अब खुले में नही करेंगे शौच लोगों ने लिया संकल्प

डिंडोरी। 19-सितम्बर-2015 स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत जनपद पंचायत शहपुरा की ग्राम पंचायत- टिकरासरई बांसा को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया है। अब ग्राम पंचायत-टिकरासरई बांसा की पहचान एक साफ-सुथरे गॉव के रूप में होने लगी है। इस उपलब्धि पर ग्राम पंचायत-टिकरासरई बासा में गौरव यात्रा निकाली गई।
इस गौरव यात्रा में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कर्मवीर शर्मा सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों के साथ शामिल हुए। जिपं सीईओ श्री शर्मा ने गौरव यात्रा के दौरान मार्ग पर स्थित मकानों में नव निर्मित शौचालयों का निरीक्षण किया भी किया। ग्राम-पंचायत में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत 267 परिवारों के लिए शौचालयों का निर्माण कराया गया है। इन नवनिर्मित शौचालयों का नियमित रूप से उपयोग करके लोगो ने गाव मे स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश दिया है और खुले में शौच नही करने की शपथ भी ली है।

खुले में शौच सामाजिक बुराई है
जिपं सीईओ श्री शर्मा ने ग्राम पंचायत -टिकरासरई बासा में खुले में शौच से मुक्ति की घोशणा के लिए आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि सभी लोग नवनिर्मित शौचालयों का नियमित रूप से उपयोग करें और कोई भी व्यक्ति खुले में शौच करने न जावे। इससे गॉव की पहचान एक साफ-सुथरे गॉव के रूप में होगी। खुले में शौच करना एक अभिशाप है और हमें अपने गॉव एवं समाज से इस अभिशाप को मिटाना होगा। जिपं सीईओ श्री शर्मा ने लोगों को खुले में शौच करने के दुष्परिणाम बताते हुए कहा कि खुले में शौच करने से गंभीर बीमारियॉ फैलती है। इससे हम बीमार हो जाते है और हमे शारीरिक एवं आर्थिक क्षति होती है, लेकिन हम शौचालयो का उपयोग करके इन गंभीर बीमारियों से बच सकते है। जिपं सीईओ श्री शर्मा ने लोगो से अपील की गॉव में शौचालयों का नियमित रूप से उपयोग करे, गांव को साफ एवं स्वच्छ बातावरण में रखें, इससे हमारी समाज की मर्यादायो का भी सम्मान होता है। खुले में शौच करना एक सामाजिक बुराई है और हमें इस सामाजिक बुराई को समाप्त करना होगा, इस बुराई को मिटाने में सबकी भागीदारी जरूरी है।

नर्मदा नदी तटीय 60 पंचायते प्राथमिकता:-
जिलें में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नर्मदा नदी के तटीय पंचायतो को चयनित कर उन्हे खुले मे शौच से मुक्त ग्राम-पंचायत बनाया जा रहा है। जिले में ऐसे 60 ग्राम-पंचायतो को चयन कर लिया गया है और इन ग्राम-पंचायतों में सक्रियता से कार्य प्रारम्भ किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत नर्मदा नदी के तटीय गॉवों में शुद्वता बनी रहेगी इन ग्राम-पंचायतो की सूची तैयार की जा चुकी है। जिले में नर्मदा नदी के तटीय ग्राम-पंचायते खुले में शौच से मुक्त होने पर यह जिले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। इन ग्राम-पंचायतों में शौचालय निर्माण कार्यों को पूर्ण करने के लिए नोडल अधिकारियों को लगातार मॉनीटरिंग करनी होगी। सभी हितग्राहियों की भी जिम्मेेदारी होगी कि वे भी अपने-अपने घरो में बन रहे शौचालयों का निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्वक पूरा करावे।

किसान स्प्रिंकलर, रेनगन से सिंचाई करें
अनुपपुर। 19-सितम्बर-2015 किसान कल्याण तथा कृषि विकास के उप संचालक श्री आर.एस.शर्मा ने किसानों से अपील की है कि वर्षा अन्तराल एवं विगत दिनों हुई खण्ड वर्षा को देखते हुए उपलब्ध सिंचाई जल का उपयोग करते हुए फसलों में आवश्यकतानुसार सिंचाई देवें। रात्रि में पड़ने वाली ओस फसलों के लिए जीवनदायी नमी साबित हो रही है। एक-दो प्रतिशत पोटेशियम सल्फेट के घोल का फसलों पर 500 लीटर घोल प्रति हैक्टेयर के मान से छिड़काव करें जिससे  फसलों की नमीरोधक क्षमता का विकास होगा।

उन्होंने बताया कि रवि मौसम में किसान कम पानी वाली फसलें जैसे सरसों, अलसी, चना एवं पानी वाली गेहूं की प्रजाति सुनिश्चित सिंचाई वाले क्षेत्रों में लेने हेतु नियोजन करें, बोंयें ।साथ ही भूमि में उपलब्ध संरक्षित नमी का जीरो ट्रिलेज सीड ड्रिल से बुबाई कर फसल अंकुरण के लिए उपयोग करें।

कम पानी वाली गेहूं में जी.डब्ल्यू 273, एच.डब्ल्यू 2004, सुजाता, जी.डब्ल्यू 366, सी 306, जे.डब्ल्यू 3211 का बोनी हेतु उपयोग कर सकते हैं। चने की बोनी के लिए जे.जी. 130, जे.जी. 63, जबकि 9218, जे.जी. 16, जे.जी.11 आदि प्रजातियां उपयुक्त हैं। इसी प्रकार सरसों के लिए पूसा बोल्ड, वरूणा, आरबीएम-2 आदि प्रजातियां उपयुक्त है। अलसी की बोनी के लिए जे.एल.एस 27 एवं जे.एल.एस. 1 तथा जे.एल.एस. 9 आदि प्रजातियां इस क्षेत्र के लिए उपयुक्त हैं। गेहूं की बुबाई हेतु खेत की अंतिम जुताई के साथ आधार रूप में दिए जाने वाले उर्वरकों को मिलाने के पश्चात गेहूं की शुष्क बोबाई कर देवें और हल्की सिंचाई देवें। इससे पलेवा में दिये जाने वाले सिंचाई जल को बचाते हुए एक सिंचाई जल की सुनिश्चित की जा सकती है। यह अनुशंसा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय गेहूं प्रजनक केन्द्र इन्दौर द्वारा गहन अनुसंधानों के बाद की गयी है। जिसके प्राप्त होने पर डबल लाक केन्द्रों में भण्डारण कराया जाएगा। किसान वहॉ से बीज प्राप्त कर सकते हैं एवं बीज वितरण अनुदान प्राप्त करने हेतु अपना बैंक खाता नम्बर बीज लेते समय डबल लाक केन्द्र पर दर्ज कराएं जिससे बीज वितरण अनुदान सीधे उनके बैंक खाते में भुगतान किया जा सके।

पोटास फसलों में कीड़ों एवं व्याधियों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है ,साथ ही दाने को बोल्ड (स्वस्थ्य) एवं चमकदार बनाता है जिससे फसल की गुणवत्ता में वृद्धि होती है एवं मण्डी में मूल्य अच्छा प्राप्त होता है। फसलों में संतुलित उर्वरक उपयोग करते हुए पोटास की अनुशंसित मात्रा का पूर्णतः उपयोग करें साथ ही दलहनी एवं तिलहनी फसलों में बोबाई से पूर्व सल्फर की अनुशंसित मात्रा का उपयोग करें, जिससे तिलहनी फसलों में तेल की मात्रा एवं दलहनी फसलों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ सके एवं प्रति हैक्टेयर प्रजातिवार अनुशंसित उत्पादन प्राप्त हो सके।

सरकार दिलायेगी इंजीनियरिंग व मेडीकल कॉलेज में प्रवेश के लिये कोचिंग
ग्वालियर। 19-सितम्बर-2015 सरकार द्वारा जिले में संचालित दो प्रावीण्य उन्नयन छात्रावास के बालक-बालिकाओं को इंजीनियरिंग एवं मेडीकल कॉलेज में प्रवेश के लिये कोचिंग दिलाई जायेगी। कोचिंग में पढ़ाई के लिये प्रति छात्र-छात्रा 10 हजार रूपए शुल्क निर्धारित की गई है।
नौवीं कक्षा से बारहवीं कक्षा तक के 50-50 छात्र-छात्राओं को कोचिंग दिलाई जानी है। इस सिलसिले में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास द्वारा कोचिंग संस्थानों से दरें एवं सुविधाओं का विवरण मांगा है। विदित हो सहायक आयुक्त आदिवासी विकास का कार्यालय शारदा विहार कॉलोनी सिटी सेंटर में स्थित है।

आदिवासी शिक्षा, रोजगार एवं विकास सम्मेलन बाजना में कलेक्टर ने आज तैयारियों का जायजा लिया
रतलाम। 19-सितम्बर-2015 कलेक्टर श्री बी.चन्द्रशेखर ने आज आगामी सप्ताह में बाजना में आयोजित होने वाले आदिवासी शिक्षा, रोजगार एवं विकास सम्मेलन की तैयारियों का जायजा लिया। सम्मेलन में प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराजसिंह चौहान के शामिल होने की सम्भावनाओं को देखते हुए पुख्ता इंतजाम किये जाने के निर्देश दिये। कलेक्टर के साथ क्षेत्रीय विधायक श्रीमती संगीता चारेल एवं पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश शर्मा एवं उनके साथ जिले का प्रशासनिक अमला भी मौजूद था। कलेक्टर ने बाजना में कार्यक्रम स्थल, हेलीपेट एवं वाहन पार्किंग स्थलों का जायजा लिया।

कलेक्टर ने बाजना में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के मैदान का जायजा लेकर कार्यक्रम संबंधी आवश्यक तैयारियों को पुख्ता करने के निर्देश दिये। उन्होनें बताया कि आगामी सप्ताह में बाजना क्षेत्र में माननीय मुख्यमंत्री का भ्रमण सम्भावित है। माननीय मुख्यमंत्री बाजना में आयोजित आदिवासी शिक्षा, रोजगार एवं विकास सम्मेलन में सम्मिलित होगें। मुख्यमंत्री श्री चौहान के सम्भावित आगमन कार्यक्रम को देखते हुए हेलीपेट स्थल के लिये भी आवश्यक तैयारियों के संबंध में निर्देश दिये गये। कार्यक्रम में आने वाले विभिन्न हितग्राहियों एवं आम जनता व अन्य आगंतुकों के वाहनों की पार्किंग के लिये विभिन्न स्थानों का अवलोकन किया गया।
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