डेंगू की जकड़ में शिवपुरी शहर, अभी तक 169 मरीज चिन्हित

विलेज टाईम्स, सितम्बर 2015। म.प्र. शिवपुरी अगर प्राप्त व पुष्ट जानकारियों की माने तो आधा शहर डेंगू की चपेट मे है। जहां जांच के दौरान डेंगू का लार्वा मिला है। डेंगू ने पास कॉलोनी से लेकर गरीब बस्तियों तक को नहीं छोड़ा है जिसमेें लुहारपुरा, नीलनगर चौराहा, अहीर मोहल्ला, राजपुरा रोड, आर्दश कॉलोनी, पुरानी शिवपुरी गौशाला, वर्मा कॉलोनी, मनीयर, फतेहपुर, लालमाटी, नबाव साहब रोड, ये प्रमाणिम तौर पर वह चिन्हित ऐरिया है जहां डेंगू का लार्वा पाया गया है। मगर प्रशासन आज भी लापरवाह बना हुआ है क्योंकि उसे लेागों से क्या लेना देना बरना आज नगर पालिका हरकत में दिखती सिर्फ पॉडर की लाईन बना अपने कत्र्तव्य की इतश्री करने वाली पालिका को फुरसत ही नहीं कि वह अपने नागरिकों की सुध ले पाये।


शिवपुरी जिले के मु य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्री भदकारिया ने कहा कि 1 जून 2015 से 169 व्यक्ति डेंगू से पीडि़त चिन्हित किये गये है। जिनमें से 111 उपचार के बाद ठीक हो चुके है। केवल 1 व्यक्ति की मृत्यु हुई है।
फिलहाल सीएचएमओ का दावा है कि 4 डॉक्टर तैनात है व 24 घन्टे के अन्दर रिपोर्ट मिल जाये, इसकी व्यवस्था जिला चिकित्सालय में की गई है। साथ ही जे.डी. स्वास्थ की उपस्थिति में सभी की बैठक कर डेंगू को रोकने की पहल प्रशासनिक स्तर पर की गई है।
मगर पेयजल ग्रस्त इस शहर की मुसीबत यह है कि यहां न तो शुद्ध पेयजल है न ही नियमित पेयजल सप्लाई की कोई व्यवस्था जिसके चलते लेाग या तो स्वयं का पैसा खर्च कर या आने वाले पेयजल को स्टोर करने पर मजबूर है मगर नगर पालिका की लापरवाही के चलते आज शहर शमसान बनने पर मजबूर है क्योंकि डेंगू के लार्वा ने आधे से अधिक शहर को फिलहाल अपनी चपेट में प्रमाणिम तौर पर ले रखा है, देखना होगा इस शहर का भविष्य क्या होगा ?

हको की हुंकार: 2 अक्टूबर को जुटेगें भोपाल में पंच परमेश्वर
विलेज टाईम्स, सितम्बर 2015। म.प्र. आजाद भारत में ग्राम स्वराज की कल्पना का सपना देखने वाले स्व. महात्मा गांधी ने कभी सपने में भी न सोचा होगा कि उनके सपने का हर्ष ऐसा होगा कि गांव की चौपाल पर बैठ कभी न्याय करने वाले पंच परमेश्वरों को स्वयं न्याय पाने दर-दर भटकना पढ़ेगा। आज हालात ये है कि  म.प्र. के पंचपरमेश्वर अपने संविधान उन्मुख हको को पाने के लिये 2 अक्टूबर को भोपाल के दशहरा मैदान में इक_ा होने वाले है उनका सीधा आरोप नौकरशाही, लाल फीता शाही को लेकर है। जिसने उनके हको को छीन उन्हें ताकत विहीन बना दिया है जिसके चलते वह न तो नीति ही बना पा रहे, न ही गांव का विकास करा पा रहे, न वी.पी.एल. पेन्शन योजना जैसी सीधा लाभ हितग्राही को पहुंचाने का कार्य कर पा रहे है।
हालात ये है कि पहले बस्ता लिये सचिव सरपंच के पीछे होता था। आज बस्ता लिये सचिव के पीछे सरपंच खड़ा रहता है। इतना ही नहीं जनकल्याण से जुड़े कार्यो को कराने के आगे गिड़गिड़ाते नजर आते है।
बहरहॉल जिस तरह की तैयारियाँ प्रदेश भर में हको को हासिल करने चल रही है। उसे लेकर म.प्र. की नौकरशाही, सरकार भले ही फिक्र मंद न हो। मगर जैसा कि दावा त्रिस्तरीय पंचायती राज संघ की प्रदेश कॉर कमेठी कर रही उसे देखकर लगता है कि आने वाले समय में सरकार की परेशानियाँ बढऩे वाली है, जिसका निदान फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आता।
SHARE
    Your Comment

0 comments:

Post a Comment