स्वस्थ रहने, सावधानी बड़ा उपाय: सिविल सर्जन

म.प्र. शिवपुरी। उल्टी दस्त, डायरिया, मलेरिया से बचाव के टिप्स देने आयोजित पत्रकार वात्र्ता में जिला चिकित्सालय सिविल सर्जन गोविन्द सिंह ने पत्रकारों को स बोधित करते हुये कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ के लिये मां के दूध से बेहतर और कोई दूसरी औषधि नहीं हो सकती। उसके बावजूद भी अगर किसी बच्चे को दो से अधिक बार दस्त या उल्टी होती है। तो ओ.आर.एस. का घोल अवश्य पिलाये और तत्काल किसी नजदीकी स्वास्थ केन्द्र में चिकित्सक को दिखाये।


उन्होंने कहा कि घर परिवार में लेाग स्वस्थ रहने स्वच्छता का विशेष याल रखे, जिसमें शौच के बाद साबुन या सर्प से हाथ को साफ करे न कि राख मिट्टी से क्योंकि बीमारी का यह भी हमारे समाज में एक बड़ा कारण है। जिसे समझना अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने 15 दिनों तक चलने वाले इस अभियान में आशा कार्यकत्र्ताओं द्वारा घर-घर जाकर ओ.आर.एस. घोल के पैकेट, गोलियाँ बांटे जाने की जानकारी दी। वहीं उपस्थित मलेरिया अधिकारी अल्का द्विवेदी ने बताया कि मलेरिया बचाव हेतु घरो में कहीं भी पानी जमा न होने दे क्योंकि हैपेटाइटिस एवं चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लारवा घरों में जमा रहने वाले पानी में ही पनपते है तथा घर के आस-पास गड्डे मे भी मलेरिया मच्छर पनपते है। उन्होंने खुली जगह पर पनपने वाले लारवा के खात्मे के लिये ग बोस मछली के बारे में भी बताया उन्होंने नगरपालिकाओं से अपेक्षा की है। कि वह ऐसी जगह चिहिन्त कर दवा का छिड़काव करे जिससे मच्छर न पनपे।

स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करेंगे स्वर्गीय डॉ. कलाम की जीवनी : डॉ. रमन सिंह : पूर्व राष्ट्रपति को दी गई विनम्र श्रद्धांजलि
रायपुर, 28 जुलाई 2015 पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की अपार लोकप्रियता का सबसे बड़ा उदाहरण आज शाम यहां देखने में आया, जब उनके निधन पर शोक प्रकट करने और उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि देने सभी राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों तथा समाज के सभी वर्गों के नागरिकों ने श्रद्धांजलि सभा में भारी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के मार्गदर्शन में यह आयोजन प्रदेश सरकार के जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्थानीय नवीन विश्राम भवन के सभाकक्ष में किया गया। अत्यंत गमगीन तथा अश्रुपूरित वातावरण में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी, छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल, प्रदेश के कृषि और जल संसाधन मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल, राजस्व और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति विकास मंत्री श्री केदार कश्यप, नगरीय प्रशासन और उद्योग मंत्री श्री अमर अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रमशिला साहू, पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री दयालदास बघेल, वन मंत्री श्री महेश गागड़ा, विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री भूपेश बघेल, विधायक सर्वश्री सत्यनारायण शर्मा, अमरजीत भगत, श्रीचंद सुंदरानी, खिलावन साहू सहित विभिन्न निगम, मंडलों के अध्यक्ष और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने श्रद्धांजलि सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि डॉ. कलाम का निधन देश और दुनिया के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के लिए भी अत्यंत पीड़ादायक है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्कूली पाठ्यक्रम में डॉ. कलाम की जीवनी शामिल करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में बच्चों जैसी सरलता थी। राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाले इतने सहज-सरल व्यक्ति बिरले ही होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम की यह इच्छा थी कि वे आजीवन शिक्षक के रूप में पहचाने जाएं और जीवन के अंतिम क्षण तक शिक्षकीय कार्य करते रहें। उनकी यह इच्छा पूरी हुई, जब उन्होंने शिलांग स्थित भारतीय प्रबंध संस्थान (आई.आई.एम.) के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए अपना यह नश्वर शरीर छोड़ा। वह बेहद शांत भाव से इस दुनिया से बिदा हो गए। हमारे देश में यह कथन प्रचलित है कि महान व्यक्ति और पुण्य आत्माएं वास्तव में अपनी इच्छा से ही देह त्याग करती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम छत्तीसगढ़ सहित देश भर में समाज के सभी वर्गों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे। उनके निधन पर बच्चों और युवाओं को मैंने रोते-बिलखते देखा। यह उनकी अपार लोकप्रियता का परिचायक था। डॉ. रमन सिंह ने रक्षा वैज्ञानिक और बाद में राष्ट्रपति तथा पूर्व राष्ट्रपति के रूप में समय-समय पर डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की छत्तीसगढ़ यात्रा का भी उल्लेख किया और उनसे जुड़े संस्मरण सुनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ डॉ. कलाम का लगभग 38 से 40 वर्ष पुराना संबंध था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख के रूप में भी उनका छत्तीसगढ़ आना-जाना लगा रहता था। बस्तर से लेकर रायपुर तक छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से वह परिचित थे। उन्होंने अपनी कविता ’छत्तीसगढ़ के जन-गण-मन की जय हो’ में यहां की नैसर्गिक विशेषताओं का और वीरनारायण सिंह तथा गुरू घासीदास जैसी महान विभूतियों का भी उल्लेख किया है। डॉ. सिंह ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में वर्ष 2004 में डॉ. कलाम द्वारा विजन 2020 को लेकर दिए गए उद्बोधन को भी याद किया। उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. कलाम ने हाल ही में मुझे तीन पृष्ठों का एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज्य के विकास में अपना योगदान देने की पेशकश की थी। इस मौके पर कृषि मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. कलाम वास्तव में महापुरूष थे। राजस्व और उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा कि डॉ. कलाम देश के सर्वाधिक लोकप्रिय व्यक्ति थे। हम सबका सौभाग्य था कि देश के संसदीय इतिहास में पहली बार किसी राष्ट्रपति ने अगर किसी विधानसभा को सम्बोधित किया तो वह छत्तीसगढ़ की विधानसभा थी, जिसे डॉ. कलाम ने सम्बोधित किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और विधायक श्री भूपेश बघेल ने कहा कि डॉ. कलाम के नहीं रहने पर आज हर भारतीय ऐसा महसूस कर रहा है, जैसे हमारा अपना कोई खो गया है। उनका हृदय सागर की तरह विशाल और उनके विचार हिमालय की तरह ऊंचे थे। वह वास्तव में महामानव थे। पूर्व मुख्यमंत्री श्री अजीत जोगी ने भी स्वर्गीय डॉ. कलाम से जुड़े संस्मरणों को साझा किया। श्री जोगी ने कहा कि डॉ. कलाम राष्ट्रपति पद से अवकाश ग्रहण करने के बाद एक शिक्षक के रूप में जीवन व्यतीत करना चाहते थे। उनकी इच्छा थी कि वे घूम-घूमकर स्कूल, कॉलेजों में बच्चों के बीच अपने विचार रखें। श्री जोगी ने कहा कि उनसे जुड़ी यादें आज मेरी आंखों के सामने जुलूस की तरह गुजर रही हैं। छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष श्री गौरीशंकर अग्रवाल ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. कलाम भारत माता के सच्चे सपूत थे। जब वह रायपुर आए थे, उनके स्वागत का सौभाग्य मुझे भी मिला था। उस समय ऐसा लगा जैसे वह एक अभिभावक की तरह अपने बच्चों से स्नेहपूर्वक मिल रहे हैं। पुरखौती मुक्तांगन का लोकार्पण उन्होंने किया था। नगर निगम रायपुर के महापौर श्री प्रमोद दुबे ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. कलाम के व्यक्तित्व को शब्दों में बांधना मुमकिन नहीं है। पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाण्डेय ने कहा कि स्वर्गीय डॉ. कलाम जन साधारण के राष्ट्रपति के रूप में पूरे देश में लोकप्रिय हुए। मेरा सौभाग्य था कि मुझे भी उनके साथ कुछ समय गुजारने का मौका मिला। जब वे बेमेतरा में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में शामिल होने आए थे, उस समय मेरे आग्रह पर वह हमारे विश्वविद्यालय में भी आकर युवाओं के बीच अपना व्याख्यान दिया था। मुख्य सचिव श्री विवेक ढांड ने भी डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्रदेश सरकार की अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि सभा में संसदीय सचिव श्री लाभचंद बाफना, पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष श्री देवजी भाई पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष श्री सलीम अशरफी, अपेक्स बैंक के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती शताब्दी पाण्डेय, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम की अध्यक्ष सुश्री लता उसेंड़ी, छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के अध्यक्ष श्री रसीक परमार, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री संतोष बाफना, अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री रामजी भारती, निःशक्तजन वित्त एवं विकास निगम की अध्यक्ष श्रीमती सरला जैन सहित अनेक संस्थाओं के प्रतिनिधि, पुलिस महानिदेशक श्री ए.एन. उपाध्याय, प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव सर्वश्री एन.के. असवाल, अजय सिंह, गृह विभाग के प्रमुख सचिव श्री सुब्रमणियम, ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव श्री अमन कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. बी.एल. तिवारी, जनसम्पर्क विभाग के सचिव श्री गणेश शंकर मिश्रा, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव श्री सुब्रत साहू सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर उपस्थित थे। जनसम्पर्क विभाग के सचिव श्री गणेश शंकर मिश्रा ने श्रद्धांजलि सभा में सहयोग और उपस्थिति के लिए सभी लोगों के प्रति आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन श्री हिमांशु द्विवेदी ने किया। श्री रमेश नैयर ने स्वर्गीय डॉ. कलाम का जीवन परिचय प्रस्तुत किया।

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