रिपोर्ट कार्ड की रिहर्सन के बीच व्यवस्था में कोहराम

भारतीय लेाकतंत्र को लेकर आम भारतीय के जहन में, आय दिन, यंू तो कई सवाल बने  रहते है, मगर 2018 के रिपोर्ट कार्ड के बीच, व्यवस्था में मचे क...

भारतीय लेाकतंत्र को लेकर आम भारतीय के जहन में, आय दिन, यंू तो कई सवाल बने  रहते है, मगर 2018 के रिपोर्ट कार्ड के बीच, व्यवस्था में मचे कोहराम को लेकर कुछ यक्ष सवाल अवश्य बनते है। जिनका उत्तर आना लाजमी है। क्योंकि देश सवा अरब का है, यहां सबसे अहम सवाल यह है कि क्या भारतीय लेाकतंत्र पर अब भीड़तंत्र हावी है। या फिर चन्द लोगों की जमात, जिनका अन्तिम लक्ष्य या तो अधिकाधिक धर्नार्जन या फिर निरन्तर सत्ता में बने रहना है। दूसरा अहम सवाल यह है कि देश का आम नागरिक इसे किस दृष्टि से देखे।


देश के प्रधानमंत्री ने देश की संसद में आयोजित कार्यक्रम में कहा था कि वह अपना रिपोर्ट कार्ड 2018 में लेकर प्रस्तुत होगें। मगर इससे पहले कि कुछ कदम चलती कि उनकी सरकार को लेकर विपक्ष ने सवाल खड़े करना शुरु कर दिये, मगर प्रधानमंत्री की रिहर्सल का कारवां नहीं रुका, उन्होंने देश ही नहीं विदेशो में अपनी नीतियों के झन्डे गाड़ अपनी यात्रा जारी रखी है।

मगर इस बीच उन्हीं के दल की कुछ प्रदेशो में स्थापित सरकारों पर संगीन सवाल खड़े होना शुरु हो गये।जिसमें राजस्थान, महाराष्ट्र की सरकारे तो नई है। मगर छत्तीसगढ़ , म.प्र. की सरकारे तो 10 वर्ष से निरन्तर स्थापित है।

जहां राजस्थान की सरकार किसी भगोड़े की मदद में लज्जित है तो महाराष्ट्र सरकार भ्रष्टाचार से, वहीं छत्तीसगढ़ सरकार नान घोटाले को लेकर तो म.प्र. सरकार व्यापाम घोटाले को लेकर हैरान परेशान है।
ऐसे में प्रधानमंत्री के इस व्यान के बाद कि न खायेगें, न ााने देगें के बाद की चुप्पी को लेकर भले ही कई सवाल बनते हो, मगर इनका सटीक जबाव, भाजपा को देना चाहिए। क्योंकि केन्द्र की सरकार पर आज भी कोई सवाल नहीं। जिसे 2018 में अपना रिपोर्ट कार्ड देश की जनता के सामने प्रस्तुत करना है। लगता है कि प्रधानमंत्री के एजेन्डे में धन कमाने वाले अन्तिम लाइन में है।

तभी तो भूमि अधिग्रहण बिल पर ग्रहण लगने के बाद सरकार का लक्ष्य पड़ोसी देश  ही नहीं, यूरोप ऐशिया से साउथ अफ्रीका है।

देश में आम गरीब निशक्तो की प्रमाणित मदद के लिये जन, धन, बीमा, पेन्शन तो स्वस्थ रहने स्वच्छ भारत अभियान की कल्पना है। शिक्षा से लेकर, प्रधानमंत्री कृषि, सिंचाई, डिजिटल इन्डिया की कल्पना निश्चित ही कुछ प्रमाण लाने की दिशा में बढ़ रहे है।

अगर यो कहे कि इस बीच लोकतंत्र के नाम व्यवस्था में मजे कोहराम को लेकर लेाकतंत्र की भयानक तस्वीर देश के सामने आने वाली है। तो कोई अतिसंयोक्ति न होगी। जरा-जरा सी बात पर बगैर कानून जाने धरना, प्रदर्शन, तोड़ फोड़, अराजकता न्याय के नाम हैवानियत और भीड़तंत्र के सहारे इन्सानियत की मांग ने समुचे लेाकतंत्र को ही सकते में डाल दिया है।

जिसके आगे सभी लाचार जान पड़ते है। साम्राज्यवादियों के षडय़ंत्र में डूबी धन लोलुप जमात, यह मानने तैयार नहीं। कि एक नेक दिल इन्सान की जरुरत दो वस्त्र, सोने 3 बाई 6 का स्थान पर जिन्दा रहने जरुरत अनुसार भोजन की जरुरत होती है। बाकी तो सब कागजो में लिखा रहता है। जिसका हिसाब किताब उसके मरने के बाद होता है और हो सकता है। मरने के बाद धनाडन्यो में नाम लिखा हो या फिर इन्सानो के रुप में किताबों में बहरहॉल जो  स्थति हमारे लेाकतंत्र की हो। वह न तो किसी से छिपी है। न ही वह अपने परिचय की मौहताज है अब इसे हम अपना सौभाग्य कहे या दुर्भाग्य कि पूर्व सेनाध्यक्ष और आज के मंत्री ने म.प्र. शिवपुरी के गांधी पार्क में आयोजित अन्ना की सभा में कहा था। कि 500 लेाग इस देश को चलाते है दिल्ली के वर्तमान सीएम एवं पूर्व वर्तमान अन्ना समर्थक अरविन्द ने भी अन्ना आन्दोलन के मंच से कहा था, कि ये सब चोर है, आपस में मिले हुये है।

मगर देश के प्रधानमंत्री की कार्य प्रणाली बताती है और हर अहम मसले पर विपक्ष द्वारा सरकार का विरोध बताता है कि भारत मां की सेवा में उसके कई लाल जुटे है। जो भारत माता का सर कभी झुकने नहीं देगें जैसा कि कभी देश के प्रधानमंत्री भी प्रधानमंत्री बनने से पूर्व अपने भाषणों में कहा करते थे, कि मैं भारत का सर कभी झुकने नहीं दूंगा फिलहॉल इस सब के बीच जरुरी है कि देश की जनता जागृत रहे और देश की राजनीति में अपनी सक्रियता बनाये रखे, तो कोई ताकत नहीं जो हमारे महान लेाकतंत्र को निगल जाये, या हमें आंखे दिखा सके। देश की संवैधानिक संस्थाओं को भी चाहिए कि वह अपनी प्रमाणिकता बनाये रखे, जिससे देश की जनता का विश्वास उन पर बना रहे, नहीं तो वो दिन दूर नहीं जब हम व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा, और स्वार्थो में सब कुछ गवां बैठेगें।

महंगाई पर लगाम कसने की कार्रवाई तेज : छत्तीसगढ़ में ग्यारह करोड़ रूपए की २२ हजार क्विंटल से ज्यादा दलहन जब्त
रायपुर, ०७ जुलाई २०१५ महंगाई पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्देश पर खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभागीय अधिकारियों ने चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अब तक दाल के व्यापार में अनियमितताओं के आठ प्रकरण दर्ज किए गए हैं और लगभग ग्यारह करोड़ रूपए के २२ हजार २९८ क्विंटल दलहन (दाल) जब्त की गई है। इस कार्रवाई से राज्य में दालों के खुदरा मूल्य में आठ प्रतिशत तक गिरावट आई है। प्रदेश के खाद्य मंत्री श्री पुन्नूलाल मोहले ने आज नई दिल्ली में राज्यों के खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने  बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में दाल सहित २२ आवश्यक वस्तुओं के थोक और खुदरा कीमतों की नियमित रूप से निगरानी की जा रही है। जमा खोरी की आशंका होने पर छापामार शैली में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जा रहा है।

नई दिल्ली में राज्यों के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रियों की राष्ट्रीय परामर्शी बैठक
राजस्थान सरकार द्वारा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए कारगर उपाय- खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति  मंत्री
 जयपुर, 7 जुलाई। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री हेम सिंह भड़़़़़़़़़ाना ने कहा है कि राज्य सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 के तहत पात्र लाभार्थियों तक खाद्यान्न की पहुंच सुनिश्चित करने के साथ ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत छीजत को रोकने के लिए कारगर उपाय कर रही है। श्री भडाना मंगलवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राज्यों के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रियों की राष्ट्रीय परामर्शी बैठक में बोल रहे थे। बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय उपभोक्ता मामलात, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री श्री राम विलास पासवान ने की। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने बैठक को संबोधित किया  उन्होंने बताया कि मु यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की बजट घोषणा के अनुसार राशन की दुकानों पर प्रत्येक लाभार्थी को देय सामग्री का वितरण 'आधारÓ आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन के पश्चात पी.ओ.एस. मशीन के माध्यम से करवाने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रथम चरण में आठ जिलों अजमेर, सीकर, झुंझुनू, धौलपुर, बारां, झालावाड़, टोंक एवं बूंदी का चयन किया गया है।

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रिपोर्ट कार्ड की रिहर्सन के बीच व्यवस्था में कोहराम
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