बिलखते लोग, बेरहम व्यवस्था, न काफी चिकित्सा सुविधा

विलेज टाईम्स, 10 सितम्बर 2015। मप्र शिवपुरी जहां जिन्दा रहने भेड़ बकरियों की तरह जमा हो, काफी जद्दोजहद के बाद नसीब हो पाती है चिकित्सा सुविधा। यहां हम बात कर रहे है कैडर बैस वालो की सरकार की चिकित्सीय सुविधाओं की।


यूं तो मप्र में स्थित शिवपुरी जिले में लगभग 18 लाख के करीब अति गरीब, पिछड़े, बेरोजगार निवास करते है। जिनके के लिये जिला मु यालय पर मात्र एक जिला चिकित्सालय मौजूद है। जहां डॉक्टर सहित चिकित्सीय स्टाफ की भी भारी मारा मारी है। जिसका जिला मु यालय आजकल राजनीति के ददीचो के  लिये, सुविधा के नाम राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। हालात ये है कि दिन भर गड्डों से पटी सड़कों पर उड़ती धूल और मच्छरों का तीर्थ स्थल बन चुके, इस शहर में मौजूद जिला चिकित्सालय की सुविधाओं को लेकर मचे कोहराम में क्या आम क्या खास सभी कलफते नजर आ रहे है। मसिस असहनीय गर्मी के बीच चिकित्सालय परिसर में भीड़ देख सरकार की व्यवस्था और चिकित्सीय सुविधाओं का अन्दाजा लगाया जा सकता है। मगर धन्य है इस जिले के चिकित्सक जो सुबह 8 बजे से लेकर रात 10 बजे तक चिकित्सालय ही नहीं घर तक पर मरीजो से घिरे रहते है। अगर यो कहें कि कुछ बीआईपी लेागों को छोड़ दें, तो किसी की गारन्टी नहीं कि उसे सहज समय से चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध हो पायेगी। फिलहाल तो भक्तों की फौज के चलते भगवान भेड़ बकरियों के अन्दाज में स्वास्थ सेवाओं का लुफत उठा जिन्दगी मौत की दुआं करते सुने जा सकते है और मौजूद व्यवस्था को गरियाते।

क्योंकि यहां राजनैतिक प्रतिद्वन्दता के चलते किसी को तो शहीद होना ही है हालात ये है कि इस शहर में सेवाओं के नाम बैवजह ही लेाग धक्के खा रहे है। वहीं 300 रु. फीस चुका कर भी लेाग चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने डॉक्टरों के घर न बर ही नहीं लाइन लगा रहे है आखिर क्या होगा उन दीन-हीन गरीबों का जिनका वोट अपनी उस्तादी से कबाड़ लोग सत्ता सुख उठा बड़े-बड़े विज्ञापनों के माध्यम से कलफते लेागों को चिकित्सा सुविधा के नाम भरमाना चाहते है। वर्तमान हालातों के मद्दनेजर नहीं लगता  कि कैडर बैस वालो की इस सरकार में अब न तो गांधी के  वो आर्दश बचे और न ही पण्डित जी का वह दर्शन जिसमें वह पक्तीं में अन्तिम छोर पर खड़े व्यक्ति की सेवा की बात कही गई है।

भले ही लेाग बैवस हो या फिर मजबूर मगर लेाग इस बैवसी में अब मरघट और मुक्तिधाम में अन्तर करना चाहते है। माला माल होते डॉक्टर और सिसकते लेाग इस बात के गबाह है कि सत्ता सीनो द्वारा भोले ााले लेागों को बर गला अनवरत सत्ता में बने रहना चाहते है, फिर कीमत जो भी हों।

आज जनाकांक्षाओं की कीमत पर सत्ता का नंगा नाच म.प्र. के शिवपुरी जिले में जिस तरह से चल रहा है। राजनीति का आदर्श जिस तरह से काला हो एक नई इवारत लेाकतंत्र लिख रहा है उससे आने वाले समय में लेागों का सब्र टूटना स्वभाविक है। देखना होगा सत्ता  के नाम बढ़ते रसूख और शासन के नाम मची लूट तथा सेवा के नाम कलफते लेागों की गुहार केडर बैस वालो के कानो तक पहुंच राजधर्म का पालन करा पायेगी या बिलखती जनता ही आने वाले समय में सत्ता के अंहकार में डूबे लेागों को कुछ सबक सिखायेगी।

आकाशवाणी से अब सुनिए च्रमन के गोठज् : रेडियो पर जनता से हर महीने मुखातिब होने वाले पहले मुख्यमंत्री होंगे डॉ. रमन सिंह
हर दूसरे रविवार राज्य के सभी आकाशवाणी केन्द्रों से प्रसारित होगा च्रमन के गोठज्
रायपुर. १० सितम्बर २०१५ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह अब हर महीने के दूसरे रविवार को सवेरे १०.४५ से ११ बजे तक आकाशवाणी के जरिये राज्य की जनता के साथ अपने विचारों को साझा करेंगे। वे इसकी शुरूआत रविवार १३ सितम्बर से करने जा रहे हैं। डॉ. सिंह च्रमन के गोठज् शीर्षक इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की सामाजिक-सांस्कृतिक और प्रशासनिक गतिविधियों तथा अपनी सरकार की विकास योजनाओं के बारे में वार्तालाप शैली में जनता को जानकारी देंगे। आम तौर पर राज्यों के मुख्यमंत्री स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ही हर साल १५ अगस्त को आकाशवाणी और दूरदर्शन से जनता को सम्बोधित करते हैं, लेकिन डॉ. रमन सिंह देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे, जो अपने राज्य की जनता को रेडियो के माध्यम से हर महीने नियमित रूप से सम्बोधित करेंगे। उनका यह अभिनव कार्यक्रम भेंटवार्ता पर आधारित होगा, जो राजधानी रायपुर सहित राज्य में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों से एक साथ प्रसारित किया जाएगा।
राज्य सरकार के जनसम्पर्क विभाग ने आकाशवाणी के सहयोग से इसकी रूपरेखा बनाकर तैयारी शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की ढाई करोड़ से ज्यादा जनता के मुखिया के रूप में डॉ. रमन सिंह ने अपनी सरकार की योजनाओं के बारे में जनता को जानकारी देने और उन योजनाओं के बारे में नागरिकों का च्फीड बैकज् लेने के लिए आकाशवाणी के माध्यम से जनता तक पहुंचने का निर्णय लिया है। जनसम्पर्क विभाग के सचिव एवं आयुक्त श्री गणेश शंकर मिश्रा ने आज यहां बताया कि शासन और प्रशासन में अधिक से अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी मुख्यमंत्री के इस नियमित रेडियो कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के विशाल भौगोलिक क्षेत्रफल, व्यापक वन क्षेत्र, अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की आबादी और कृषि प्रधान राज्य के किसानों तथा ग्रामीणों की जनसंख्या को देखते हुए यह प्रयास किया जा रहा है कि इस विशेष कार्यक्रम के जरिए मुख्यमंत्री के उद्बोधन अधिक से अधिक लाभ लोगों को मिले तथा शासन और प्रशासन के प्रति जन-आस्था और भी अधिक सुदृढ़ हो सके।
राज्य सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए राजधानी से लेकर सभी जिलों में प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया है। मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, सचिवों और विशेष सचिवों को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि राज्य में आकाशवाणी की व्यापक पहुंच और शासकीय योजनाओं के प्रचार-प्रसार में उसकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री ने यह निर्णय लिया है कि वे प्रत्येक माह के द्वितीय रविवार को पूर्वान्ह १०.४५ से ११ बजे तक प्रदेशवासियों से आकाशवाणी के जरिये सीधे मुखातिब होंगे। मुख्य सचिव ने  पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों को मुख्यमंत्री के रेडियो कार्यक्रम का प्रसारण अधिक से अधिक संख्या में जनता को सुनाने के लिए ग्राम पंचायत भवनों, सांस्कृतिक भवनों, सामुदायिक भवनों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रेडियो सेट (ट्रांजिस्टर) की व्यवस्था करने और स्थानीय लोगों और स्थानीय लोगों को वहां आमंत्रित करने के लिए कहा है। मुख्य सचिव ने दोनों विभागों को ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला स्तर पर कार्यक्रम का प्रचार प्रसार करवाने के भी निर्देश दिए हैं। जनसम्पर्क विभाग के आयुक्त-सह सचिव श्री गणेश शंकर मिश्रा ने भी आज इस सिलसिले में सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखा है।
श्री मिश्रा ने पत्र में उनसे कहा है कि मुख्यमंत्री का यह रेडियो कार्यक्रम नियमित और स्थायी स्वरूप का होगा, जिसमें उनके द्वारा विभिन्न जिलों की उल्लेखनीय घटनाओं, उपलब्धियों और किसी सामाजिक संस्था के अभिनव प्रयासों का भी उल्लेख किया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री के रेडियो प्रसारण का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोग उठा सके, इसके लिए जिला कलेक्टरों को प्रत्येक जिले में अपर कलेक्टर स्तर के एक अधिकारी को नोडल अधिकारी नामांकित करने और जिला मुख्यालयों, निकटवर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ प्रत्येक विकासखंड मुख्यालय में और हर ग्राम पंचायत तथा शिक्षा संकुल केन्द्रों और बड़े गांवों में सार्वजनिक अथवा निजी भवनों में मुख्यमंत्री का रेडियो प्रसारण सुनने की व्यवस्था करने को कहा है। श्री मिश्रा ने पत्र में उनसे यह भी आग्रह किया है कि वे कार्यक्रम के बाद इस संबंध में लोगों के सुझाव और फीडबैक भी भेजे। इस कार्यक्रम के लिए अगले छह महीने का कैलेण्डर भी तैयार कर लिया गया है।
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