व्यवसाईयों से मुक्त हुये बगैर, कांग्रेस की मुक्ति असम्भव

व्ही.एस.भुल्ले। कहते है किसी भी संगठन को चलाने चमकादार नेतृत्व, जनभावनाओं से ओतप्रोत विचारधारा, संगठनात्मक ढांचा, सक्रिय सदस्य, सामान्य सदस्य और समर्थकों की आवश्यकता होती है। जिनके अन्दर लेाकतांत्रिक आस्था के साथ  वैचारिक रुप से समर्पण, निष्ठा का भाव होना चाहिए।


मगर फिलहॉल कॉग्रेस में कुछ चमकदार नेतृत्व तो है मगर भीड़ प्रबन्धक और व्यवसाईयों की है। जो समुची कॉग्रेस पर हावी हॅै, परिणाम कि कॉग्रेस वैचारिक तौर पर चारो खाने चित, तो निष्ठा आस्थायें अपना-अपना नफा नुकसान देख निभाई जा रही है। समर्पण के नाम शून्य होते इस संगठन में प्रबन्धक व्यवसाईयों का ऐसा जमघट मौजूद है। जिन्होंने समर्पित नेता या फिर कार्यकत्र्ताओं को सफाचट कर अपनी अपनी अघोषित जमात बना रखी है।

जो आलाकमान के भोलेपन का लाभ उठा कुछ अपनी राजनीति चमकाने में लगे है तो कुछ सत्ता जाते ही अपने-अपने व्यवसाय बढ़ा रहे है। इतना ही नहीं पीढ़ी दर- पीढ़ी अपनी बफादारियों के पुरुस्कार बस कुछ अपनी पीढिय़ों को कॉग्रेस की पीठ पर बैठाल सत्ता, राजनीति की सैर करा रहे है।

अब ऐसे में कुछ शेष बचता है तो सिर्फ कॉग्रेस, जो शैया पर पढ़ी-पढ़ी पथराई आंखों से अन्तिम सांस गिन रही है। एक उ मीद कि किरण राहुल टीम से रही, मगर नहीं लगता व्यवसाईयों का जमघट उसे भी पार घाट लगने दें।

अगर आलाकमान चाहता है कि कॉग्रेस अपने पूर्व स्वरुप से लौटे तो उसे जाना होगा स्व. इन्दिरा गांधी के इतिहास में कि कैसे उन्होंने देश में एक मजबूत संगठन खड़ा किया। जाना होगा उस संगठनात्मक ढांचे पर जिससे पूरे देश में वैचारिक तौर पर कॉग्रेस का राज रहा।

देखा जाये तो कोई बहुत देर नहीं हुई है। आलाकमान चाहे तो कॉग्रेस पुन: अपनी खोयी प्रतिष्ठा हासिल कर सकती है। क्योंकि उसका अपना एक गौरवशाली इतिहास है और नेतृत्व भी फिलहॉल बेदाग। मगर दरबाजे और दिल तो बगैर दरबानो के खुले रखने होगें। और बगैर भेदभाव के वैचारिक मुद्दे भी तलाशने होगेंं जिस पर गौरव शाली संगठन खड़ा हो चल सके। और कॉग्रेस इन व्यवसाईयों से मुक्त हो सके।

स्मार्ट सिटी के हर मापदंड पर खरा उतरेगा भोपाल
भोपाल : गुरूवार, अगस्त 20, 2015 मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भोपाल शहर स्मार्ट सिटी के हर मापदंड पर खरा उतरे इसके प्रयास किए जायेंगे। भोपाल के अलावा प्रदेश के अन्य शहरों को भी स्मार्ट सिटी बनाया जायेगा। इसके लिये जरूरी हुआ तो राज्य सरकार के संसाधन का उपयोग भी किया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान आज यहाँ तीन दिवसीय स्मार्ट सिटी कॉनक्लेव भोपाल-2015 का शुभारंभ कर रहे थे। श्री चौहान ने कहा कि भोपाल प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण सुंदर शहर है। इसे स्मार्ट सिटी बनाने के लिए देश-दुनिया में जो भी बेहतर हुआ है उसे यहाँ लागू किया जाएगा। भोपाल के विकास के लिए रोडमेप तैयार किया गया है। स्मार्ट सिटी के विकास के लिए शहर की जनता को भी जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर सरकार वह है कि उसे जो भी अच्छे सुझाव मिले उन्हें क्रियान्वित करें। भोपाल को दुनिया के सबसे अच्छे शहरों में से एक बनाएंगे। राज्य सरकार गाँवों में शहरों जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करवाने के लिए स्मार्ट विलेज योजना लागू कर रही है।
 स्वागत भाषण में महापौर श्री आलोक शर्मा ने बताया कि भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लिए विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के लिए पुनर्घनत्वीकरण के लिए जमीन की आवश्यकता होगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नगर निगम द्वारा तैयार किए गए स्मार्ट कार्ड का शुभारंभ किया। उन्होंने नगर निगम के ई-न्यूज लेटर और ई-गवर्नेंस पत्रिका के विशेष अंक का विमोचन भी किया। नगर निगम तथा इलेट्स टेक्नो मीडिया के इस कार्यक्रम में विधायक सर्वश्री विश्वास सारंग, सुरेन्द्रनाथ सिंह, रामेश्वर शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष श्री सुरजीत सिंह चौहान, केन्द्रीय नागरिक उड्यन विभाग के संयुक्त सचिव श्री अनिल श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन श्री मलय श्रीवास्तव और आयुक्त नगरीय विकास एवं पर्यावरण श्री विवेक अग्रवाल उपस्थित थे

आदिवासी अब वैज्ञानिक पद्धति से कर रहे शहद संग्रहण : एक ही छत्ते से तीन बार इक्ट्ठा कर रहे है शहद
रायपुर 20 अगस्त 2015 राज्य सरकार की संस्था विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा  बस्तर के नारायणपुर जिले के ग्राम बेहबेडा, कंदाडी, सरगीपाल, दुग्गाबेगाल आदि ग्राम एवं दंतेवाडा जिले के कुटरू, बीजापुर जिले के ग्रामों में शहद एकत्रीकरण से जुड़े लगभग 200 आदिवासियों को रॉक बी-हनी हार्वेस्टिंग (वैज्ञानिक पद्धति से शहद संग्रहण) का प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि मधुमक्खी के छत्ते को जलाये बिना एक ही छत्ते से तीन बार शहद एकत्रित कैसे कर सकते है। दिए गए प्रशिक्षण के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि बिना धुआँ किए बगैर कैसे शहद का संग्रहण किया जाता है। इसके साथ ही  मधुमक्खियों को बिना क्षति पहुंचाए शहद इक्ट्ठा कर सकते है। इस पद्धति से शहद निकालने पर मधुमक्खियों को कोई क्षति भी नहीं होती है, बल्कि उनकी संख्या में भी वृिद्ध होती है। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षणकर्ताओं ने लगभग ढाई क्विंटल शहद का संग्रहण किया, जिसे सेन्टर ऑफ डिस्कवरी फॉर सोसायटी द्वारा डेढ़ सौ रूपए किलो की दर से खरीदा है। मधुसंग्राहको की आय में भी लगभग तीन गुना वृद्वि हुई है।  इस वैज्ञानिक पद्धति से शहद संग्रहण का कार्य अब नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले के आदिवासी करने लगे है और उनकी अतिरिक्त आय में भी वृद्धि होने लगी है। पहले यह लोग पुरानी पद्धति से शहद निकाला करते थे जो एक बार ही प्राप्त होता था । लेकिन अब यह एक मधुमक्खी के छत्ते से तीन बार शहद इक्ट्ठा कर रहे है। प्रशिक्षण के दौरान किट भी प्रदाय किए गए ।

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