा पशुओं के लिये अ यारण नीति बना संरक्षण देने का काम करे और देश की नस्ल सहित समृद्धि का मार्ग प्रस्त करे। तभी हम एक समृद्ध, खुशहाल, राष्ट्र बन पायेगें।  

किसानों को फसल बीमा की राशि का शीघ्र भुगतान करें
शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन हो
भोपाल 7 १२-अक्तूबर-२०१५ राजस्व एवं पुनर्वास मंत्री श्री रामपाल सिंह ने आज संभाग के विदिशा, सीहोर और रायसेन जिलों में चल रहीं विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक ली। बैठक में संभागायुक्त श्री एस.बी.सिंह के साथ कलेक्टर्स उपस्थित थे। बैठक में वन अधिकार अधिनियम २००६ के अंतर्गत वन अधिकार पत्र के जिला स्तर, उपखण्ड स्तर एवं ग्रामसभा स्तर पर लंबित आवेदन पत्रों पर चर्चा की गई। बैठक में श्री रामपाल सिंह ने कहा कि बड़ी संख्या में वन अधिकार पटटे निरस्त हो गये हैं। ऐसे प्रकरणों में ग्रामसभा के माध्यम से आये आवेदनों पर नियमानुसार पुनर्विचार किया जाये। यदि लोग पात्रता की परिधि में आते हैं तो इन्हें पट्टा देने की कार्रवाई की जाये। मंत्री श्री रामपाल सिंह ने कहा कि जल संसाधन विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा बनवाए गए स्टाप डेम वैराज से कितने रकबा में सिंचाई हो रही है तथा कौन कौन से स्टाप डेम वैराज क्षतिग्रस्त हो गए हैं उनका सुधार किया जाये। अविद्युतीकृत ग्राम, मजरा, टोला के विद्युतीकरण में किन-किन में वन व्यवधान है उनमें वन विभाग से अनुमति ली जाये। श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में पात्रता उपरांत टूटे गए ग्राम को जोड़ा जाये। सड़कों का निर्माण समय सीमा में और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। पात्रता अनुसार कोई भी ग्राम छूटे नहीं इसका प्रयास किया जाये। जिन मजरे टोलों की आबादी ५०० से अधिक है उनकी परीक्षण कर राजस्व ग्राम घोषित करने की कार्रवाई करें। राजस्व मंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को फसल बीमा की राशि का शीघ्र भुगतान हो जो राशि किसानों के खाते में बैंक द्वारा नहीं पहुंचाई गई है उसे शीघ्र भिजवाएं। फसल की क्षति का सही आंकलन कर किसानों को लाभांवित करने के ठोस प्रयास किए जा रहे हैं इसमें गति लाएं।
   
ठेकेदारों, किसानों और फैक्ट्रियों के मजदूरों का खुले में शौच होगा दण्डनीय
सीहोर 7 १२-अक्तूबर-२०१५ कलेक्टर डॉ सुदाम खाडे ने ठेकेदारों, किसानों अथवा फैक्ट्री संचालकों द्वारा बाहर से लाकर काम पर लगाये गये मजदूरों के लिये शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है। जिले में अस्थाई तौर पर बाहर से आये मजदूरों को शौचालय की व्यवस्था ना होने पर वे आस-पास के क्षेत्र में खुले में शौच करते है, जिससे स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत चलाये जा रहे खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायत बनाने के प्रयासों में अवरोध उत्पन्न होता है। इसको देखते हुए डॉ. खाडे ने जिले के समस्त ठेकेदारों, किसानो अथवा फैक्ट्री संचालकों को आदेशित किया है कि मजदूरों के लिये शौचालय की व्यवस्था अनिवार्यतः करें। साथ ही मजदूरों द्वारा खुले में शौच को रोकने के लिये समस्त अनुविभागीय दण्डाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, तहसीलदार, थाना प्रभारी को निगरानी करते हुऐ दण्डात्मक कार्यवाही संचालित किये जाने के आदेश दिये है।

 प्रतिमाह ३० शौचालय निर्माण नही तो होगी कार्यवाही - भारत शासन द्वारा संचालित स्वच्छ भारत अभियान को जिले में शतप्रतिशत लागू कर स्वच्छ सीहोर बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ सुदाम खाडे ने प्रत्येक ग्राम पंचायत को माह में न्यूनतम ३० शौचालय बनाकर एम आई एस करने के सख्त निर्देश दिये है। अब प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिदिन एक शौचालय का निर्माण अनिवार्यतः करना होगा, ऐसा ना होने पर सरपंच एवं सचिव के विरूद्घ धारा ४० एवं सचिवीय घोषणा समाप्त करने की कार्यवाही की जावेगी।
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