नाथो के नाथ हम, क्यों है, अनाथ...?

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज भैया- नाथो के नाथ हे भोले नाथ, अब तो हम दीन-हीनों का बस आप ही एक सहारा हो, क्योंकि जो हारे नाथ बन हारे जैसे गरी...

व्ही.एस.भुल्ले@तीरंदाज
भैया- नाथो के नाथ हे भोले नाथ, अब तो हम दीन-हीनों का बस आप ही एक सहारा हो, क्योंकि जो हारे नाथ बन हारे जैसे गरीबों की नैया पार करने का दम भरते थे। कोई सच्चा सेवक, तो कोई पुजारी बन हमारी पूजा करने की बात करते थे। कहते थे जनता मेरी भगवान, लेाकतंत्र मन्दिर और मैं उनका पुजारी, प्रभु सारे के  सारे अपनी बात से मय अंण्डी बच्चों से पलट लिये है।
अब तो आप ही का सहारा है एक तो प्रभु सावन का माह और हारे सेवक, पुजारियों का पावस सत्र के कपाट बगैर हमारी बात सुने ही बन्द हो लिये है।  तो कुछ सेवक, पुजारी, भगवान की परसादी में मची लूट पाट की बदनामी के डर से पहले ही मन्दिरो के ताले जड़ चुके है। सुनते है लेाकतंत्र के इन पुजारियों की भजन मण्डली अब आपके नगर उज्जैनी में 2016 के महाकु भ में डुबकी लगाने वाली है जिसमें पुजारी महंत ही नहीं महामण्डेलेश्वरों की भी टोली पहुंचने वाली है। सो प्रभु अब तो आप ही से हम दीन-हीनों को उ मीद सारी है उज्जैनी पहुुंचने वाली इन पुजारियों, महंत, महामण्डेलेश्वरों से सवाल जबाव करने की अब तो आपकी बारी है। प्रभु पूछना इन पुजारी महंत महामण्डेलेश्वरों से कि श्रावण मास में लेाकतंत्र के मन्दिरों के दरवाजे आखिर क्यों बन्द है जिस श्रावण मास में फूल-पत्ती पेड़-पौधे, जीव-जन्तु, जानवर, इन्सान सभी के चेहरे चमक जाते है उस श्रावण मास में मेरे बन्धो चेहरे मुरझाये हुये है। आपके रहते वह क्यों बैवस, मायूस है। क्यों जोर-जोर से जय कारो की जगह रुधन, घुटन मौजूद है।
भैये- श्रावण मास में प्रभु के दरबार में बैठ तने कै बोल रिया शै, कै थारे ने भी हारी भाभी के साथ श्रावण मास का उपवास रखा है।
भैया- बेहतर होता गर हारे को पहले ही अकल आ जाती, तो कम से कम रैंगता बचपन और घसीटती जबानी से तो बच लिया होता और मने भी किसी लेाकतांत्रिक पीठ का मण्डेलेश्वर बन मजे कर रिया होता। कम से कम इन बैवस पतराई आंखों से परसादी में हुई लूट की अंहकारी जंग लेाकतंत्र के मन्दिरों में तो नहीं देख रिया होता। आखिर सच क्या है भाया कुछ तो बता।
भैये- गर सुनना चावे तो सुन जब हारे माननीय ही हारी नहीं सुनते तो श्रीमानो से कै शिकायत। भाया पूरा सत्र हारे लेाकतंत्र के मन्दिरों में प्रसादी में हुई लूटपाट के  धमईये में बन्द हो लिया, कुछ पुजारी, सेवक तो इतने उस्ताद निकले कि उन्होंने तो मन्दिर के कपाट खुलते ही ताला जड़ धमईया के डर से अपने आपको दूर कर लिया, सुनते है कि म.प्र. के पुजारी, मण्डेलेश्वर प्रभु महा काल की नगरी में होने वाले महाकुंभ में जाने वाले है। जहां दिल्ली महापीठ के पुजारी और देश महा मण्डलेश्वर 2016 के मेले में उदघाटन को आने वाले है।
भैया- इसीलिये तो मने भी अब हारे माननीय पुजारी, सेवक, महामण्डेलेश्वरों को छोड़ प्रभु भोले नाथ के दर अर्जी लगा रहा हूं। जिससे हम दीन-हीनों को न्याय मिल सके और सेवक, पुजारी, महा मण्डेलेश्वरों से अब तो प्रभु के दरबार में ही सवाल जबाव हो सके।  वो तो भला हो, दिल्ली महा पीठ के महामण्डेलेश्वर का, सो उन्होंने तो हि मत दिखा दिल्ली पीठ की इज्जत बचा ली और परसादी में हुई लूट-पाट को लेकर मचे धमईये की सारी स्क्रीप्ट भगवान को बता दी। मगर दुर्भाग्य कि  इतने दिन लेाकतंत्र के मन्दिर में चले धमईये में हारे पक्ष में तो कोई नजर नहीं आया जो देखों सो देखो काले धन या किसी भगोड़े को लेकर उपस्थित सेवको का समूह अवश्य चिल्लाया, सो न तो किसी ने हम दीन-हीनेा का मुद्दा उठाया और न ही गर्भ ग्रह में पहुंच कर किसी ने प्रभु आपका जयकारा लगाया।
भैये- तने तो बावला शै, यहीं तो लेाकतंत्र है, कि थारे को मालूम कोणी विपक्ष का काम होवे चिल्लाना और सत्ता पक्ष का काम होवे सदन चलाना मगर हारे महा मण्डेलेश्वर की कोई गलती हो तो बता, पूरे समय लेाकतंत्र के सदनो में पहुंच थारे माननीय थारे जैसे गरीबों की कितनी चिन्ता रखते है। थारे जैसे गरीबों का कल्याण कैसे हो, उसके लिये सदन में किस तरह कोहराम, तो सदन के बाहर कैसे धरना देते है। इस मौके पर कम से कम पक्ष-विपक्ष सभी के चेहरे तो साफ दिखते है इस सबके बावजूद भी हारे महा मण्डेलेश्वर की महानता तो देखो, कि वह इस कोहराम से दूर थारे जैसे दीन-हीन, मध्ययम उच्च वर्ग के साथ राष्ट्र कल्याण कैसे हो, इस बात पर स्वयं को मुंह बन्द कर चिन्तन करते है।
भैया- मने समझ लिया थारे जैसे मीडिया वालो को एक सच्चे जनसेवक को महामण्डेलेश्वर बोल रहे हैै और बगैर 59 माह का इन्तजार किये पहले से ही एक सच्चे देश भक्त पर महामण्डेलेश्वर की उपाधि ठोक रहे है। मगर तने भी कान खोल कर सुन ले भाया गर हारी रोटी, सड़क, पानी, संसाधन की व्यवस्था में गर कोई अड़ंगा लगा तो मने भी मौन साध सब भूल जाऊंगा और प्रभु के द्वार पर ही ऐसी धूनी रमाऊंगा गर मिला प्रभु का आर्शीवाद तो चकाचक गर खुला तीसरा तो समझों सेकिन्डो में सफाचट ?

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तीरंदाज,321,व्ही.एस.भुल्ले,515,
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Village Times: नाथो के नाथ हम, क्यों है, अनाथ...?
नाथो के नाथ हम, क्यों है, अनाथ...?
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