3 दिन, गांव गरीब के बीच रहेगी सरकार, मदद को मोहताज किसान

व्ही.एस.भुल्ले। विलेज टाईम्स, 23 अक्टूबर 2015। म.प्र. भोपाल म.प्र. में बड़े पैमाने पर हुई फसल बर्बादी को देखते हुये, बर्बाद किसानों को ढांढस बधाने, किसी सरकार ने कभी शायद ही ऐसा ऐतिहासिक निर्णय लिया हो, जो गत दिनों म.प्र. सरकार ने लिया। जिसके तहत यूं कहे कि समुची सरकार गांव, गरीब के बीच 3 दिन रहेगी। मगर सूबे के सूबा या कप्तान की उपस्थिति इस मौके पर सरकार द्वारा निर्धारित 2-2 ब्लॉको के मुखियाओं के साथ नहीं होगी।

लगता है सरकार के मुखिया जमीनी स्तर पर गांव, गरीब का हाले दिल जानना चाहते है।
मगर जिस तरह की उपेक्षा पंच परमेश्चरों की सरकार के इस निर्णय में हुई है वह भी ऐतिहासिक है क्योंकि हमारें संविधान में केन्द्र राज्य सहित गांव की सरकार की व्यवस्था की गई। फिलहॉल जहां केन्द्र की सरकार अभी तक बर्बाद हुई गांव गरीब की फसल पर संज्ञान लेने में असफल रही, वहीं राज्य सरकार ने गांव गरीबों की सरकार को इकनोर कर स्वयं मोर्चा स हालने का निर्णय लिया है। जिसके चलते हर 2 ब्लॉक के बीच, मय चीफ सेक्ट्री, डी.जी. सहित आई.ए.एस., आई.पी.एस. सहित आई.एफ.एस अधिकारियों की पूरी फौज तैनात की है। अब परिणाम क्या होगें ये तो सरकार ही जाने, मगर इतना तो तय है कि मदद के मोहताज किसानों का भविष्य क्या होगा ?
फिलहॉल भविष्य के गर्भ में है जिससे यह तय सुनिश्चित है कि सरकार के मुखिया की मंशा क्या है?
क्या वाक्य में ही सरकार के पास आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे किसानों को रोकने का कोई प्रोग्राम है या फिर योजना। मगर जिस तरह की तैयारी सरकार ने रख छोड़ी है उसके चलते कुछ उ मीद ही शेष रह जाती है।
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