सिन्ध आने तक संघर्ष जारी रहेगा: सिंधिया

विलेज टाईम्स, मप्र शिवपुरी 2 जुलाई 2015। सिंध को लेकर शिवपुरी में चल रहे जल आन्दोलन में जल क्रान्ति के धरना स्थल पर आये सिंधिया ने शिवपुरी सर्किट हाउस पर एक प्रेस वार्ता कर कहा कि म.प्र. सरकार फिलहॉल कुछ भी कहे, मगर मेरा संघर्ष शिवपुरी सिंध आने तक जारी रहेगा। और मैं तब तक म.प्र. की उस सरकार को कठघरे में खड़ा करता हूं, जब तक शहर वासियों को सिंध का शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं हो जाता। जिस योजना को मैंने 2007-08 में केन्द्र सरकार से स्वीकृत करा लग ाग 60 करोड़ की राशि राज्य सरकार को मुहैया कराई। उस योजना में साढ़े 5 साल का विल ब म.प्र. सरकार को कठघरे में खड़ा करने काफी है।


उन्होंने सिलसिले बार चार बिन्दुओं पर म.प्र. सरकार से जबाव मंागते हुये कहा कि वह बताये कि आखिर शिवपुरी शहर वासियो की सिंध जलावर्धन योजना में साढ़े 5 वर्ष का विल ब क्यों हुआ और इसके लिये कौन दोषी है। उन्होंने आन्दोलित शिवपुरी की जनता को धन्यवाद देते हुये कहा कि मैं एक सच्चे जनसेवक के रुप में जनता की सेवा करने में विश्वास रखता हूं जो मुझे मेरे पिता की विरासत में मिली है। मैं कतई इस बात से सहमत नहीं हू कि मेरी सेवा के बारे में लेागों के सोचने का नजरिया क्या है ?

जब उनसे विलेज टाई स स पादक वीरेन्द्र शर्मा भुल्ले ने पूछा कि क्या आप सहमत है कि एक सांसद के रुप में आप सांसद की सीमाऐं और उसके द्वारा किये जाने वाले कार्यो को आम जन को समझाने में असफल और जनता भी आपके कत्र्तव्य और सीमाओं को समझने में असफल रही। परिणाम कि विगत वर्षो में शिवपुरी शहर को मिलने वाले बजट के अलावा हजारों करोड़ की विकास एवं सेवा योजनाओं को लाने के बावजूद भी गत लोकसभा चुनाव में शिवपुरी विधानसभा सीट से कम मतदान कर पराजित किया है। जबकि कई रेलो की शुरुआत रेलवे स्टेशन का जीर्णोउद्वार, फुट ब्रज, ई-डिस्टिेक, ब्रॉडबेन्ड, ग्वालियर से देवास तक 4 हजार करोड़ की फॉरलेन की स्वीकृति एनटीपीसी, इन्जीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, झील सरंक्षण, सिंध जलावर्धन, सीवर लाइन प्रोजेक्ट, पायलेट प्रोजक्ट सिंचाई, आदिवासियों की आवास योजना इत्यादि है।

इस पर उनका जबाव था, हो सकता है मेरी कोई गलती रही हो, मगर मेरा अन्तिम लक्ष्य जनसेवा है, जो मैंने अपने पिता से सीखा है। जनता सर्वोपरि है और मैं अपने क्षेत्र की जनता के कन्धे से कन्धा मिलाकर साथ में अब सच क्या है यह तो जनता जर्नाधन ही बता सकते है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या शिवपुरी की समस्याऐं म.प्र. सरकार की दो-दो हार का प्रतिशोध है आ िार राजधर्म क्या कहता है। इस पर वह चुप ही रहे। मगर उन्होंने इतना अवश्य कहा कि यह सरकार को ही तय करना है। मगर मैं अपने क्षेत्र की जनता के साथ हूं, और रहूंगा। बहरहाल जो भी हो क्षेत्रीय सांसद के तेवर सुविधाओं को लेकर कलफती जनता के लिये काफी तेज तर्रार थे। देखना होगा कि इस कसमास और सिंध के लिये चल रहे जल आन्दोलन, जल क्रान्ति को लेकर भविष्य क्या होगा यह फिलहॉल आज भी भविष्य के गर्व में है।

छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों में ऋण वितरण जारी : अब तक ४.५१ लाख से ज्यादा किसानों को १३५६ करोड़ रूपए का ब्याज मुक्त ऋण वितरित
रायपुर, ०२ जुलाई २०१५ चालू खरीफ मौसम के दौरान छत्तीसगढ़ में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से अब तक चार लाख ५१ हजार से ज्यादा किसानों को एक हजार ३५६ करोड़ ६१ लाख रूपए का ऋण दिया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की घोषणा के अनुरूप किसानों को अल्पकालिक ऋण उन्हें शून्य ब्याज दर पर दिया जा रहा है। राज्य शासन द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार किसानों को ऋण राशि का ६० प्रतिशत नगद और शेष ४० प्रतिशत खाद, बीज के रूप में वितरित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज ने आज बताया कि प्रदेश के किसानों को खरीफ फसलों के लिए ब्याज मुक्त ऋण देने का कार्य सभी एक हजार ३३३ समितियों में तेजी से चल रहा है। खरीफ फसलों के लिए ऋण वितरण एक अपै्रल से शुरू हुआ है। विगत ३० जून तक एक हजार ३५६ करोड़ ६१ लाख रूपए का ऋण वितरित किया जा चुका है, जो लक्ष्य की ५१ फीसदी से अधिक है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष किसानों को लगभग दो हजार ६५० करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण बांटने का लक्ष्य रखा है। रायपुर जिले में २७ हजार ५८५ किसानों को ७५ करोड़ २५ लाख रूपए, गरियाबंद जिले में १५ हजार ६०८ किसानों को ३६ करोड़ ७४ लाख रूपए, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में ४२ हजार ०५७ किसानों को १०८ करोड़ १८ लाख रूपए, महासमुन्द जिले में २६ हजार ५७६ किसानों को ८५ हजार ८९ लाख रूपए, धमतरी जिले में २१ हजार ११४ किसानों को ४१ करोड़ ३६ लाख रूपए, धमतरी जिले में २६ हजार ७४७ किसानों को ९२ करोड़ २९ लाख रूपए का ऋण अब तक वितरित किया जा चुका है। इसी कड़ी में बालोद जिले में २६ हजार २०२ किसानों को ११६ करोड़ ५६ लाख रूपए, बेमेतरा जिले में ३३ हजार ६४९ किसानों को ११९ करोड़ ४६ लाख रूपए, राजनांदगांव जिले में ५२ हजार १०३ किसानों को १४६ करोड़ ६१ लाख रूपए, कबीरधाम जिले में ३० हजार ४७७ किसानों को १४७ करोड़ ६२ लाख रूपए का ऋण दिया जा चुका है। इस दौरान बिलासपुर जिले में २७ हजार ०२८ किसानों ने ६७ करोड़ ५६ लाख रूपए, मुंगेली जिले में २० हजार २३६ किसानों ने ५० करोड़ ५८ लाख रूपए, जांजगीर-चाम्पा जिले में ३८ हजार ७५२ किसानों ने ९६ करोड़ ८८ लाख रूपए तथा कोरबा जिले में नौ हजार ३८५ किसानों ने २३ करोड़ ४६ लाख रूपए का ऋण प्राप्त कर लिया है। इस अवधि में जगदलपुर जिले के चार हजार ०३५ किसानों को २५ करोड़ ९२ लाख रूपए, कोण्डागांव जिले के दो हजार ५३३ किसानों को आठ करोड़ ७३ लाख रूपए, नारायणपुर जिले के ३५६ किसानों को एक करोड़ २९ लाख रूपए, कांकेर जिले के ११ हजार ६९६ किसानों को २७ करोड़ ९७ लाख रूपए, दंतेवाड़ा जिले के ९५ किसानों को ९३ लाख ३१ हजार रूपए, सुकमा जिले के एक सौ किसानों को ७० लाख रूपए, बीजापुर जिले के ६५१ किसानों को दो करोड़ ३३ लाख रूपए, सरगुजा जिले के चार हजार ६२७ किसानों को १७ करोड़ ६७ लाख रूपए, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ७७६ किसानों को तीन करोड़ ३८ लाख रूपए, सूरजपुर जिले के तीन हजार ६११ किसानों को १३ करोड़ १५ लाख रूपए, कोरिया जिले के दो हजार ०१४ किसानों को सात करोड़ दो लाख रूपए, रायगढ़ जिले के १९ हजार ४७३ किसानों को ३४ करोड़ ६५ लाख रूपए तथा जशपुर जिले के तीन हजार ९८५ किसानों को चार करोड़ ३८ लाख रूपए के ऋण बांटे जा चुके हैं।

 पानी बचाने के लिए छोटे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लान्ट्स स्मृति वन, वुडलैण्ड़ पार्क, सहकार मार्ग में बनेंगे प्लांट
जयपुर, 02 जुलाई। जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा शहर के महत्वपूर्ण पार्को कुलिश स्मृति वन, वुडलैण्ड़ पार्क तथा सहकार मार्ग स्थित करतारपुरा नाले में 17.74 करोड रुपए की लागत से तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। इससे भविष्य में यहॉ ट्यूबवेल की बजाए सीवर के पानी को पुन: चक्रित कर सिंचाई के काम में लिया जा सकेगा। जेडीए जेएलएन मार्ग स्थित कर्पूर चंद्र कुलिश स्मृति वन में एक एमएलडी, मानसरोवर स्थित वुडलैण्ड पार्क में तथा सहकार मार्ग स्थित करतारपुरा नाले में दो-दो एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनवाएगा। इन तीनों स्थानों पर एसटीपी बनने के बाद लगभग 20 लाख लीटर पानी की बचत रोजाना होगी। इन कार्यो के लिए निविदाएं प्राप्त कर ली गई हैं, जिन पर शीघ्र ही अनुमोदन प्राप्त कर कार्य आर भ किया जाएगा। इसके अलावा शहर के हृद्य स्थल शासन सचिवालय के सामने सेंट्रल पार्क में सिंचाई के लिए एक एमएलडी के एसटीपी का निर्माण कार्य आर भ कर दिया गया है, जिसे अगले छह माह में पूर्ण कर लिया जाएगा। वर्तमान में सेंट्रल पार्क में लगभग 7-8 ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई का कार्य किया जाता है। इस प्लांट के बनने से यहॉ 7-8 लाख लीटर भूजल प्रतिदिन बचत होगी। चालू वित्त वर्ष 2015-16 में जेडीए की अनुमोदित पालडी मीणा योजना में करीब 13.62 करोड रुपए की लागत से सीवर लाईन तथा तीन एमएलडी क्षमता के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण प्रस्तावित है। इसमें एसटीपी का कार्य आर भ कर दिया गया है तथा सीवर कार्य के लिए निविदाएं आमंत्रित की जा रही हैं। इससे पहले जवाहर सर्किल, रामनिवास बाग तथा विद्याधर नगर स्थित स्वर्ण जयंती पार्को में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बन जाने से लगभग 15 लाख लीटर पानी की बचत हो रही है। इन तीनों पार्को में कुल मिलाकर 20 ट्यूबवेलों से पानी निकाला जा रहा था। शहर के विभिन्न स्थानों यथा लाजपत नगर, तुलसी नगर एवं गोनेर क्षेत्र में भी लगभग 25 किमी सीवरेज पाईप लाईन का कार्य किया गया है।  


                   भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित कौशल विकास योजनाओं के सामान्‍य नियम
०२-जुलाई, २०१५ प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमण्‍डल ने आज भारत सरकार के विविध मंत्रालयों/विभागों द्वारा कार्यान्वित समस्‍त कौशल विकास योजनाओं के सामान्‍य नियम प्रारंभ किये जाने को स्‍वीकृति दे दी। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा ७० से ज्‍यादा कौशल विकास कार्यक्रम (एसडीपी) चलाए जा रहे हैं, जिनमें से प्रत्‍येक की पात्रता अहर्ताएं, प्रशिक्षण की अवधि, प्रशिक्षण की लागत, निष्‍कर्ष, निगरानी एवं ट्रेकिंग व्‍यवस्‍था आदि के अपने नियम हैं। नियमों और मानकों के इस वैविध्‍य के कारण एसडीपी के प्रभाव में बिखराव है, जिन्‍हें परिकल्पित अंतिम निष्‍कर्ष प्राप्‍त करने के लिए व्‍यवस्थित किये जाने की जरूरत है। सामान्‍य नियम जानकारी, निष्‍कर्ष, निधियन/लागत नियम, तीसरे पक्ष का प्रमाणन एवं आकलन, निगरानी/ट्रेकिंग व्‍यवस्‍था और प्रशिक्षण देने वालों को कौशल विकास प्रक्रियाओं और व्‍यवस्‍थाओं की पूर्ण रेंज को तर्कसंगत बनाने का प्रयास करते हैं। सामान्‍य नियम देश में च्कौशल विकासज् संबधी गतिविधियों, कौशल विकास पाठ्यक्रमों और राष्‍ट्रीय कौशल गुणवत्‍ता ढांचे के साथ उनकी अनुरूपता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए व्‍यापक इनपुट मानकों और इन कार्यक्रमों से अपेक्षित निष्‍कर्षों को परिभाषित करते हैं। कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के निष्‍कर्षों को नए प्रशिक्षुओं और साथ ही साथ वर्तमान कामगारों, दोनों के लिए वेतन और स्‍वरोजगार के संदर्भ में प्राप्‍त स्थिति के संदर्भ में परिभाषित किया गया है। सामान्‍य नियमों का लक्ष्‍य निष्‍कर्षों पर केंद्रित होने के कारण कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए लागत नियम और धन के प्रवाह की व्‍यवस्‍था को विशिष्‍ट निष्‍कर्षों की प्राप्ति से जोड़ा गया है। लागत नियमों में प्रत्‍याशियों को संघटित करने, प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण, नियुक्ति का खर्च, नियुक्ति के बाद ट्रेकिंग/निगरानी और बुनियादी ढांचे की लागत शामिल है। प्रस्‍ताव में केंद्र सरकार की कौशल विकास योजनाओं में एकरूपता लाने और मानकीकरण करने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सचिव की अध्‍यक्षता में सामान्‍य नियम समिति के गठन की परिकल्‍पना की गई है। समिति में संबद्ध केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्‍य सरकारों, राष्‍ट्रीय कौशल विकास एजेंसी (एनएसडीए) और राष्‍ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के आठ अन्‍य प्रतिनिधि शामिल होंगे साथ ही ऐसे विशेषज्ञों और महत्‍वपूर्ण हितधारकों को आमंत्रित करने का प्रावधान भी होगा, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया में आवश्‍यक हो सकते है। इस समिति को कौशल विकास कार्यक्रमों के सामान्‍य नियमों, अधिसूचना के कार्यक्रमों, प्रशिक्षण लागत और धन संबंधी नियमों में संशोधन/सुधार करने का अधिकार होगा। सामान्‍य नियम जहां विभिन्‍न मंत्रालयों/विभागों द्वारा कार्यान्वित की जा रही भारत सरकार की कौशल विकास योजनाओं में लागू होंगे, वहीं राज्‍य सरकारों द्वारा भी एकरूपता और मानकीकरण के लिए अपनी कौशल विकास योजनाओं को सामान्‍य नियमों के अनुरूप बनाने की सम्‍भावना है।
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