बगैर स्वाभिमान सम्मान की सियासत में सिसकता इन्सान

व्ही.एस.भुल्ले। आरोप अभिव्यक्ति की आड़ में जिस तरह की सियासत हमारे लेाकतंत्र में चल निकली है उसने स्वाभिमान, स मान की सियासत में आग लगा आम इन्सान को सिसकने पर मजबूर कर दिया है सत्ता हथियाने के लिये व्यक्तिगत ही नहीं सामूहिक तौर एक दूसरे को नीचा दिखाने का जो सिलसिला सियासत में चल पढ़ा है वह यह बताने काफी है कि सवा अरब की जनसं या वाला देश सियासी तौर पर ही नहीं स यता तथा सांस्कृतिक तौर कैसा बनता जा रहा है। कोई धर्म तो कोई जाति, क्षेत्र विशेष की अस्मिता के नाम खुलकर आरोप और अभिव्यक्ति के नाम सामाजिक ताने वाने ही नहीं संवैधानिक भावनाओं का भी कचूमर निकालने में लगा है।

जो किसी भी राष्ट्र, समाज व्यवस्था के लिये उचित नहीं, मगर सच यहीं है कि सियासत के लिये आज सब कुछ हो रहा है। मगर यहां यक्ष प्रश्न यह है कि अगर देश और समाज सहित सियासत में सत्ता के लिये मान-स मान, स्वाभिमान का इसी तरह सरेयाम सड़कों पर चीर हरण होता रहा तो आने वाली पीढ़ी के लिये सत्ता और सियासत के नाम क्या संदेश रह जायेगा।
देश में हालिया सवाल देश के दो बड़े राजनैतिक दलो और प्रदेशों सहित देश में मौजूद वर्तमान या पूर्व सरकारों पर आरोप प्रत्यारोपों और देश में मौजूद संवैधानिक व्यवस्था के मान-स मान, स्वा िामान को लेकर है मगर सबसे बड़ा सवाल उन जनभावनाओं के साथ हो रहे अन्याय को लेकर है जो दलो के जनप्रतिनिधियों को अपने बहुमूल्य से चुनकर सदनो तक पहुंचाती है। जहां उनकी सुरक्षा कल्याण, खुशहाली के लिये नीतियाँ, कानून गहन विचार विमर्श के पश्चात बनाये जाते है। जिनकी कार्यवाहियों पर सरकारे जनता का करोड़ोंं अरबों रुपया खर्चती है। मगर वर्तमान हालात उन जनभावनाओं का कचूमर निकाल आज आम इन्सान को सिसकने ही नहीं सोचने पर मजबूर कर रहे है।
जिसमें आरोप, अभिव्यक्ति की आड़ में व्यक्तिगत ही नहीं सामूहिक रुप से कीचड़ उछाल एक दूसरे के मान,स मान, स्वाभिमान की होली जलाई जा रही है।
यह भी सच है कि विपक्ष का कार्य, गलत नीतियों का विरोध करना, सदन से लेकर सड़क तक होता है। वहीं सत्ताधारी दल का धर्म सदन को चलाना रहता है।
जिसके लिये हमारे संविधान में सदन चलाने और विपक्ष को विरोध जताने की भी व्यवस्था है।
देखा जाये तो हुड़दंग हंगामा या फिर सदन की कार्यवाही बैवजह बाधित करने का कोई प्रावधान शायद नहीं है। देखा जाये तो सदन चलाने चुने हुये जनप्रतिनिधियों के रुप में संसद में संसद सदस्य और विधानसभा में, विधानसभा सदस्यों की जरुरत होती है। जिनकी सं या हर सत्ताधारी दल के पास पर्याप्त होती है। इसके बावजूद भी सदन में मार्शल व्यवस्था भी रहती है।
फिर भी सदन क्यों नहीं चल पा रहे।
यहीं प्रश्न देश के हर इन्सान के जहन में विगत कुछ वर्षो से गूँज रहा है। मगर जबाव न तो सत्ताधारी दल पर है, न ही विपक्ष पर, बेहतर हो सत्ता की सियासत छोड़ दल या नेता सेवा की सियासत करे। साथ ही एक दूसरे के मान,स मान, स्वाभिमान का याल रखे, तभी आने वाली पीढ़ी को सही संदेश मिल पायेगा। बरना आने वाला समय में किसी का भी मान-स मान, स्वा िामान नहीं बचा पायेगा।

सभी सरकारी कार्यालयों में अब 15 अगस्त तक चलेगा स्वच्छता अभियान : सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया परिपत्र
रायपुर. २९ जुलाई २०१५ छत्तीसगढ़ के शासकीय, अर्धशासकीय और सार्वजनिक उपक्रमों के कार्यालयों में स्वच्छता अभियान अब १५ अगस्त तक चलेगा। केन्द्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के निर्देश पर राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों को परिपत्र जारी किया है। मंत्रालय (महानदी भवन) से अध्यक्ष राजस्व मंडल, बिलासपुर सहित राज्य शासन के समस्त विभागों, विभागाध्यक्षों, संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को जारी परिपत्र में कहा गया है कि विगत जून महीने में २२ से २६ तारीख तक सभी कार्यालयों में संचालित स्वच्छता सप्ताह को १५ अगस्त तक जारी रखें। इस दौरान दफ्तरों में कार्य संस्कृति में सुधार लाने, काम-काज का वातावरण बेहतर बनाने और अधिकारियों तथा कर्मचारियों की कार्य क्षमता बढ़ाने की दृष्टि से कार्य स्थलों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए। छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय कार्यालयों में स्वच्छता अभियान के अंतर्गत कमरों, गलियारों, शौचालयों, सीढ़ियों और लिफ्ट आदि को हमेशा अच्छी हालत में रखने, साफ-सुथरा रखने और उनके नियमित रख-रखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। कार्यालयों के आस-पास तथा बाहर और पार्किंग क्षेत्र आदि को भी स्वच्छ रखने के उपाय किए जाएंगे। अनुपयोगी वाहनों, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों के नियमित अपलेखन और निराकरण की कार्रवाई की जाएगी। पुरानी फाइलों और पुराने अभिलेखों की छंटाई करके उनमें से अनुपयोगी नस्तियों और अभिलेखों का विनिष्टीकरण किया जाएगा। परिपत्र में कहा गया है कि स्वच्छता सप्ताह का आयोजन एक संकेत मात्र है। यह व्यवस्था निरंतर जारी रहनी चाहिए। परिपत्र में अधिकारियों से कहा गया है कि इस कार्य की सतत निगरानी के लिए नियमित निरीक्षण की भी व्यवस्था की जाए।

डॉ. कलाम को सच्ची श्रद्घांजलि विधानसभाकर्मी शनिवार को स्वेच्छिक राजकार्य करेंगे
जयपुर, 29 जुलाई। विधानसभा अध्यक्ष श्री कैलाश मेघवाल ने पूर्व राष्ट्रपति स्व. डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की स्मृति को नमन करते हुए कहा है कि जब पूर्व राष्ट्रपति जिन्दगी के अंतिम क्षण तक कार्य कर सकते हैं तो उन्हें सच्ची श्रद्घांजलि यही होगी कि उनके स मान में हम अवकाश के दिन काम करें और उनका विजन पूरा करने में अपनी भागदीरी निभायेंं। विधानसभा सचिव श्री पृथ्वी राज ने बताया कि राजस्थान विधानसभा सचिवालय कर्मचारी संघों के निर्णयानुसार विधानसभाकर्मी शनिवार 1 अगस्त को अवकाश नहीं रख कर कार्यालय में सामान्य दिनों की तरह कार्य स पादित करेंगे। यही डा. कलाम को सच्ची श्रद्घांजलि होगी। विधानसभा अध्यक्ष से नवनियुक्त न्यायिक अधिकारियों से भेंट की विधानसभा अध्यक्ष श्री कैलाश मेघवाल बुधवार को यहां विधानसभा में राजस्थान न्यायिक सेवा के नवनियुक्त 188 अधिकारियों ने भेंट की। विधानसभा अध्यक्ष ने नवनियुक्त अधिकारियों की जिन्होंने अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और उन्हें न्यायालयों में नियुक्त किया जाना है को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे ईमानदारी व निष्ठा के साथ अपना कर्तव्य पालन करें तथा जनता को शीघ्र सस्ता न्याय उपलब्ध कराये । उन्होंने कहा कि न्यायिक सेवा समाज का महत्वपूर्ण अंग है । विधानसभा अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि राज्य के न्यायालयों में ल बे समय से रिक्त पडे पदों पर नयी भर्ती होने से मुकदमों के शीघ्रता से निस्तारण होने के प्रयासों में सफलता मिलेगी विधानसभा के विशिष्ट सचिव श्री पृथ्वीराज ने नवनियुक्त अधिकारियों को विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन संबंधी नियमों की जानकारी दी। न्यायिक सेवा के नवनियुक्त अधिकारियों ने विधानसभा भवन का अवलोकन भी किया। इस अवसर पर राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक श्री बी. आर. चौधरी भी उपस्थित थे।

डिजिटल हस्ताक्षर और इलेक्ट्रोनिक संग्रह का प्रलेखन
29 जुलाई, 2015 व्यापार में सुविधा के लिए सरकार के पहलों के तहत केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड ने कारोबार करने में सरलता लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इस तरह का एक कदम उठाया गया है कि आवश्यक कागजातों को इलेक्ट्रोनिक दस्तावेजों के रूप में संरक्षित किया जाएगा और केन्द्रीय उत्पाद एवं सेवा कर में डिजिटल हस्ताक्षरित चालानों का उपयोग किया जाएगा। २०१५ के बजट में दो उद्देश्यों- विनिर्माताओं या सेवा प्रदाताओं द्वारा जारी किए गए चालानों पर डिजिटल हस्ताक्षर करने और विनिर्माताओं या सेवा प्रदाताओं को प्रमाणिक कागजातों को इलेक्ट्रोनिक तरीके से संग्रह करने में सुविधा प्रदान करने के लिए वैधानिक प्रावधानों में सुधार किए गए थे। विचार-विमर्श के बाद अब एक अधिसूचना और एक परिपत्र जारी किया गया है, जिसका व्‍यापार तथा प्रक्रिया व्यवस्था करने एवं सुरक्षा में अनुपालन किया जाएगा। अधिसूचना संख्या १८/२०१५-सीई (एनटी) और एफ संख्या २२४/४४/२०१४-सीएक्स६ से जारी निर्देश वेबसाइट 222.ष्ड्ढद्गष्.द्दश1.द्बठ्ठ पर उपलब्ध हैं। व्यापार करने में सुविधा और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के अलावा इन कदमों से व्यापार के लिए लेनदेन की लागत कम होने की उम्मीद है। 
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