अघोषित साम्राज्य में तब्दील होता लेाकतंत्र

व्ही.एस.भुल्ले। विलेज टाइम्स, अगस्त 2015। निश्चित ही यह चिन्ता कुछ लेागों की नहीं समझ रखने वाले लाखों करोड़ों की भी है, जब सरकारे सत्ता को सर्वोपरि मान, सतत सत्ता में बने रहने अपनी नीतियां बना, सर्व कल्याण छोड़ जनसेवा के नाम संगठित हो स्वयं कल्याण पर उतर आये तो ऐसे में लेाकतंत्र की दुहाई दे सत्ता में बने रहना इन्सानियत के नाम खुलेयाम बैमानी है। 


आज संदेह गांधी के गरीब व पण्डित जी के अन्तिम व्यक्तियों के कल्याण हेतु सरकारी नीतियों पर कम सरकारो की नियत पर ज्यादा है। जहां क्या आम, खास सभी सत्तसीनो के गुरुर और शासन की गुस्ताखियों के चलते कलफ रहे है। मगर अपनी ही सरकार व व्यवस्था के बीच लेाग बैहाल भटक रहे है। अगर उनके पास कोई सहारा है तो वह है मात्र मीडिया से उन्हें आज की व्यवस्था में बचाता था। मगर वहां भी लेाग मरघट, शमशान में जिन्दा लोगों को ढूंढ़ रहे है।

बहरहॉल बात सत्ता, संगठन व्यवस्था तक होती तो चल जाती मगर बात तो अब साम्राज्य स्थापित करने तक आ पहुंची है। जिसमें क्या गांधी के सपने क्या पण्डित जी का दर्शन सभी सफर कर रहे है। मगर उनके चैले, छर्रे उनके नाम सत्ता के नशे में चूर जनसेवा के नाम मजे कर रहे है। हालात ये है कि जनसेवा के नाम न तो गांधी, पण्डित जी के सपने, दर्शन को नैसर्गिक सुविधा, स्वयं का रोजगार, सड़क, पानी है।

न ही वह शिक्षा, सुरक्षा की कोई गारन्टी है। जिससे नौनिहालो का बेहतर भविष्य का निर्माण और लेाग चैन से सौ सके, आज शिक्षा सुरक्षा के नाम गांधी पण्डित जी केे सपने दर्शन खुलेयाम जनसेवको के रहते लुट रहे है। मगर उनके भक्त कुछ करने के बजाये मजबूर दिख रहे है आखिर क्यों ?

यहीं यक्ष प्रश्र हर इन्सान को सता रहा है यह लेाकतंत्र है या साम्राज्यवादियों का शासन जो देखने में सामने आ रहा है।
लेाग परेशान ही नहीं वोट डाल स्वयं की सरकार चुन कलफ रहे है श्रीमानो के आगे वह आज भी दण्डवत कर रहे है।

बहरहाल गांधी, पण्डित जी के नाम लेने वालो को शर्म आनी चाहिए। लेाकतंत्र व जनसेवा के नाम सत्ता की मलाई लूटने वाले संगठित लेागों को सजा मिलनी चाहिए जिसके लिये जरुरत है। हम अपने कत्र्तव्य, अधिकारों को भलीभांति समझ एक नई शुरुआत करे। ये तो करने से रहे, तभी हम हमारा महान लोकतंत्र बचा पायेगेें और महात्मा गांधी तथा पण्डित दीनदयाल के दर्शन को साकार कर पायेगेंं। 
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1 comments:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन फिरकापरस्तों को करना होगा बेनकाब में शामिल किया गया है.... आपके सादर संज्ञान की प्रतीक्षा रहेगी..... आभार...

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