जनभावनाओं की कीमत पर, अंहकार की जंग

व्ही.एस.भुल्ले। कहते है विश्व के कई देशों में लेाकतांत्रिक व्यवस्था के पक्षधर लेाग इसलिये बड़ी सं या में है क्योंकि यह व्यवस्था मानवीय मूल्यों को पूरा करती है। मगर जैसे ही इस व्यवस्था में गिरावट आना शुरु हो जाती है यह व्यवस्था स्वत: ही मानवीय मूल्यों से दूर होने लगती, तब एक स्थति ऐसी भी आती है जहां लेाकतंत्र को सहने या स हलने का मौका भी उस देश और न ही उस देश के नागरिकों के  पास होता है।

अगर आम आदमी की माने तो चलते-चलते हमारा महान लोकतंत्र चलने, दौडऩे के बजाये, अब घसीटने की स्थति तक जा पहुंचा है। अब इस लेाकतंत्र को यहां तक पहुंचाने वाले दल जि मेदार है, या इनसे, कहीं अधिक जि मेदार आप और हम है। जिन्हें स्वयं के स्वार्थ छोड़ देश व समाज के बारे में सोचने की फुरसत ही नहीं, खाना, पीना, सो जाना अगर ज्यादा समझदार हुये तो नैतिक, अनैतिक रुप से अकूत दौलत कमाने में जुट जाना भर रह गया है।
रहा सवाल उस देश का जिसका भू-भाग, स प्रभुता हमारी है जिसकी सुरक्षा भी हमारी जबावदारी है। जिसके लिये हम सरकारे चुन उन्हें अपने वोट और टेक्स के रुप में दिये धन से पोषित करते है।
मगर कभी धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र तो कभी स्वयं के निहित स्वार्थो के चलते, हम देश की राजनीति से स्वयं को दूर रखते  है। जो देश में उन सरकारों को चुनने का माध्ययम होती है। जो हमारा ही नहीं, हमारे देश के  उस भू-भाग, जहां हम निवास करते है। जहां आने वाले समय में हमारे नौनिहालो का सुरक्षित और खुशहाल रहना है, ऐसी सरकार और विपक्ष जनप्रतिनिधियों  को चुनते वक्त हम भूल जाते है। जिसका दंश यह सब भोगते चले आ रहे है। आज भी परिणाम कि विगत दिनो से चल रही संसद में न तो सरकार ही संजीदा दिख रही है और  न ही विपक्ष संवेदनशील, परिणाम कि हमारा महान लेाकतंत्र आज हाफता नजर आ रहा है।
एक जरा सी बात न तो सरकार समझना चाहती न ही विपक्ष , कि देश के संविधान से सर्वोपरि इस देश में कोई भी नहीं, न तो वह अंहकार और न ही आरोपों के रुप में एक  दूसरे पर होने वाले वह प्रहार जिनसे न तो देश और न ही देश की करोड़ों करोड़ जनता का कोई बास्ता।
निश्चित ही सरकार जिस तरह से सदन को चला रही है वह उसे अपना कत्र्तव्य समझ रही है। क्योंकि देश की जनता ने यह सरकार अपने कल्याण, राष्ट्र कल्याण हेतु चुनी है और विपक्ष को सत्ता से बाहर कर विपक्ष में बैठने का मत दिया है।
अगर ऐसे में नैतिकता के नाते सरकार कुछ कदम उठा पर पराओं को और कारगार बनाती तो बेहतर होता। वहीं विपक्ष भी अपने गिले सिकबे सवालो के माध्ययम से सदन में और संगठन के माध्ययम से सड़क पर जनता को बताती तो निश्चित ही हमारे लोकतंत्र में और मजबूती आती।
मगर सरकार व विपक्ष के आचरण से आज सभी स्तब्ध है और उनके मन में कई सवाल हैं कि आखिर उनसे भूल कहां हुई जो उन्होंने ऐसी सरकार और विपक्ष को चुन सदन तक पहुंचाया जो सदन में उनकी बात छोड़ स्वयं के अंहकार में डूबे हुये है।

देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का २१ प्रतिशत वन्‍य क्षेत्र है: जावड़ेकर
०६-अगस्त, २०१५ इंडिया स्‍टेट ऑफ फोरेस्‍ट रिपोर्ट-२०१३ के अनुसार देश में ६९७,८९८ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, कुल वन क्षेत्र है। यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का २१.२३ प्रतिशत है। इंडिया स्‍टेट ऑफ फोरेस्‍ट रिपोर्ट-२०११ की तुलना में देश के वन्‍य क्षेत्र में ५८७१ वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पास देश में वन्‍य क्षेत्र बढ़ाने के लिए राज्‍य को हरित बोनस देने का कोई प्रस्‍ताव नहीं है। यह जानकारी आज राज्‍य सभा पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री प्रकाश जावडे़कर ने दी।

रिसर्जेंट राजस्थान पार्टनरशिप समिट रोड शो 2530 करोड़ के बारह एम.ओ.यू पर हुए हस्ताक्षर आठ हजार को मिलेगा रोजगार
जयपुर, 6 अगस्त। राजस्थान सरकार और भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित रिसर्जेंट राजस्थान पार्टनरशिप समिट रोड शो एवं निवेशकों की बैठक में मु यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की मौजूदगी में टेक्सटाईल के क्षेत्र में करीब 2530 करोड़ की लागत के बारह समझौता पत्रों (एम.ओ.यू.) पर हस्ताक्षर किए गए इससे टेक्सटाइल क्षेत्र में करीब आठ हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। इस अवसर पर मु यमंत्री श्रीमती राजे ने कहा कि आगामी नव बर में होने वाले रिसर्जेंट राजस्थान स मेलन से पहले हुए इन एम.ओ.यू. से राजस्थान में टेक्सटाइल क्षेत्र के विकास में यह एक बड़ी उपलब्धि है।
एम.ओ.यू. पर राजस्थान सरकार की तरफ से उद्योग आयुक्त श्री अभय कुमार ने हस्ताक्षर किए। एम.ओ.यू पर हस्ताक्षर करने वालों में एमीनेंट डीलर्स, भीलवाड़ा के अध्यक्ष श्री राजेश अग्रवाल ने रिसाईकल्ड फाईवर के लिए 90 करोड़ के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किये इसी तरह एम.आर. वीविंग प्राइवेट लिमिटेड भीलवाडा के निदेशक श्री महेश अग्रवाल ने स्पीनिंग यार्न के लिए 100 करोड़ रूपये,  मयूर यूनिक्यूटर्स जयपुर के अध्यक्ष एस.के. पोद्दार ने पीयू कोटेड टैक्सटाइल फैबरिक (टैक्निकल टैक्सटाइल्स) यूनीट के लिए 275 करोड़ रुपये, नितिन इस्पीनर्स के अध्यक्ष श्री आर.एल नौलखा ने स्पीनिंग कॉटन यार्न उद्योगों के लिए 300 करोड़ रुपये, राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स लिमिटेड भवानीमंडी के कार्यकारी अध्यक्ष श्री एस.एस. माहेश्वरी ने यार्न की यूनिट स्थापित करने के लिए 260 करोड़ रूपये, श्री अनंत सिंटेक्स लिमिटेड भीलवाड़ा के प्रतिनिधि श्री अनिल सोनी ने स्पींनिग यार्न यूनिट लगाने के लिए सौ करोड़ रुपये, श्री वल्लभ पीत्ती ग्रुप इन्डस्ट्रीज जालौर के अध्यक्ष श्री विनोद पीते ने कॉटन यार्न उद्योग के लिए पांच सौ करोड़ रुपये, श्रुति स्पीनर्र्स भीलवाड़ा के निदेशक श्री महेश भीमसरिया ने स्पिनिंग यार्न यूनिट लगाने के लिए सौ करोड़ रुपये, सुपर गोल्ड शूंटिग प्राइवेट लिमिटेड भीलवाड़ा के प्रतिनिधि श्री मनीष चाडंक ने अपनी क पोजिट यूनिट के लिए सौ करोड़ रुपये एवं संगम इंडिया लिमिटेड भीलवाड़ा-चित्तौडगढ़ के प्रबंध निदेशक एस.एन. मोडानी ने सिंथेटिक यार्न, कॉटन यार्न, पीवी फैबरिक, सिमलैस गारमेंटस और डेनिम फैबरिक उद्योगों के लिए तीन अलग-अलग समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर किये जिनमें 705 करोड़ रूपये का निवेश होगा।

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