लोकतंत्र बचाने, प्रभावी जनहस्तक्षेप जरुरी

व्ही.एस.भुल्ले। जनतंत्र के नाम जिस तरह से आम जनता के साथ संवैधानिक संस्थाओं का व्यवहार हमारी लेाकतांत्रिक व्यवस्था में हो रहा है। वह किसी सुहागिन की आड़ में बैबा से कम नहीं। जिसका दूर-दूर तक कोई धनी धोरी नजर नहीं आता।


बात चाहे विधायिका कार्यपालिका की हो या फिर लेाकतंत्र , जनतंत्र पर हावी दलीय व्यवस्था की हो, देश में अघोषित तौर पर जनतंत्र के नाम एक ऐसा साम्राज्य, सामन्तवाद चल रहा है, जिसमें आम गरीब, किसान, विधि तकनीकी विशेषज्ञ ही नहीं वह व्यापारी, उघोगपति भी कलफ रहा है। जो एक खुशहाल जीवन जीने की उ मीद लिये इस लोकतंत्र में जी रहा है।

कारण साफ है कि हमारी संवैधानिक संस्थाऐ व व्यवस्थायें प्रभावहीन और लेाकतंत्र को जिन्दा रखने वाले इन संस्थाओं, दलीय सम्राज्यवाद की विछलग्गू बनती जा रही है। अब यह इनकी नियति है या फिर स्वयं के स्वार्थ बस स्वयं को स्थापित बनाये रखने षडय़ंत्र है, या फिर लेाकतांत्रिक मजबूरी, फिलहाल भविष्य के गर्व में है।
क्योकि आम जन मानता है कि जिस संविधान और संवैधानिक संस्थाओं में उनकी गहरी आस्था है वह उनके खुशहाल जीवन के लिये दिन रात एक करने में जुटे है। मगर जनतंत्र के वर्तमान हालात इस बात के गवाह है। कि अब बगैर प्रभावी जनहस्तक्षेप के लोकतंत्र को सुरक्षित बचाये रखना मुश्किल ही नहीं न मुमकिन है, तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी।

क्योंकि जिस तेजी से देश में जनसुरक्षा, पारदर्शी, नीति कानूनों की जरुरत है। वह भी नहीं बन पा रहे है। और जो मौजूद कानून नीतियां है उनका भी पालन हमारी विधायी, कार्यपालिका के लेाग करा पा रहे, पारदर्शिता ऐसी कि सूचना का अधिकार आये पूरे 10 वर्ष होने को है। अगर सूचना अधिकार के लं िबत आवेदको की गिनती करा यथा स्थिति पर नजर दौड़ाई जाये तो लाखों आवेदन बगैर किसी कार्यवाही के कार्यलयों में दम तोड़ रहे होगें। कई प्रदेश तो ऐसे है जहांं आज भी सूचना आयुक्त ही नियुक्त न होगें। 39 हत्याओं केे साथ सेकड़ों प्रताडि़त आर.टी.आई. कार्यकत्र्ता प्रताडि़त मिलेगें जिस तरह से कानून का माखौल उड़ा लेाकतंत्र की हत्या करने कार्यपालिका के नौकरशाहों के संरक्षण में कोशिस हो रही है। उसके लिये माननीय न्यायालयों के सरकारों, नौकरशाहों से सवाल जबाव, फटकार के कई मामले आय दिन सुनने, पढऩे को मिलते है। जो धीरे-धीरे सरकारों में पनपते दलीय सम्राज्यवाद, सामंतवाद के इशारो पर नाचती नौकरशाही को समझने काफी है।

चाहे शिक्षा, स्वास्थ, सड़क, सुुरक्षा का क्षेत्र हो या फिर सेवा, सुविधा के क्षेत्र से जुड़े, रेल संचार, बिजली, बीमा, के क्षेत्र हो जहां इन अमलो में जमे सरकरों व कानूनों का संरक्षण प्राप्त नौकरशाह और इनकी मशीनरी तो कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।  मगर संविधान को अंगीकार करने वाला वह आम नागरिक असुरक्षित है। जो इस देश के लेाकतंत्र की रीढ़ है। लाखों की पगार और सेवा सुविधा समेटने वाली इन सरकारों व इनके नौकरशाहों के पास आज भी यह जबाव नहीं कि भारतीय रेल क्यों असुरक्षित और बेसमय है, क्यों लोगों को समान शिक्षा, स्वास्थ, सेवाये, बेहतर सड़क, शुद्ध पेयजल नसीब नहीं, हो पा रहा। घर उद्योगों में बिजली कब आयेगी कब जायेगी कब इन्टरनेट सेवा बन्द हो जायेगा कोई सूचना नहीं। क्योंकि शासकीय कार्यलयों की छवि सेवक की न होकर शासक के रुप में हो गई। ये वो सवाल हैं जो लेाकतंत्र में जनहस्तक्षेप की दरकार रखते है।

अगर खबरों की माने तो अभी तक तो नेता, गुन्डो, नौकरशाहों का ही गठजोड़ ही लेाकतंत्र के लिये खतरा माना जाता था। मगर अब खतरा ज्यादा इस लिये भी है। कि इस गठजोड़ ने अब तो चौथे स्त भ को भी अपने आगोस में लेना शुरु कर दिया है। जो जनतंत्र लेाकतंत्र ही नहीं, आम नागरिक की खुशहाली के लिये खतरनाक है। इसलिये अब समय आ गया कि जनतंत्र में प्रभावी जनहस्तक्षेप की शुरुआत हो, जिससे हमारे देश में मौजूद महान लेाकतांत्रिक ताने बानो को बचाया जा सके।

                 सी.बी.आई. जाँच के निर्देश के लिये सुप्रीम कोर्ट के आभारी, मुख्यमंत्री श्री चौहान की प्रतिक्रिया
भोपाल : गुरूवार, जुलाई ९, २०१५, मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि व्यापमं मामले की सी.बी.आई. जाँच के निर्देश के लिये वे उच्चतम न्यायालय के हृदय से आभारी हैं। इस जाँच से भ्रम दूर होगा और सच सामने आयेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा व्यापमं की सी.बी.आई. जाँच के लिये किये गये अनुरोध की प्रशंसा करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इसे स्वीकार किया है। श्री चौहान ने यह जाँच जल्दी शुरू करने का आग्रह किया है ताकि सारा सच जनता के सामाने आये और न्याय हो। राज्य सरकार की पहल से ही व्यापमं से जुड़ी जाँच की कार्रवाई शुरू की गयी थी।

अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन के लिए होगी परामर्श गोष्ठी
रायपुर, ०९ जुलाई २०१५ शहरी क्षेत्रों के लिए भारत सरकार की ३ अति-महत्वपूर्ण  परियोजनाओं, अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी और स्वच्छ भारत मिशन से सम्बंधित सूचना शिक्षा और सम्प्रेषण के लिए प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में नागरिक परामर्श गोष्टी का आयोजन किया जायेगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सुडा ) द्वारा आज सभी निकायों के नगर निगम आयुक्तों,नारा पालिका और नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में अनिवार्य रूप से तय समय सीमा में इस गोष्ठी का आयोजन करने के निर्देश दिए गए हैं। सुडा द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी निकाय १७ जुलाई तक अनिवार्य रूप से इस गोष्ठी का आयोजन सुनिश्चित करें। इस छत्तीसगढ़ में इस इस गोष्ठी का नाम सिटी थौन २०१५ रखा गया है। इस गोष्ठी का विषय होगा च्मेरे सपनो का स्वच्छ शहरज्। गोष्ठी का आयोजन प्रत्येक वार्ड में निर्वाचित जनप्रतिनिधि और प्रशासक के सहयोग से जन सभा आयोजित की जाएगी। इस जन सभा में नागरिको से अमृत मिशन, स्मार्ट सिटी  और स्वच्छ भारत मिशन के सम्बन्ध में परामर्श लिए जायेंगे। इस परामर्श गोष्ठी में स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता हेतु कार्य योजना तैयार करने के लिए शहर के वरिष्ठ नागरिकांे का क्षेत्र वार दल गठित किया जायेगा। इस परामर्श गोष्ठी में वार्ड के बच्चों, युवाओं, महिलाओं, पुरुषों और बुजुर्गों से विचार विमर्श किया जायेगा। गोष्ठी में स्वच्छता, साफ सफाई हेतु सहभागिता और नागरिकों एवं निकाय की जिम्मेदारी, सुव्यवस्थित शहर हेतु नागरिकों द्वारा अपेक्षित अधोसंरचना, निकाय के द्वारा प्रदत्त सेवाओं और अधोसंरचना आदि को और अधिक स्मार्ट बनाने, अपने शहर और क्षेत्र को स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सम्मिलित करने हेतु नागरिकों की सहभागिता और अपेक्षा पर चर्चा की जाएगी, नागरिको को डिजिटल भारत अभियान से जोड़ने के लिए सभी नागरिको के ई-मेल पते का भी संकलन किया जायेगा। शहर का पहला न्यूज लेटर भी नागरिको को इस ई-मेल पते पर प्रेषित किया जायेगा।

राज्य सरकार की महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए कृत संकल्पित - महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री
जयपुर, 9 जुलाई। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की महिलाओं को स्वावलंबी एवं आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए कृतसंकल्प है। विभाग द्वारा प्रदेश में चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत महिलाओं को विभिन्न हुनर में पारंगत किया जा रहा है। सरकार महिलाओं को विभिन्न व्यवसायों में दक्ष बनाकर उन्हें अपना कार्य प्रार भ करने के लिए आर्थिक मदद भी उपलब्ध करा रही है। श्रीमती भदेल ने यह बात गुरूवार को अजमेर शहर में विभाग एवं महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय प्रबंधन केन्द्र के तत्वावधान में जारी फैशन डिजाइनिंग एवं सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रमों के समापन के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि  मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की सोच है प्रदेश की महिलाएं स्वावलंबी एवं आर्थिक रूप से सक्षम बनें एवं विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की करें। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग  के तहत विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने कहा कि विभाग ने महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय के साथ मिलकर महिलाओं को उनके घर के आसपास ही रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। फैशन डिजाइनिंग, सिलाई, क प्यूटर एवं अन्य प्रशिक्षण महिलाओं को दिए जा रहे हैं ताकि वे आर्थिक रूप से सक्षम एवं सशक्त हो सकें। यह कार्यक्रम महिलाओं में काफी लोकप्रिय है तथा इन्हें व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए हर संभव प्रयास कर रहा  है।  विभाग के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं एवं अमृता सोसायटी से जुड़ी महिलाओं के लिए जयपुर व दिल्ली में आयोजित किए जाने वाले व्यापार मेले अब संभाग मु यालयों पर भी आयोजित करवाए जाएंगे। इनमें प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली महिलाओं को नि:शुल्क स्टॉल उपलब्ध करायी जाएगी। श्रीमती भदेल ने महिलाओं से आग्रह किया कि वे जिस व्यवसाय का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है। वे उस व्यवसाय की तमाम बारीकियां भी पूरी ग भीरता से सीखें ताकि प्रतिस्पर्धा के इस दौर में उन्हें पिछडऩा नहीं पड़े। महिलाएं अपने आप को प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं रखें बल्कि यहां सीखे हुए हुनर का व्यावसायिक उपयोग भी करे। राज्य सरकार द्वारा विभिन्न बैंको के माध्यम से उन्हें आर्थिक मदद भी उपलब्ध करायी जाएगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला कलक्टर डॉ. आरूषी मलिक ने कहा कि महिलाओं को स्वावलंबी एवं सक्षम तभी माना जा सकता है जब वे आर्थिक रूप से सक्षम हो। महिलाएं अपनी स्थिति को बदलने के लिए स्वयं आगे आए। महिलाएं विभिन्न व्यवसायों के जो गुर सीख रही है वे उसमें पूरी तरह से ग भीरता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करे एवं व्यावसायिक जरूरतों के मुताबिक अपनी कार्यशैली को निखारे।  डॉ. मलिक ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग सहित विभिन्न विभागों के माध्यम से महिलाओं एवं पुरूषों को हुनर सिखाने के लिए विभिन्न योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। इन योजनाओं का लाभ उठाएं एवं तरक्की करें। कई प्रशिक्षण कार्यक्रम तो ऐसे है जिनमें प्रशिक्षण के पश्चात रोजगार भी तुरन्त उपलब्ध हो जाता है। विश्वविद्यालय के उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय प्रबंधन केन्द्र के निदेशक प्रो. बी.पी.सारस्वत ने कहा कि इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य सरकार गरीब एवं वंचित तबकों की महिलाओं को उनके घर के आसपास ही प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध करा रही है। महिलाएं पूरी रूचि के साथ इन कार्यक्रमों में प्रशिक्षण लें और आत्मनिर्भर बनें। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के डॉ. आशीष पारीक, डॉ. दीपिका उपाध्याय, महिला एवं बाल विकास विभाग के श्री महावीर सिंह सहित विभिन्न अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  कार्यक्रम में प्रशिक्षण लेने वाली बालिकाओं एवं महिलाओं को उनके प्रशिक्षण से जुड़ा किट भी वितरित किया गया।

महिलाओं ने दिखाया फैशन डिजाइनिंग में हुनर
पुलिस लाईन क्षेत्र में आयोजित फैशन डिजाइनिंग प्रशिक्षण में बालिकाओं एवं महिलाओं ने अपने हुनर से सभी को चौंका दिया। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती अनिता भदेल एवं जिला कलक्टर डॉ. आरूषी मलिक सहित प्रशिक्षण स्थल पर उपस्थित सभी लोगों ने महिलाओं द्वारा डिजाइन किए गए वस्त्रों की प्रशंसा की। श्रीमती भदेल ने तो एक-एक वस्त्र के बारे में तथा उसे डिजाइन करने वाली प्रशिक्षणार्थी के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शिविर में कपड़ों की रंगाई से लेकर उनके डिजाइन एवं सिलाई तक का जो कार्य हुआ है। वह बेहतरीन है। यह कार्य बाजार में उपलब्ध आधुनिक एवं महंगे वस्त्रों की तरह ही उ दा एवं प्रशंसनीय है।
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