बन्धक बनी लोकशाही...?

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज 
भैया- काठी टूटे उन नौकरशाहों की जिनके परिपत्रों की श्रखंला ने हम पंच परमेश्वरों के अधिकारों की ऐसी मिट्टी कूटी है कि भाया अब अध्यक्षी, सदस्यी पंच सरपंची न तो निगलते बन रही न ही उगलते, सुनते है भाई के शहर भूपाल के दशहरा मैदान में बगैर भाई के निमंत्रण पत्र मिले ही पंच परमेश्चरों की हाट लगने वाली है और 2 अक्टूबर को पंच, सरपंचों की महापंचायत होने वाली है। जहां प्रदेश भर के गाड़ी भरे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष पंच सरपंचों की भीड़ इक_ी होने वाली है, बैचारे पंच परमेश्वरों  का दर्द सिर्फ इतना है। मेहनत गयी पैसा गया, अब तो इज्जत के लाले है। इसीलिये 2 अक्टूबर गांधी जयन्ती के दिन ग्राम स्वराज के लिये भूपाल में जबरदस्त प्रदर्शन करने वाले है। 

भाया क्या इस जंगी प्रदर्शन से हमारे छीने गये अधिकार मिल जायेगें या बैचारे हम पंच परमेश्वर अगले 5 वर्ष तक ग्राम स्वराज के नाम यूं ही धक्के खा नौकरशाहों के आगे गिड़गिड़ायेंगें। 
भैये- कै थारे को मालूम कोणी केन्द्र व राज्य में कैडर वालो की सरकार है। सो हर कार्य कैडर के आधार पर ही होगा छाती कूटने चीखने चिल्लाने से कुछ नहीं होगा। बेहतर हो नौकरशाहों को छोड़ कैडर वालो को पण्डित जी दर्शन बता। एकात्य मानवता का अध्याय पढ़ा तब तो चल जायेगी बरना थारे जैसे ग्राम स्वराज वालो की जमात यूं ही धक्के खा नौकरशाही के आगे यूं ही गिड़गिड़ायेगी। 
भैया- तो मने आखिर कै करुं और हारे हाथों से गये हाथों हाथ हारे अधिकारों को कैसे हासिल करुं, भाया एक जमाना था मने आगे आगे तो हारा सेकट्री पीछे पीछे चलता था। मगर भाया हारे महान नौकरशाहों ने तो हारा पासा ही पलट दिया परिणाम कि अब आगे-आगे सचिव तो पीछे-पीछे वस्ता ले मने चलना पढता है। घोटाला सचिव करे जेल हारे को जाना पढ़ता है, घूमते-घूमते अब तो हारी जूती भी घिस ली है, आखिर कै करुं।  
भैये- अभी तो जूती घिसी है गर यहीं हाल रहा तो, बची खुची इज्जत भी घिस जायेगी अधिकार तो दूर की कोणी, आने वाले समय में लगता है छदम भी हाथ नहीं लग पायेगी। 
भैया- मने समझ लिया थारा इसारा मगर तने भी कान खोल कर सुने ले, गर 2 अक्टूबर को हारी मांग न मानी तो हम पंच परमेश्वरों की हाय भी खाली नहीं जायेगी और आज नहीं कल कैडर वाले की सरकार भी हमारी तरह ही बिलखती और छाती कूटती नजर आयेगी इन नौकरशाहों की कारगुजारियों के चलते।
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