एक राष्ट्र सेवक की आस्था और लेाकतंत्र का सच

वीरेन्द्र शर्मा। भले ही देश के सर्वोच्च सदन का पावस सत्र हंगामे और अंहकार की भेंट चढ़ गया हो, अब ऐसे में इसे, इस सत्र की कुर्बानी ही ...

वीरेन्द्र शर्मा। भले ही देश के सर्वोच्च सदन का पावस सत्र हंगामे और अंहकार की भेंट चढ़ गया हो, अब ऐसे में इसे, इस सत्र की कुर्बानी ही कहा जा सकता है। मगर इसके मंथन से इतना तो साफ हुआ है कि हम एक मजबूत ही नहीं, सच्चे और अच्छे लेाकतंत्र की ओर बढ़ रहे है ऐसा नहीं कि बर्बाद हुये इस सत्र की क्रिया प्रतिक्रिया नहीं होगी। लेाकतंत्र है तो यह होना भी स्वभाविक है।

मगर जिस तरह से सदन के रिकार्ड या उसके बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप, प्रत्यारोप, नीयत नीति को लेकर बहस चली। वह भी बगैर प्रधानमंत्री के व्यान या हस्तक्षेप के उसने साबित कर दिया कि हमारा लेाकतंत्र मजबूत है।
क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ने शपथ के साथ ही सदन में हुई बैठक में साफ कर दिया था। कि अब वह 59 माह बाद फिर से एक रिपोर्ट कार्ड लेकर आयेगें शायद वह उसी क्षण से उस तैयारी में जुट गये, जिस कार्ड का जिक्र उन्होंने अपने दल सहित देश से किया है यह भी सच है कि अगर काम करना है तो बैवजह की बातों को छोड़ काम पहले करना होगा।  शायद इसीलिये देश के प्रधानमंत्री, स्वच्छता से लेकर आदर्श ग्राम, जनधन, जीवन सुरक्षा जीवन बीमा, डिजिटल इण्डिया , स्केल इण्डिया, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई, ग्रीन इण्डिया की लाइने लेाकतंत्र के खाके में खीचने में सफल रहे।
इस बीच भ्रष्टाचार मुक्त सरकार देने का वादा करने वाले प्रधानमंत्री पावस सत्र में भ्रष्टाचार के आरोपो से इतर तटस्थ दिखे मगर उन्होंने पूरे समय सदन के दरवाजे खोल आरोप लगाने व जबाव देने वालो को पूरा लोकतांत्रिक अधिकार दिया जिससे किसी को कोई भी शिकायत न रहे व देश का हर आम और खास भी देखे कि लेाकतंत्र कैसे चलता है।
अब इस सबके पीछे उनकी अन्नन्य राष्ट्र भक्ति है या फिर राजनीति जिसका जबाव देश को 59 माह बाद मिलना है।
बैसे भी कहते है कि अगर कुछ अच्छा करना है या आगे बढऩा है तो लक्ष्य को याद रखो और सकारात्मक बने रहो।
शायद वह जानते थे कि विपक्ष के आरोपों में जान हो, या न हो, मगर उन्होंने पूरा मौका दिया। आरोप लगाने व जबाव देने वालो को, वह शायद यह भी बखूबी जानते थे कि बोलनेे का मतलब घर तो घर बाहर वालो के बीच भी कोहराम मचा सकता है। जिससे न तो देश और न ही देश वासियों का भला होने वाला है।
शायद इसीलिये उन्होंने लाख आरोप, प्रत्यारोप के बावजूद चुप्पी ओडऩा उचित समझा।
उनकी इस चुप्पी ने साबित कर दिया कि अब हमारा महान लेाकतंत्र और मजबूत तथा देश और देश वासियों का भला होने वाला है।
फिलहॉल सच जो भी हो , मगर वर्तमान यहीं कहता है और भविष्य जो भी हो ?

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तीरंदाज,311,व्ही.एस.भुल्ले,505,
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एक राष्ट्र सेवक की आस्था और लेाकतंत्र का सच
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