हको की हुंकार से, हरकत में सरकार, लाखों की पंचाट में होगा पंच परमेश्वरों का फैसला

तनुज गोयल/सनी कुशवाह। विलेज टाईम्स, 27 सितम्बर 2015- भले ही म.प्र. के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव खबर नबीसों से कह रहे हो कि जायज मांगों पर विचार चल रहा है तथा सरकार नियमानुसार काम कर रही है।

वहीं सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान भी यह बताने में पीछे नहीं कि 51 जिलों में से 40 जिलों में भाजपा समर्थित अध्यक्ष है। कोई भी आन्दोलन में शामिल नहीं तो 2 लाख लेागों के जुटने की बात कैसे स भव है सभी हम से बात करके सन्तुष्ट है।
मगर इसके उलट रतलाम जिले के जिला पंचायत उपाध्यक्ष डी.पी. धाकड़ कहते है कि भाजपा कितनी ही कोशिस कर ले, सभा होगी, वहीं जिला पंचायत रीवा के अध्यक्ष अभय मिश्रा कहते है पार्टी रोक भी ले तो 313 जपनद 23 हजार ग्राम पंचायतें के सरपंच उपसरपंच, पंचगढ़ है उन्हें रोकना मुश्किल होगा।
वहीं  बदरबास जनपद के उपाध्यक्ष रामवीर सिहं यादव कहते है हमारे पंच परमेश्वरों के अधिकारों पर नौकरशाही ने कब्जा कर रखा है आज पंचायती राज में न तो गांव गरीब का ही विकास हो पा रहा, न ही नीतिगत निर्णयों पर अमल, आज नौकरशाही जनाकाक्षांओं को रौंध रही है और सरकार यह अन्याय खुलेयाम देख रही है।  बहरहॉल जिस तरह का अक्रोश प्रदेश भर के पंच परमेश्वरों में पनप रहा है, वह प्रदेश के लिये शुभ संकेत नहीं, जहां कराहते पंच परमेश्वरों की भोपाल में जुटने वाली पंचाट से बेखबर मु यमंत्री सोमवार से जापान, दक्षिण कोरिया की यात्रा पर जा रहे है वहीं नौकरशाही से हलाक पंचपरमेश्वर भोपाल के दशहरा मैदान में लाखों की सं या में जुटने की तैयारी लगा रहे है। मगर इन विरोधा भाषी स्वरोंके बीच प्रबल ग्राम स्वराज एवं पंचायती राज समर्थक आन्दोलन के सहयोगी वीरेन्द्र भुल्ले का मानना है कि आखिर खामी कहा रह गई जो दो संवैधानिक संस्थायें आज आमने सामने हो आर-पार के मूड में दिखाई पड़ रही है। निश्चित ही कहीं न कहीं संवैधानिक भावनाओं से खिलबाड़ हुआ और ग्राम स्वराज के खिलाफ कोई तो षडय़ंत्र अवश्य हुआ है जिसे किसी भी स्थति में छमा योग्य नहीं माना जा सकता, बरना क्या बात थी जो लाखों की तादाद में पंच परमेश्वर आन्दोलित हो भोपाल की ओर कूच करने का मन बना चुके ?
बहरहॉल जो भी हो हको के लिये हुई हुंकार का परिणाम तो 2 अक्टूबर को जो भी हो, मगर यह ग्राम स्वराज के  लिये नहीं, गांव, गरीब और म.प्र. सरकार के लिय भी यह शुभसंकेत नहीं। 
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