कॉग्रेस: बगैर किये वापसी का, मुगालता

लगातार हर मोर्चे पर चुनाव हारती कॉग्रेस को शायद अभी भी ये मुगालता है कि वह बगैर कुछ किये एक बार फिर से सत्ता वापसी करेगी।
बगैर किसी दिशा, मुद्दों के कोहराम मचाने वाली कॉग्रेस को शायद गलत फहमी है कि जो क्रिया कलाप उसके द्वारा सदन, सड़क या मीडिया मंचो पर अपनाये जा रहे है। उसके चलते उसके पक्ष में देश के कई प्रदेशों और देश में कोई बड़ा जनाधार खड़ा होने वाला है।

अगर ऐसे में देश के प्रधानमंत्री 10 वर्ष तक का समय देश की जनता से सत्ता में बने रह, देश की सेवा करने के लिये चाहते है, तो इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
क्योंकि देखा जाये तो कई प्रदेशों की सत्ता ही नहीं देश की सत्ता से बड़ी ही शर्मनाक स्थति से बाहर होने वाली कॉग्रेस का शायद कोई धनी धोरी ही नहीं। क्योंकि कॉग्रेस की देश भर में हुई करारी हार के जो कारक कारण जब मौजूद थे वह आज भी मौजूद है। अगर युवा तुर्को के नाम शेष जो मौजूद है। वह विरासत में मिली गद्दी के चलते, उन्हें एहसास ही नहीं कि देश और देश वासियो का मर्म क्या है ? तो कुछ ऐसे है जो अपनी विरासत की बिना पर चुनाव तो जीत गये मगर उनका ज्ञान-विज्ञान देश व देश वासियों को समझने तैयार नहीं, अब ऐसी हालत में संगठन भी रसातल में हो और आम लोगों के मुद्दे विषय वस्तु से गायब हो, छोड़ सत्ताधारी दल को कोसने के अलावा, तो कॉग्रेस के भविष्य का अन्दाजा लगाया जा सकता है।
रहा सवाल राहुल का तो एक व्यक्ति क्या-क्या कर सकता है। जबकि उनके, संवाद, स पर्क के माध्यम सुरक्षा के चलते सीमित और उनके ऑफिस में स्वयं का नाम तक बताने लोग तैयार न हो, तो कल्पना की जा सकती है। एक ऐसे बैवस दल की बैवसी समझी जा सकती है। जहां आपसी विश्वास संदिग्ध और आलाकमान काकस से घिरा हो।
ऐसे में वैचारिक रुप कई छोटे-मोटे संगठनों का नेतृत्व करते, दल से जब सीधा मुकाबला हो, जबकि खासकर वह दिल्ली ही नहीं अन्य प्रदेशों में भी सत्तासीन हो, ऐसे में संगठन विहीन, बगैर विषय वस्तु औरमुद्दों पर प्रदर्शन के रुप में  ऊर्जा क्षरण को कहां तक  उचित कहा जा सकता है।
मगर जिस तरह कई प्रदेशों सहित दिल्ली में सफाये से लेकर उपचुनाव, नगरी निकाय चुनावों में कॉग्रेस का सफाया अच्छे अन्तरो से हुआ हो, ऐसे में कॉग्रेस की स्थिति में फिलहॉल कुछ खास होने वाला है तो यह भी आम कॉग्रेसी के लिये मुगालता नहीं तो और क्या। जबकि कॉग्रेस को केन्द्र से सत्ता गबाये डेढ़ वर्ष होने वाला है और कॉग्रेस वहीं की वहीं। उसी स्थिति में खड़ी है जैसी कि वह अपनी सत्ता के दौरान थी।
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