खुले में शौच से मुक्त हुई ग्राम पंचायत रमखिरिया

विलेज टाईम्स, म.प्र.  नरसिंहपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले के चांवरपाठा विकासखंड की ग्राम पंचायत रमखिरिया खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो गई है।

इस अवसर पर गुरूवार को रमखिरिया में एक कार्यक्रम विधायक श्री संजय शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संदीप पटैल, कलेक्टर श्री नरेश पाल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह, अध्यक्ष जनपद पंचायत चांवरपाठा श्रीमती रामवती शंकर पटैल और सरपंच ग्राम पंचायत रमखिरिया श्रीमती निवेदिता महेन्द्र सिंह की मौजूदगी में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के संकल्प को पूरा करने का विशेष जोर दिया गया। खुले में शौच नहीं जाने के लिए लोगों को प्रेरित किया गया। बताया गया कि खुले में शौच नहीं करने से विभिन्न बीमारियों से निजात मिलेगी, साफ-सफाई को बल मिलेगा और गांव के लोगों का सम्मान बढ़ेगा। खुले में शौच से मुक्त गांवों में विभिन्न विभागों के समन्वय से शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में लोगों को शासन की जनकल्याणकारी व स्वरोजगार मूलक योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। इन गांवों के लोगों की समस्याओं का निदान प्राथमिकता से किया जाएगा।

   इस अवसर पर विधायक श्री संजय शर्मा ने कहा कि हमें प्रधानमंत्री जी के स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वच्छ भारत के सपने को साकार करना है। इस अभियान में सहयोग करने वाले पंचायत पदाधिकारी पंच, सरपंच आदि और ग्रामवासी साधुवाद के पात्र हैं। खुले में शौच से मुक्त ग्राम पंचायतों की लोगों के मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य प्राथमिकता से कराए जाएंगे।

   जिला पंचायत अध्यक्ष श्री संदीप पटैल ने स्वच्छ भारत मिशन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने गांवों में साफ-सफाई और स्वच्छता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। कलेक्टर श्री नरेश पाल ने कहा कि स्वच्छता समेत सभी क्षेत्रों में जनकल्याण के कार्यों में उपलब्धि हासिल करने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ- साथ जनसहयोग भी बहुत आवश्यक है। स्वच्छता की दिशा में ग्राम पंचायत की निगरानी समिति की महत्वपूर्ण भूमिका है। निगरानी समिति यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में भी लोग खुले में शौच के लिए नहीं जाएं।

   जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने कहा कि जिले के चांवरपाठा विकासखंड की सभी 83 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य पूर्ण होने पर अन्य प्रदेशों से भी लोग एक्सपोजर विजिट के लिए इस विकासखंड के गांवों में आयेंगे। इन ग्रामों में शासन की कल्याणकारी व स्वरोजगार योजनाओं का लाभ पात्रतानुसार प्राथमिकता से दिलाया जाएगा, इसके लिए शिविर लगाये जाएंगे। इन गांवों के रहवासियों की समस्याओं का निदान भी प्राथमिकता से किया जाएगा।
   कार्यक्रम में श्री शिवराज सिंह राजपूत ने भी अपने विचार रखे। इस अवसर पर चौ. धीर सिंह, जिला पंचायत सदस्यगण, पंचायत पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।
  
सोयाबीन फसल में इल्ली के नियंत्रण हेतु किसानों को सलाह
खरगौन | 18-सितम्बर-2015 उप संचालक कृषि खरगोन ने सोयाबीन फसल में इल्ली नियंत्रण एवं कपास में सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए किसानों को उपयोगी सलाह दी है।
   उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में समय-समय पर जिला स्तरीय डायग्नोसिस टीम द्वारा ग्रामों में भ्रमण कर किसानों को कृषि संबंधी समसामयिक सलाह दी जा रही है। कहीं-कहीं पर सोयाबीन की जल्दी पकने वाली किस्में जैसे- जेएस 9560 आदि की कटाई शुरू हो चुकी है। किसानों से कहा गया है कि 10 से 12 प्रतिशत नमी रहने पर ही बीज का भंडारण करें।
  किसानों को सलाह दी गई है कि सोयाबीन उत्पाद को बीज के रूप में उपयोग लाना है तो सोयाबीन की कहाई के लिए थ्रेशर में ड्रम स्पीड 350 से 400 आरपीएम पर ही गहाई करें, जिससे कि बीज की अंकुरण क्षमता पर विपरीत प्रभाव न पड़े। सोयाबीन फसल में इल्ली नियंत्रण हेतु क्यूनालफॉस 25 ईसी 3 एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें एवं पीला मोजेक से ग्रसित पौधों को उखाड़ कर गड्डे में दबा दें एवं फसल पर इमिडाक्लोरप्रिड या थायोमिथाक्जाम 1 एमएल प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कपास में सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 एसएल 7 एमएल प्रति 15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। कपास में पत्तियों एवं डेंडू (घेटा) पर पर्णदाग दिखाई देने पर कार्बेंडाजीम 12 प्रतिशत मेंकोजेब 63 प्रतिशत 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।

इस वर्ष धान एवं मोटे अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी 26 अक्टूबर से
जबलपुर | 18-सितम्बर-2015 प्रदेश में खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में धान एवं मोटा अनाज की समर्थन मूल्य पर खरीदी की तिथि संभागवार तय की गई है। खरीदी के संबंध में जिला कलेक्टर्स को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने निर्देश जारी किये हैं।
इंदौर, उज्जैन, भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग में मोटा अनाज की खरीदी 26 अक्टूबर से अगली 15 जनवरी 2016 तक की जायेगी। रीवा, शहडोल, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और चम्बल संभाग में मोटे अनाज की खरीदी 2 नवम्बर से 25 जनवरी तक की जायेगी। मोटे अनाज में इन संभागों में ज्वार, मक्का और बाजरा की खरीदी होगी। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम, रीवा, शहडोल, सागर, जबलपुर, ग्वालियर और चम्बल संभाग में समर्थन मूल्य पर धान का उपार्जन 2 नवम्बर से 25 जनवरी तक चलेगा। प्रदेश में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर धान 15 लाख मीट्रिक टन और मक्का 5 लाख मीट्रिक टन उपार्जन किये जाने का अनुमान है।

मच्छर जनित रोगों से बचने की सलाह
पन्ना | 18-सितम्बर-2015 मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.एन. गौतम तथा जिला मलेरिया अधिकरी डॉ. डी.के. गुप्ता ने संयुक्त रूप से आमजनता से अपील की है कि मौसम परिवर्तन के कारण मच्छरों की उत्पत्ति में वृद्धि हो रही है। जिससे मच्छर जनित रोग बढने लगते हैं जैसे डेंगू, चिकुनगुनिया, मलेरिया एवं फाइलेरिया इन सभी के बचाव के लिए अपने आसपास अनुपयोगी पानी जमा न होने दें। उन्होंने बताया कि डेंगू एक संक्रमित मादा एडीज नामक मच्छर के काटने से मनुष्यों में फैलने वाला एक वायरल रोग है। यह सामान्यता डेंगू बुखार के रूप में उत्पन्न होता है। तेज सिरदर्द व बुखार, मासपेशियों तथा जोडों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, जी मचलाना व उल्टी होना, गंभीर मामलों में नाक, मुंह, मसूडों से खून आना तथा कभी कभी हाथ, चेहरे व पेट पर चकत्ते डेंगू बुखार के लक्षण होते हैं।
    उन्होंने बताया कि मलेरिया बुखार के लक्षण सर्दी एवं कम्पन के साथ बुखार आना उल्टी व सिर दर्द होना पसीना आकर बुखार का उतरना, बुखार उतरने के बाद थकान व कमजोरी महसूस होना। इस तरह के लक्षणों युक्त कोई भी बुखार आता है तो तुरन्त निकट के स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय में जाकर रक्त की जांच कराए एवं आवश्यक उपचार कराएं। मच्छर घरों की छत पर रखी पानी की खुली टंकियां, टूटे वर्तन, मटके, कुल्हड, गमलों में एकत्र जल में, बेकार फेंके हुए टायरों के एकत्र जल में, बिना ढंके वर्तनों में एकत्र जल में, किचन गार्डन में रूका हुआ पानी तथा गमले, फूलदान, सजावट के लिए बने फव्वों में एकत्र जल में पैदा होते हैं। पानी भरे रहने वाले स्थानों पर मिट्टी का तेल या जला हुआ इंजन का तेल डालें। सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें। डेंगू के उपचार के लिए कोई खास दवा य वेक्सीन न हो तो बुखार उतारने के लिए पेरासिटामॉल गोली ले सकते हैं। अन्य दवा के लिए डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
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