बैवस लेाकतंत्र अंहकार में डूबे तंत्र, सदन पर भारी होती सियासत

व्ही.एस.भुल्ले। लोकतंत्र में जनसेवा, राष्ट्र सेवा, जनकल्याण को तो स्थान होना चाहिए, मगर लेाकतंत्र के मन्दिर सदन में भी सियासत हो और वह भी, सत्ता और अंहकार के लिये इसकी इजाजत कदापि नहीं होना चाहिए। क्योंकि प्राय: देखने में आ रहा है। जिस तरह विरोध और सदन चलाने की पर परायें बन रही है वह लोकतंत्र ही नहीं लेाकतंत्र मन्दिर सदन के लिये भी घातक है।

मगर इस सबके बावजूद हमारे लेाकतंत्र ही नहीं महान सदनों में भी कुछ वर्षो से ऐसा ही हो रहा है अगर ऐसा हो रहा है तो निश्चित ही आने वाले समय में सत्ता और अंहकार के चलते हमारा लेाकतंत्र अब सियासत का अखाड़ा बनने वाला है। जहां सत्ता के लिये होने वाले राजनैतिक मलयुद्ध में आम जनता के सामने ताली ठोकने या फिर अपनी बैवसी पर मातम मनाने को अलावा कुछ न होगा।
क्योंकि अब लगता है कि माननीय अपनी जबावदारी का सामना करने से कतराते है, आखिर क्यों बहुमत में होने वाली सरकारे ठीक से सदन नहीं चला पाती। जबकि संविधान में सदन चलाने नियम, कानून, कत्र्तव्य, अधिकार, मर्यादायें सभी तो है। फिर क्यों आपस में मुंह छिपा सच का सामना करने से माननीय कतराते है क्या ऐसे ही दिनो के लिये देश की जनता ने इन माननीयों को अपना बहुमूल्य मत दे चुना था जिससे पक्ष, विपक्ष या सरकारे बनती है। आ िार क्यों नहीं अंहकार सत्ता लालसा में डूबी चुने हुये जनप्रतिनिधियों की जमात यह क्यों नहीं सोचती है कि देश की बढ़ती लगभग सबा अरब की आबादी को आपसे बड़ी उ मीदे है। वो चाहते है कि वह भले ही खुले आसमान में स्वयं रह दो जून की रोटी को संघर्ष कर सूखा, बाढ़, भूस्खलन, प्राकृतिक आपदा के बीच संघर्ष करते हुये ऐसा मानते है कि आप इन महान सदनों में बैठ सर्वसुविधा भोग उनके लिये न सही उनकी आने वाली पीढ़ी के लिये ऐसी नीतियां नियम, कानून बनायेेगें जिससे वह स पन्न हो खुशहाल जीवन जी सके। आप लेागों द्वारा बनाई नीतियों की छत्र छाया में सुरक्षा पूर्वक सो सके।
मगर आये दिन चलने वाले सत्ता के लिये चलने वाले सियासी मलयुद्धों को दे ा नहीं लगता कि गांव, गली, मोहल्ले चाल, झोपड़ पट्टी या खुले में झोपड़ी बना रहने वाले किसान, आम गरीब, मजदूर का कुछ होने वाला है।
कारण साफ है, जिस तरह से लेाकतंत्र में चुने हुये जनप्रतिनिधियों के स्वाभिमान पर दल व दलीय प्रथा हावी हो चुकी  है और संगठित सत्ता हासिल कर सत्ता सुख भोगने में लगी है।  उससे नहीं लगता अब बहुत कुछ होने वाला है।
 बेहतर हो कि  देश के दल, पक्ष-विपक्ष और चुने हुये जनप्रतिनिधि सोचे कि जिन्होंने तु ह बहुमूल्य मत देकर चुना है आखिर उनका क्या अपराध है ? जो वह आजादी के 67 वर्ष बाद भी असुरक्षा और आभावों का दंश भुगत रहे है।

हरदा के पास हुई रेल दुर्घटना के संबंध उच्च-स्तरीय बैठक
भोपाल : बुधवार, अगस्त ५, २०१५,मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हरदा जिले में कल रात हुई रेल दुर्घटना के प्रभावितों के लिये बचाव और राहत व्यवस्थाओं की आज यहाँ उच्च-स्तरीय आपात बैठक में समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिये कि राहत और बचाव कार्य युद्ध-स्तर पर किये जायें। घायलों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। बैठक में निर्णय लिया गया कि रेल दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को राज्य सरकार रेलवे की सहायता के अलावा दो-दो लाख रूपये की सहायता देगा। साथ ही दुर्घटना में गंभीर घायलों को ५० हजार रूपये तथा अन्य घायलों को १० हजार रूपये की मदद दी जायेगी। बैठक में गृह मंत्री श्री बाबूलाल गौर, वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र और राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह भी उपस्थित थे। बैठक के तुरन्त बाद मुख्यमंत्री श्री चौहान घटना स्थल के लिये रवाना हुए। बैठक में तय किया गया कि राहत और बचाव कार्यों की देख-रेख भोपाल से गृह मंत्री श्री गौर तथा राजस्व मंत्री श्री रामपाल सिंह करेंगे। इसी तरह हरदा में वन मंत्री डॉ.शेजवार राहत और बचाव कार्यों की देख-रेख करेंगे। बैठक के दौरान श्री चौहान ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी तथा रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु से दूरभाष पर बात की। राज्य शासन रेलवे प्रशासन से लगातार संपर्क में है। बैठक में बताया गया कि कल रात करीब ११.३० बजे अति वृष्टि के कारण हरदा से २५ किलोमीटर दूर माचक नदी में बाढ़ आयी और मिट्टी के कटाव के कारण रेल की पटरियों का सपोर्ट हट गया। इससे कामायनी एक्सप्रेस और जनता एक्सप्रेस के २१ डिब्बे डिरेल हो गये। घटना की सूचना मिलते ही तत्काल हरदा और खण्डवा जिला प्रशासन से बचाव दल भेजे गये। अति वर्षा के कारण सड़क संपर्क कटे होने से आस-पास के गाँवों के सरपंचों तथा ग्रामीणों को भी घटना-स्थल पहुँचने के लिये कहा गया। सेना से भोपाल और महू में संपर्क कर बचाव दल भेजने का आग्रह किया गया। हरदा से भी होमगार्ड का बचाव दल भेजा गया। बचाव दलों ने रात में ही पहुँचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। अब तक २७ मृतकों के शव मिले हैं तथा ७० लोगों के घायल होने की सूचना है। बचाव और राहत कार्य जारी है। घायलों को आवश्यकतानुसार घटना स्थल पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया तथा नजदीकी अस्पतालों में ले जाने की व्यवस्था की गयी।

स्वच्छता अभियान के लिए महिलाएं देंगी घर-घर देंगी दस्तक : मुख्यमंत्री से मिलकर श्रीमती शमशाद बेगम ने दी जानकारी
रायपुर, ०५ अगस्त २०१५ मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से यहां उनके निवास कार्यालय में पदमश्री सम्मान प्राप्त और प्रदेश में स्वच्छ भारत अभियान के तहत नवरत्न के रूप में चयनित श्रीमती शमशाद बेगम ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि उनकी समाज सेवी संस्था च्सहयोग जन कल्याण समितिज् स्वतंत्रता दिवस से गन्दगी से आजादी दिलाने के स्वच्छता अभियान को और भी अधिक सक्रियता के साथ लागू करने का प्रयास करेगी। उनका अभियान दुर्ग जिले के गुण्डरदेही विकासखंड से प्रारंभ होगा। इसका विस्तार दूसरे जिले में और पूरे प्रदेश में करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने श्रीमती शमशाद बेगम और उनकी समाज सेवी संस्था द्वारा की जा रही इस पहल की सराहना की और इस अभियान की सफलता के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। श्री शमशाद बेगम ने मुख्यमंत्री को बताया कि इस अभियान में प्रमुख भूमिका ग्रामीण महिलाओं की होगी। स्व-सहायता समूह, संयुक्त देयता समूह की महिलाओं और महिला कामाडो इस अभियान के तहत घर-धर, गांव-गांव जाकर स्वच्छता की अलख जगाने का काम करेंगी। समूह की महिलाएं अपने घरों की साफ-सफाई के साथ घर-घर जाकर शौचालय का निर्माण करने और उसके उपयोग करने के लिए लोगों को प्रेरित करेंगी। इस अवसर पर सहयोगी जनकल्याण समिति की महिला कंमाडो श्रीमती रूबिना, श्रीमती लक्ष्मी साहू, श्रीमती सुनीता सारवा, श्रीमती देवकी, श्रीमती द्रोपदी और श्रीमती ओम बाई भी उपस्थित थीं।

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